Wednesday, April 14, 2021
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ऐसी कश्ती  

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दुनियावी किस्से तो महज जीने के ठिकाने है !
कब क्या हो जाए यह क्या किसी ने जाने है !!

मोती मोती मिले तब सूत बने एक माला है !
दिल से दिल मिले ये एक सफर सुहाने है !!

यहां तो अजीबोगरीब किस्सों का तमाशा है !
जहाँ प्यासा पथिक मिले उसे अश्क़ पिलाने है !!

हर तराशने वाले की बस यही एक चाहत है !
गुमराह होती हर जिंदगी को और सजाने है !!

ध्रुव कहीं तेरी दुनिया तेरी गजलों में डुब न जाए !
ऐसी कश्ती तैयार कर अभी तुझे जीवन बिताने है !!
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स्वरचित ध्रुव प्रकाश सिंह

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