Monday, April 15, 2024
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जाणता राजा’ महानाट्य का आयोजन किया जा रहा-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा आयोजित व्याख्यान ‘छत्रपति शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व एवं कृतित्व वर्तमान परिस्थिति में’ को सम्बोधित किया
 
छत्रपति शिवाजी महाराज ने आज से लगभग 350 वर्ष पूर्व हिन्दवी साम्राज्य की स्थापना की, उनकी स्मृतियों को स्मरणीय बनाने के लिए दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा लखनऊ में 26 से 31 अक्टूबर, 2023 तक ‘जाणता राजा’ महानाट्य का आयोजन किया जा रहा : मुख्यमंत्री
 
प्रदेश के लिए यह आयोजन गौरव की बात, यह सभी को नई प्रेरणा देगा
 
महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी तथा गुरु गोविन्द सिंह का व्यक्तित्व हमें आगे बढ़ने तथा विपरीत परिस्थितियों में धैर्य न खोते हुए चुनौतियों से जूझने की प्रेरणा देता
 
प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से भारत सरकार ने भारतीय नौसेना के झण्डे में छत्रपति शिवाजी महाराज के समय का निशान सम्मिलित किया
 
जनपद आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज की स्मृतियों को संजोते हुए उनके नाम पर संग्रहालय बनाया जा रहा
 
भारत अनेक झंझावातों से जूझते हुए, विभिन्न परिस्थितियों तथा हमलों का सामना करते हुए आज भी अपना अस्तित्व बनाये हुए
 
भारत ने दुनिया को सदैव एक नई दृष्टि तथा नेतृत्व दिया
 
प्रधानमंत्री जी ने भारत को वर्ष 2047 तक दुनिया की महानतम ताकत के रूप में स्थापित करने तथा विकसित देश बनाने के लिए पंचप्रण दिये

 

लखनऊ :  

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   ने कहा है कि देश छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम श्रद्धा के साथ लेता है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने आज से लगभग 350 वर्ष पूर्व हिन्दवी साम्राज्य की स्थापना की। उनकी स्मृतियों को स्मरणीय बनाने के लिए दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा लखनऊ में 26 से 31 अक्टूबर, 2023 तक ‘जाणता राजा’ महानाट्य का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश के लिए यह आयोजन गौरव की बात है। यह सभी को नई प्रेरणा देगा।
मुख्यमंत्री  दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा आयोजित व्याख्यान ‘छत्रपति शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व एवं कृतित्व वर्तमान परिस्थिति में’ के अवसर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। ज्ञातव्य है कि दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा लखनऊ में आगामी 26 से 31 अक्टूबर, 2023 के मध्य छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित महानाट्य ‘जाणता राजा’ का मंचन किया जाएगा। इसी के सन्दर्भ में यह व्याख्यान आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री   ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के पीछे उनकी माता जीजाबाई तथा उनके गुरु समर्थ गुरु रामदास की दिव्य दृष्टि थी। योग्य गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने मुगलों के तथा विदेशी हुकूमत के छक्के छुड़ा दिये। हमारा अस्तित्व समाज तथा राष्ट्र से है। जो समाज व देश का दुश्मन है, वह हमारा मित्र नहीं हो सकता। उसके साथ कैसे व्यवहार होना चाहिए, यह दृष्टि छत्रपति शिवाजी ने दी थी। दृढ़ इच्छा शक्ति, लड़ने के जज्बे तथा उचित रणनीति के सामने बड़ी सेना मायने नहीं रखती। छत्रपति शिवाजी ने गोरिल्ला युद्ध के माध्यम उस समय की सबसे बड़ी ताकत को हिलाने का काम किया था।
मुख्यमंत्री   ने कहा कि उत्तर प्रदेश से भी छत्रपति शिवाजी का सम्बन्ध दो दृष्टियों से था। पहला, उनके राज्याभिषेक के लिए पुरोहित पं0 गंग भट काशी से गये थे। दूसरा, छत्रपति शिवाजी के शौर्य का वर्णन करते हुए महाकवि भूषण ने कहा कि ‘दावा दु्रम दंड पर, चीता मृगझुंड पर, ‘भूषन वितुंड पर, जैसे मृगराज हैं। तेज तम अंस पर, कान्ह जिमि कंस पर, त्याँ मलिच्छ बंस पर, सेर शिवराज हैं।’ अर्थात जिस प्रकार पेड़ों के तनों पर दावानल, हिरणों के झुण्ड पर चीता, हाथी पर शेर, अंधेरे पर प्रकाश की एक किरण, कंस पर कृष्ण भारी हैं, उसी प्रकार म्लेच्छ वंश पर शिवाजी शेर के समान हैं।
मुख्यमंत्री   ने कहा कि विगत दिनों प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रेरणा से भारत सरकार ने भारतीय नौसेना के झण्डे में छत्रपति शिवाजी महाराज के समय का निशान सम्मिलित किया है। जनपद आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज की स्मृतियों को संजोते हुए उनके नाम पर संग्रहालय बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री   ने कहा कि महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी तथा गुरु गोविन्द सिंह का व्यक्तित्व हमें आगे बढ़ने तथा विपरीत परिस्थितियों में धैर्य न खोते हुए चुनौतियों से जूझने की प्रेरणा देता है। जो सत्य है, वहीं सनातन भी है। भारत में सनातन धर्म से जुड़े हुए सभी परिवारों के बच्चों में श्रीराम तथा श्रीकृष्ण से जुड़ी कथाएं आदर्श प्रभाव छोड़ती हैं। रामायण तथा महाभारत के साथ हमारा इतिहास तथा भविष्य दोनों जुड़े हैं। यह सत्य का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री  ने कहा कि इन प्रारम्भिक संस्कारों के साथ बालक के सामने छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, गुरु गोविन्द सिंह, रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती जैसे महान तथा समाज को नेतृत्व व प्रेरणा देने वाले व्यक्तित्व आदर्श के रूप में उपस्थित होते हैं। इन महान विभूतियों ने हमें नेतृत्व दिया तथा अपने उच्च आचरण से हमारे सामने मर्यादा का आदर्श प्रस्तुत किया। स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि सभी व्यक्तियों तथा समाजों को अपने महापुरुषों पर गौरव की अनुभूति करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री  ने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत अनेक झंझावातों से जूझते हुए, विभिन्न परिस्थितियों तथा हमलों का सामना करते हुए आज भी अपना अस्तित्व बनाये हुए है। हजारां वर्षां से सांस्कृतिक भारत के रूप में इसकी पहचान रही है। हमारे शास्त्रों ने हिमालय से लेकर समुद्र पर्यन्त देवताओं द्वारा रक्षित भूमि के रूप में इसे मान्यता दी है। देश में अलग-अलग कालखण्डों में अलग-अलग सत्ताएं रहीं, लेकिन भारत की आत्मा कभी भी अपने मूल सत्व से विचलित नहीं हुई।
मुख्यमंत्री   ने कहा कि भारत ने दुनिया को सदैव एक नई दृष्टि तथा नेतृत्व दिया है। केरल में जन्मे आदि शंकराचार्य ने पूरे देश का भ्रमण कर चार कोनों में चार पीठों की स्थापना की। उन्होंने मात्र 32 वर्ष की अवस्था में समाधि ली। इसी तरह विभिन्न कालखण्डों में आचार्य रामानुज तथा संत रामानन्द सहित अनेक संतों, महापुरुषों ने भारत को नेतृत्व दिया। भारत ने दुनिया में सुश्रुत के रूप में पहला सर्जन दिया। विमानन शास्त्र के क्षेत्र में महर्षि भारद्वाज तथा परमाणुवाद का सिद्धान्त देने वाले महर्षि कणाद जैसे महापुरुषों का स्मरण कर ही हम आगे बढ़ सकते हैं।
मुख्यमंत्री   ने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक दुनिया की महानतम ताकत के रूप में स्थापित करने तथा विकसित देश बनाने के लिए प्रधानमंत्री जी ने पंचप्रण दिये हैं। इनमें गुलामी के सभी अंश से मुक्ति, विरासत का सम्मान करना तथा नागरिकों के कर्तव्य शामिल हैं। एक नागरिक के रूप में हमें अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
मुख्यमंत्री   ने कहा कि उत्तर प्रदेश में डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर के 06 नोड लखनऊ, अलीगढ़, कानपुर, आगरा, चित्रकूट तथा झांसी में विकसित किये जा रहे हैं। यह देश को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएंगे। इनमें ज्यादातर क्षेत्रों में भारत की स्वाधीनता के लिए रानी लक्ष्मीबाई तथा मराठा सेनाओं ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इन क्षेत्रों को भारत को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के कार्य से जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री  ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘जाणता राजा’ का मंचन एक अद्भुत अवसर होगा। दिव्य प्रेम सेवा मिशन इस आयोजन के माध्यम से समाज के बड़े तबके को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। यह समाज को अच्छी दिशा में प्रेरित करने के लिए एक सार्थक पहल है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह  श्री सुरेश भैय्या जी जोशी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन में देश हित तथा राष्ट्र हित सर्वापरि था। शिवाजी की माता जी ने उनके सामने जीवन का उद्देश्य रखा। शिवाजी महाराज का शौर्य और पराक्रम देश व समाज की रक्षा के लिए समर्पित था। उन्होंने सभी को संघर्ष करने के लिए प्रेरित करते हुए मातृभूमि को स्वतंत्र करने का बीड़ा उठाया। वह सदैव नेतृत्व की कसौटी पर रखे उतरे। छत्रपति शिवाजी ने दूर-दृष्टि का परिचय देते हुए उस समय नौसेना का निर्माण करते हुए अपनी सेना को आधुनिक संसाधनों से युक्त करने का कार्य किया था।
इस अवसर पर दिव्य प्रेम सेवा मिशन के अध्यक्ष आशीष गौतम, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  कामेश्वर सिंह, शिव सृष्टि ट्रस्ट के महासचिव  अजीत आप्टे सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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