Thursday, October 22, 2020
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UP: सहकारिता भर्ती ब्यूरो में दोषियों के खिलाफ जल्द ही हो सकती है FIR, मंत्री के पत्र के बाद जांच तेज | lucknow – समाचार हिंदी में


उत्तर प्रदेश: सहकारिता भर्ती आयोग में दोषियों के खिलाफ जल्द ही एफआईआर, मंत्री के पत्र के बाद जांच तेज हो सकती है

यूपी कोऑपरेटिव भर्ती स्कला: अपर मुख्य सचिव एमवीएस रामी रेड्डी ने सभी अभिलेखों को जांच के लिए एसआईटी को सौंप दिया है।

उत्तर प्रदेश में सहकारिता विभाग (सहकारिता विभाग) में वर्ष 2012 से 2017 के बीच हुई भर्ती (भर्ती घोटाला) में मंत्री मोती सिंह के पत्र के बाद एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ा लिया है। माना जा रहा है कि इसमें जल्द ही कार्रवाई हो सकती है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सहकारिता विभाग (सहकारिता विभाग) में वर्ष 2012 से 2017 के बीच भर्ती आरक्षकों (भर्ती घोटाला) में दोषियों के खिलाफ एफआईआरआर (एफआईआर) दर्ज कराने के आसार हैं। यूपी कोऑपरेटिव बैंक में सहायक प्रबंधक के 53 पदों पर हुई भर्तियों में अनियमितता पाई गई है। रेग की औसत मंजूरी मिलते ही प्रदेश पुलिस की एसआईटी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकती है। सूत्रों के अनुसार शासन के गृह विभाग में एसआईटी की रिपोर्ट पर होने वाली कार्रवाई के बारे में फैसला लिया गया है। एसआईटी ने जांच में भर्तियों में हुई अनियमितता का मामला उजागर करते हुए गृह विभाग से मुकदमा दर्ज कर विवेचना उपलब्ध कराने की संस्तुति की थी।

आला अधिकारियों पर तलवार लटकने के आसार

अपर मुख्य सचिव एमवीएस रामी रेड्डी के मुताबिक जांच रिपोर्ट में यूपी कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के तत्कालीन एमडी और उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवामंडल के तत्कालीन अध्यक्ष के अलावा निबंधक सहकारिता के कार्यालय के कुछ अधिकारियों का भी नाम हैं। आरोपी अफसरों को निर्धारित अर्हता में नियम विरुद्ध तरीके से बदलाव करने और परीक्षा एजेंसी के माध्यम से ओएमआर शीट में हेराफेरी प्रदान में दोषी बताया गया है।

दूसरी रिपोर्ट भी जल्द ही शासन को भी तय होगीएसआईटी अन्य पदों पर भर्तियों की जांच अभी कर रही है। जल्द ही वह अपनी दूसरी रिपोर्ट भी जारी कर सकता है। वास्तव में वर्ष 2012 से 2017 के बीच सहकारिता विभाग में 49 तरह के पदों के लिए कुल 2391 रिक्तियां वैज्ञानिक परीक्षण हुए थे, जिसमें से 2343 पदों पर भर्तियां कर ली गई थीं। ये पद राज्य भंडारण निगम, पीसीएफ, सहकारी ग्राम विकास बैंक, यूपी कोऑपरेटिव डेवलपमेंट बैंक, यूपी कोऑपरेटिव यूनियन, जिला सहकारी बैंक, सहकारी ग्राम विकास बैंक और यूपीआरएनएन (पूर्व नाम पैक्सफेड) आदि सहकारी समितियों: रिक्त थे। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद वर्ष 2018 में इन भर्तियों की जांच शुरू हुई।

मुख्यमंत्री को मंत्री मोती सिंह के लिखित पत्र के बाद आई जांच में तेजी

प्रदेश सरकार के काउंटर मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह मोती सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कई गंभीर सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2017 तक उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा प्रभाग की ओर से 2324, सहकारी समितियों में 2301 नियुक्ति और यूपी को ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, यूपी राज्य निर्माण सहकारी संघ और जिला सहकारी बैंकों में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की कुल 502 नियुक्तियां हुईं। लेकिन उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा प्रभाग की ओर से हुई 2324 पदों में से 50 पदों की एकमात्र जांच एसआईटी ने की है। जिसके आधार पर निर्णय लिया जा रहा है। बाकी पदों की जांच अभी तक एसआईटी ने नहीं की है। पत्र के बाद एसआईटी ने दूसरे पदों की भी जांच शुरू की थी, जल्द ही रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी।



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