Thursday, August 18, 2022
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Shivpal Yadav: चाचा-भतीजे की राहें हुईं अलग, राजभर के बाद शिवपाल यादव ने अखिलेश का साथ छोड़ा – uncle nephew paths are different shivpal yadav leaves akhilesh after rajbhar


लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ चुका है। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में एक साथ आए चाचा-भतीजे के रास्ते अब अलग हो गए हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी चाचा शिवपाल यादव को पत्र लिखकर स्वतंत्रता की बात कह डाली है। वहीं, सपा विधायक एवं प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव ने भी ट्वीट कर कहा कि राजनीतिक यात्रा में सिद्धांतों एवं सम्मान से समझौता अस्वीकार्य है।

शिवपाल यादव ने किया ट्वीट
समाजवादी पार्टी की ओर से भेजे गए पत्र के बाद सपा के दोनों सहयोगी दल सुभापसा और प्रसपा के नेताओं ने एक के बाद एक अपनी प्रतिक्रिया दे दी है। प्रसपा मुखिया शिवपाल यादव ने सपा के उस पत्र पर पलटवार करते हुए ट्वीट के माध्यम से अपना जवाब दिया है। शिवापल ने अपने ट्वीट में लिखा है मैं वैसे तो सदैव से ही स्वतंत्र था, लेकिन समाजवादी पार्टी द्वारा पत्र जारी कर मुझे औपचारिक स्वतंत्रता देने के लिए सहृदय धन्यवाद। शिवपाल ने कहा कि राजनीतिक यात्रा में सिद्धांतों एवं सम्मान से समझौता अस्वीकार्य है।

राजभर ने सियासी तलाक कबूल किया
शिवपाल यादव से पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उनका (अखिलेश यादव) तलाक आ गया है। हमने उनके तलाक को कबूल कर लिया है। सपा की ओर से प्रसपा मुखिया शिवपाल यादव को जो पत्र लिखा गया है, उसमें कहा गया है कि माननीय शिवपाल सिंह यादव जी अगर आपको लगता है कि कहीं ज्यादा सम्मान मिलेगा तो वहां जाने के लिए आप स्वतंत्र हैं।

सपा से नाराज बताए जा रहे थे शिवपाल
बता दें कि शिवपाल यादव बीते विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए सपा के साथ आए थे, लेकिन चुनाव के नतीजे आने के बाद चाचा-भतीजे की कम हुई दूरी फिर बढ़ने लगी थी। नतीजों कुछ दिन बाद ही लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में विधायकों की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें न बुलाए जाने से शिवपाल यादव नाराज हो गए थे। तब से लेकर अब तक लगातार शिवपाल-अखिलेश की दूरी बढ़ती जा रही थी। वहीं, राष्ट्रपति चुनाव में यशवंत सिन्हा को सपा के समर्थन करने पर शिवपाल यादव ने पत्र लिखकर अखिलेश यादव को नसीहत दी थी। उधर, शिवपाल ने सपा गठबधंन के विरोध में जाकर द्रौपदी मुर्मू को वोट किया था। हालांकि, अभी शिवपाल यादव ने आगे की रणनीति पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन हाल ही में बीजेपी से बढ़ती नजदीकियों की चर्चा ने नए सियासी संकेत जरूर दिए हैं।
इनपुट- अभय सिंह

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