Saturday, April 13, 2024
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मुख्यमंत्री ने प्रदेश के जलमार्गों के विकास के सम्बन्ध में विचार-विमर्श किया

 
उ0प्र0 अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण’ के
गठन के सम्बन्ध में आवश्यक दिशा-निर्देश
 
प्रदेश में जलमार्गों के सृजन, विकास और यातायात व माल ढुलाई के लिए प्रयोग में लाने के लिए ठोस प्रयास करने की आवश्यकता, इसे नियोजित रूप देते हुए अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण का गठन किया जाए: मुख्यमंत्री
 
‘उ0प्र0 अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण’ भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के साथ समन्वय का कार्य करेगा, प्राधिकरण द्वारा अन्तर्देशीय जल परिवहन एवं पर्यटन सम्बन्धी समस्त गतिविधियों का नियमन किया जाएगा
 
उ0प्र0 सदानीरा नदियों का प्रदेश, यहां अधिकांश
नदियों में प्रत्येक समय पर्याप्त जल उपलब्ध रहता
 
प्रदेश में प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में जलमार्ग परिवहन का तेजी से विस्तार
हो रहा, प्रयागराज से हल्दिया तक राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1 क्रियाशील
 
प्रदेश में अन्तर्देशीय जल परिवहन में यात्रियों और कार्गो
दोनों के लिये अपार सम्भावनाएं, इसे और विस्तारित करना होगा
 
नदियों के कैचमेंट एरिया में अवैध खनन/बसाहट पर पूरी तरह प्रतिबन्ध लगाया जाए, नदियों के चैनेलाइजेशन, सिल्ट सफाई का कार्य भी समय से किया जाए

लखनऊ:  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश के जलमार्गों के विकास के सम्बन्ध में विचार-विमर्श किया। उन्होंने ‘उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण’ के गठन के सम्बन्ध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में जलमार्ग परिवहन का तेजी से विस्तार हो रहा है। प्रयागराज से हल्दिया तक राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1 क्रियाशील है। प्रदेश में परिवहन के एक साधन के रूप में अन्तर्देशीय जल परिवहन में यात्रियों और कार्गो दोनों के लिये अपार सम्भावनाएं हैं, हमें इसे और विस्तारित करना होगा।
मुख्यमंत्री   ने कहा कि उत्तर प्रदेश सदानीरा नदियों का प्रदेश है। यहां अधिकांश नदियों में प्रत्येक समय पर्याप्त जल उपलब्ध रहता है। प्रदेश में जल परिवहन की प्राचीन परम्परा रही है। एक समय था कि जब अयोध्या की राजकुमारी जलमार्ग से ही दक्षिण कोरिया गई थीं। बदलते समय के साथ इस क्षेत्र को उपेक्षित कर दिया गया। प्रदेश में जलमार्गों के सृजन, विकास और उन्हें यातायात व माल ढुलाई के लिए प्रयोग में लाने के लिए ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है। इसे नियोजित रूप देते हुए प्रदेश में अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण का गठन किया जाए। इस सम्बन्ध में राष्ट्रीय जलमार्ग प्राधिकरण और अन्य राज्यों में प्रचलित व्यवस्था का अध्ययन कर आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करें।
मुख्यमंत्री   ने कहा कि उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण नोडल अथाॅरिटी के रूप में भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के साथ समन्वय का कार्य करेगा। प्राधिकरण द्वारा अन्तर्देशीय जल परिवहन एवं पर्यटन सम्बन्धी समस्त गतिविधियों का नियमन किया जाएगा। साथ ही, यह प्राधिकरण जल परिवहन से सम्बन्धित पर्यावरण एवं सुरक्षा कानूनों का अनुपालन, जलमार्गों के विकास एवं बेहतर उपयोग हेतु हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण एवं जांच की जिम्मेदारी का निर्वहन भी करेगा।
इस प्राधिकरण द्वारा अन्तर्देशीय जल यातायात डेटा का अध्ययन एवं विश्लेषण, अन्तर्देशीय जल परिवहन, पर्यटन एवं शिपिंग तथा नेविगेशन से जुड़ी गतिविधियों के सम्बन्ध में वैज्ञानिक अनुसंधान किया जाएगा। प्राधिकरण द्वारा अन्तर्देशीय जल परिवहन से सम्बन्धित स्टेकहोल्डर्स एवं अधिकारियों/कर्मचारियों का तकनीकी प्रशिक्षण भी कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण में परिवहन मंत्री को पदेन अध्यक्ष नामित किया जाना चाहिए। जबकि उपाध्यक्ष के रूप में जल परिवहन क्षेत्र में सुदीर्घ अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ की तैनाती की जानी चाहिए। प्रदेश के परिवहन आयुक्त को प्राधिकरण के सी0ई0ओ0 की भूमिका दी जानी चाहिए। इसके अलावा, वित्त, संस्कृति, सिंचाई तथा वन सहित अन्य सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों को बतौर सदस्य सम्मिलित किया जाना चाहिए। नदियों के कैचमेंट एरिया में अवैध खनन/बसाहट पर पूरी तरह प्रतिबन्ध लगाया जाए। इसके लिए सतर्कता से कार्य किया जाए। नदियों के चैनेलाइजेशन, सिल्ट सफाई का कार्य भी समय से किया जाए।
इस अवसर पर परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर सिंह, मुख्य सचिव श्री दुर्गाशंकर मिश्र, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री एस0पी0 गोयल, प्रमुख सचिव परिवहन श्री एल0 वेंकटेश्वर लू, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना श्री संजय प्रसाद, प्रमुख सचिव पर्यटन श्री मुकेश कुमार मेश्राम, प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग श्री अजय चैहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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