Friday, May 27, 2022
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Saffron garments and Dharmadanda controversy: ताजमहल में भगवा वस्त्र और धर्मदंड लेकर प्रवेश न देने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल


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Saffron garments and Dharmadanda controversy

Highlights

  • ताजमहल में भगवा वस्त्र, धर्मदंड के साथ नहीं मिला था प्रवेश
  • मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे आचार्य धर्मेंद्र गोस्वामी
  • ताजमहल का कृत्य अनुच्छेद 14, 15, 16 और 19 का सीधा उल्लंघन- वकील

Saffron garments and Dharmadanda controversy: ताजमहल को लेकर एक और विवाद शुरू हो गया है। ताजमहल में भगवा वस्त्र और धर्मदंड लेकर प्रवेश न देने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका जगत गुरू परमहंस आचार्य धर्मेंद्र गोस्वामी की ओर से दाखिल की गई है। 

बता दें, अयोध्या में तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य बीते 26 अप्रैल को आगरा में ताजमहल का दीदार करने पहुंचे थे जहां पर ताजमहल की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाबलों के द्वारा उनको रोक दिया गया और तर्क दिया गया कि भगवा रंग का वस्त्र और धर्म दंड लेकर के अंदर नहीं जा सकते। जिसके बाद जगत गुरु परमहंस आचार्य ने आपत्ति जताई। जगत गुरु परमहंस आचार्य बिना ताजमहल का दीदार किये अयोध्या लौट आए। आचार्य ने ताजमहल प्रशासन पर धर्म विशेष के लोगों के इशारे पर रोके जाने का आरोप लगाया था।

वहीं इस मामले को बढ़ता देख पुरातत्व विभाग के चीफ आर. के. पटेल ने जगतगुरु परमहंस आचार्य से क्षमा मांगते हुए दोबारा से ताजमहल आने का निमंत्रण दिया था। वहीं परमहंस आचार्य ने दावा किया था पुरातत्व विभाग के चीफ ने धर्म दंड के प्रवेश को लेकर उच्चाधिकारियों से वार्ता करने की बात कही।

याचिका में कहा गया है कि चार मई 2022 को हिंदू युवा वाहिनी के एक नेता को धर्मदंड और भगवा वस्त्र के साथ प्रवेश की अनुमति दी गई थी। इसकी खबरें समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई। इसके बाद परमहंस ने सक्षम अधिकारी के सामने धर्मदंड और भगवा वस्त्र के साथ प्रवेश की अनुमति के लिए प्रत्यावेदन दिया था जिसका कोई जवाब नहीं आया। 

ताजमहल का कृत्य अनुच्छेद 14, 15, 16 और 19 का उल्लंघन

याचिका में ताजमहल में धर्मदंड और भगवा वस्त्र के साथ प्रवेश न देने और उनके प्रत्यावेदन को निस्तारित न करने को चुनौती दी गई है। आचार्य के वकील का कहना है कि ताजमहल का यह कृत्य संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 19 का सीधा उल्लंघन है। धार्मिक वस्त्र और उसकी वेशभूषा के आधार पर किसी को कहीं आने-जाने से रोका नहीं जा सकता। 





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