Thursday, August 18, 2022
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rld jan ashirwad yatra in west up: rld president jayant chaudhary started jan ashirwad yatra in west up जयंत चौधरी ने नवरात्र से फूंका चुनावी बिगुल फूंका, क्या इस बार मिलेगा सियासी आशीर्वाद?


मेरठ
राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने नवरात्र से चुनावी अभियान मिशन-2022 का आगाज कर दिया है। बुधवार को उन्‍होंने किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती पर उनके दर पर शीश झुकाया। इसके बाद गुरुवार को अपने दादा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जन्मस्थली मेरठ मंडल के हापुड़ जिले से से जन आशीर्वाद यात्रा शुरू किया है। 29 अक्टूबर तक वह वेस्ट यूपी के कई जिलों को मथंगे। हर दिन दो बड़ी सभाएं करेंगे। बड़ा सवाल यह है कि क्या जूनियर चौधरी (जयंत) को इस बार सियासी आशीर्वाद मिलेगा।

जयंत चौधरी ने गुरुवार को हापुड़ के नूरपुर गांव के साथ दूसरी सभा जाट महापुरुष राजा महेंद्र प्रताप सिंह के अलीगढ़ के खैर में की। दोनों जगह जयंत को सुनने भीड़ जुटी। भीड़ देख गदगद जयंत चौधरी ने जनता से आशीर्वाद मांगा और भावनात्मक तीर चला। बोले, चौधरी चरण सिंह की विरासत को आपने संभाला। चौधरी अजित सिंह के जाने के बाद मेरे कंधे पर जिम्मेदारी बढ़ गई है, लेकिन मेरे साथ आप सबकी भी जिम्मेदारी बढ़ी है।

2013 से खराब चल रही रालोद की हालत
दरअसल, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे के बाद ध्रुवीकरण की धार में रालोद का सियासी समीकरण ध्वस्त हो गया था। हालात ऐसे हो गए थे कि 2014 के लोकसभा चुनाव में उनका एक भी कैंडिडेट नहीं जीत सका था। खुद अजित सिंह और जयंत चौधरी को हार का सामना करना पड़ा था। उसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में रालोद का छपरौली से एक विधायक सहेंद्र सिंह जीता था, लेकिन बाद में वह बीजेपी में चला गया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी पिता पुत्र (अजित-जयंत) समेत सभी कैंडिडेट हार गए थे।

किसान आंदोलन से मिली संजीवनी
पिछले एक साल से चल रहे किसान आंदोलन के बाद वेस्ट यूपी में जयंत चौधरी को सजातीय जाट वोटों के साथ मुस्लिमों का भी समर्थन मिलता दिख रहा है। इसका असर पंचायत चुनाव में दिख गया था। रालोद के हर जिले में काफी तादाद में जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और ग्राम प्रधान जीते थे। इसी के साथ चौधरी अजित सिंह के निधन के बाद लोगों की सहानुभूति का फायदा भी मिलने से इनकार नहीं किया जा सकता।

टिकैत परिवार से बढ़ी नजदीकी का मिल सकता है फायदा
किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे राकेश टिकैत और उनके भाई भाकियू के अध्यक्ष नरेश टिकैत से भी इस दौरान जयंत की नजदीकी बढ़ी है। गाजीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत के छलके आंसुओं के बाद जयंत पहले गाजीपुर बॉर्डर, फिर मुजफ्फरनगर में हुई महापंचायत में पहुंचे थे। चौधरी अजित सिंह की रस्म पगड़ी में नरेश टिकैत गए थे। बुधवार को चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती समारोह में जयंत चौधरी सिसौली गए। हालांकि टिकैत परिवार और चौधरी परिवार का रिश्ता खींचतान वाला पहले रहा, लेकिन अब संबंध सुधरे हैं और नजदीकी बढ़ी है। इस नई दोस्ती को भी सियासी जानकार रालोद के पक्ष में शुभ संकेत मान रहे हैं। वैसे 2014 में राकेश टिकैत अमरोहा सीट से रालोद के कैंडिडेट के तौर पर लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।

हर जगह हेलीकॉप्टर से आशीर्वाद मांगने जाएंगे जूनियर चौधरी
जन आशीर्वाद पथ (यात्रा) आगे 11 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना और बिजनौर के चांदपुर, 13 अक्टूबर को हाथरस के सादाबाद, बुलंदशहर के बीबीनगर, 16 को सहारनपुर के गंगोह और गाजियाबाद के मुरादनगर, 18 को शामली के थानाभवन और मेरठ के सिवालखास, 20 को अमरोहा के नौगांवा सादात और गौतमबुद्धनगर के जेवर, 25 को आगरा के फतेहपुर सीकरी और मथुरा के गोवर्धन, 27 को रामपुर के बिलासपुर और मुरादाबाद के कांठ, 28 को बागपत के बड़ौत में सभा होगी।



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