Thursday, February 29, 2024
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भक्त का स्थान भगवान से ऊंचा होता है-कमल किशोर नागर

भक्ति पांडाल छोटा पड़ा श्रद्धालुओ ने सड़कों पर  कथा श्रवण की।,

6करोड़ 3लाख 97हजार,जाप,
नीमच 7अगस्त 2023 (केबीसी न्यूज़)विपरीत परिस्थितियों में भी ध्रुव ने भगवान की भक्ति को नहीं छोड़ा था और अंत में भक्ती की विजय हुई। सुदामा के पास देने को कुछ नहीं था फिर भी  चावल मांग कर कृष्ण को देने गया इसलिए भक्त का स्थान भगवान से भी ऊंचा होता है।यदि किसी भक्तों को पीड़ा होती है तो भगवान को ज्यादा दुख होता है।भक्त का स्थान भगवान से ऊंचा होता है।
यह बात  मालवा माटी के सपूत गौ भक्त कमल किशोर नागर ने कही। वे रतनगढ़ के समीप स्थित बरेखन गौशाला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भागवत कथा श्रवण करने से पिछले सात जन्मों के पाप कर्म  नष्ट हो जाते हैं। वर्तमान जन्म तथाअगला जन्म भी सुधर जाता है।एक अत्यंत निर्धन व्यक्ति होने के बाद भी यदि वह दान करता है तो उसका स्थान भगवान की दृष्टि में सबसे ऊंचा होता है। ध्रुव का स्थान भक्तों में सबसे ऊंचा है । मां बिना किसी घृणा वात्सल्य भाव से अपनी संतान की सेवा करती है। भगवान भी वात्सल्य भाव से अपने भक्तों की सेवा करते हैं। यदि गौ माता का आशीर्वाद साथ है तो दुनिया की कोई शक्ति आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती है।मनुष्य जीवन में भजन ,भोजन ,दान ,सेवा विवाह , स्वयं को कर्म करने पड़ते हैं कोई अपनों को कहेगा नहीं।भजन बिना भी लोग जीवन जीते हैं लेकिन उनका जीवन जीवन नहीं होता है भगवान साथ नहीं है तो जीवन अधूरा होता है।संसार के लोग नहीं सुनते लेकिन फिर भी हम उनके सामने रोते रहते हैं।जो भगवान हमारी बात सुनता है हम उनके आगे भजन करने से भी लापरवाही करते हैं। यदि हम रामायण की एक चौपाई का स्मरण करे तो तुलसी का स्मरण हो जाता है। छोटे बड़े बच्चे बुजुर्ग सभी अपने नियम में रहे तो परिवार में सुख शांति रहेगी धर्म-कर्म का त्रिवेणी संगम है। निंदा करने वाले को अपने पास रखना चाहिए क्योंकि कभी-कभी निंदा करने वाला  पाप कर्म से अपने को सजग करता है और पाप कर्म अपने कम हो जाते हैं। मनुष्य जन्म में यदि व्यक्ति निस्वार्थ भाव से भजन सत्संग करें तो भगवान भी साथ देता है। गीता उपदेश में श्री कृष्ण  ने अर्जुन से कहा तू कर्म कर में सारथी बनकर ‌तेरे साथ हूं।  भूख ,भय ,भजन कम हो जाए तो समझे प्रभु भक्ति जागृत हो गई। हरि भजन बिना जीवन का कल्याण नहीं होता है। संसार में कोई भी व्यक्ति भजन करने के लिए नहीं कहता है ।सिर्फ भागवत कथा में ही भजन करने की प्रेरणा दी जाती है। गोपी भक्ति का स्वरूप है। भक्तों का प्रेम परमात्मा से होता है।  परमात्मा से भी प्रेम बड़ा होता है। पहले प्रेम मिलता है फिर परमात्मा मिलते हैं परमात्मा प्रेम से थोड़ा छोटा है प्रेम कथा में पाया जाता है।  सुबह  जल्दी 4 बजे उठकर कृष्ण की भक्ति करती थी।
रुकमणी बचपन से कृष्ण की भक्ति पूजा करती थी। और आखिर एक दिन श्रीकृष्ण ने रुकमणी से विवाह कर लिया था।श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा पोथी पूजन महाआरती में  कांग्रेस नेता सत्यनारायण पाटीदार, अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन जायसवाल, डॉ भरत धाकड़, धीरेंद्र दत्त गुलाबपुरा , घीसालाल लोहार छित्तरमल धाकड़ रामेश्वर धाकड़ जगन्नाथ धाकड़ बंसीलाल धाकड़ , अशोकजायसवाल,गणमान्य लोग  उपस्थित थे।
पंडित  नागर महाराज ‌ने सुखदेव मुनि, राजा परीक्षित, तक्षक नाग,
श्री कृष्ण सुदामा , श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह प्रसंग आदि विषयों के महत्व पर प्रकाश डाला। भक्ति पांडाल में सांवरिया सेठ के जय कारे लगे। भागवत कथा के मध्य पंडित कमल किशोर नागर ने ओम नमः शिवाय का जाप सभी से सामूहिक रूप से करवाया।जिसमें सभी ने सहभागिता निभाई और  भक्ती तप की तपस्या का आनंद लिया। जिस की संख्या 6करोड़ 3 लाख97हजार हो गई। श्रीमद् भागवत कथा पंडाल के समीप पीने के पानी के पानी के टैंकर , आग बुझाने की दो फायर बिग्रेड ,आपातकालीन चिकित्सा सेवा हेतु एंबुलेंस, पुलिस कार्यालय कक्ष‌‌ ,चलित शौचालय कक्षआदि जन सुविधा भागवत के दौरान की गई।भागवत कथा में छटे दिन जनसैलाब तीन गुना हो गया श्रद्धालु भक्तों को सड़क पर बैठकर भागवत कथा सुनते देखा गया। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा भक्ति पंडाल के बाहर सड़क पर यातायात एवं वाहन पार्किंग पुलिस विभाग के अधिकारियों एवं पुलिस कर्मियों द्वारा सुरक्षा व्यवस्था संभाले हुए थे। जिसमें शशिकांत चोहान, शिवराज सिंह, छविनाथ सेंगर, प्रहलाद पवार, कैलाश राठौर रंजना डामोर ,सोनु वडगूंर्जर, हिमांशु ,संजय आदि पुलिस विभाग के पुलिस कर्मचारियों ने सहयोग प्रदान किया।महा आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में निंबाहेड़ा, जावद, डिकेन, रतनगढ़, सिंगोली, मोरवन दूध तलाई ,रामनगर, सरवानिया महाराज, बेगू ,कनेरा ,जीरन आदि क्षेत्र के श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे

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