Sunday, October 2, 2022
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Ramayan Mela: 27 से 30 नवंबर तक चलेगा अयोध्‍या का रामायण मेला, इस बार भव्‍य बनाने की तैयारी


अयोध्या: धार्मिक नगरी अयोध्‍या में 4 दिवसीय रामायण मेला 27 से शुरू हो कर 30 नवंबर तक चलेगा। इसमें इस साल भव्यता लाकर आकर्षक बनाने के प्रयास भी शुरू हो गए हैं। इस बार सीएम योगी आदित्यनाथ को मेला के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा रहा है। रामायण मेला समिति के पदाधिकारियों में किए गए परिवर्तन के साथ नए सिरे से रामायण मेला के बेहतरीन आयोजन की पहल शुरू की गई है।

रामायण मेला समिति के नए महामंत्री डा वीएन अरोरा के मुताबिक, इस साल विद्वान संतों को देश के प्रमुख स्थलों से आमंत्रित किया जा रहा जो राम कथा के विविध पहलुओं पर स्तरीय प्रवचन करेंगे। संत मोरारी बापू का एक दिन का कार्यक्रम तय करने के प्रयास हो रहे हैं जिनकी राम कथा को सुनने के लिए भारी भीड़ जमा होती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के संस्कृति विभाग के निदेशक से भी रामायण मेला समिति का प्रतिनिधि मंडल मिल कर उच्च स्तरीय रामलीला मंडलियों व सांस्कृतिक दलों के कार्यक्रम के लिए अनुरोध करेगा। उन्होंने बताया कि अयोध्या में दीपोत्सव, फिल्मी कलाकारों की रामलीला, अनवरत रामलीला व अन्य कार्यक्रमों के साथ राम विवाह के अवसर पर वर्षों से आयोजित हो रहा रामायण मेला भी आकर्षक का केंद्र बने, इसके लिए हम प्रयासरत हैं।

रामायण मेला और विकास योजनाएं
रामायण मेला की शुरुआत 1982 में यूपी के तत्कालीन सीएम श्रीपति मिश्र ने की थी। उन्‍होंने उद्घाटन सत्र में ही राम की पैड़ी प्राजेक्ट की घोषणा की। डा अरोरा के मुताबिक, पहले रामायण मेला में लगातार 4 दिनों तक मंत्रियों ने अलग अलग विकास योजनाओं का ऐलान किया जो इस समय की विकास योजनाओं में प्रमुख हैं। रामायण मेला में ही परिक्रमा मार्ग को पक्का करवाने, सरयू तट का नया घाट से लेकर गुप्तारघाट तक विस्तार,व सांस्कृतिक विकास के लिए राम कथा पार्क के निर्माण की घोषणा कर उन पर काम शुरू किया गया था। लेकिन 1984में मंदिर आंदोलन शुरू हो गया। जिससे राजनीतिक परिदृश्य बदल गया। उन्होंने बताया कि रामायण मेला की परिकल्पना भी अयोध्या के धार्मिक स्वरूप को ध्यान में रखकर, सांस्कृतिक ,धार्मिक, व पर्यटन विकास पर बनी थी।उसी दिशा में उपेक्षित पड़ी राम की नगरी में बड़े स्तर की विकास योजनाओं की घोषणाएं की गईं।

राजनीतिक बदलाव का असर पड़ा रामायण मेला पर
1980 के दशक में रामायण मेला का आकर्षण चरम पर रहा। इसी मेला में श्रीलंका, कोरिया, मलेशिया सहित कई देशों की रामलीला का मंचन किया गया जो विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। रामायण मेले में दर्शकों की इतनी भीड़ जुटती थी कि लोग कई घंटे पहले से ही अपने बैठने की जगह सुरक्षित करते थे। लेकिन उसके बाद राजनीतिक परिवर्तन के साथ रामायण मेला पर गाज गिरी और सरकारी उपेक्षा के चलते इसका आकर्षक घटता गया। विदेशी व उच्च स्तरीय राम लीला मंडलियों के कार्यक्रम बंद हो गए। मुख्यमंत्री व अन्य मंत्रियों के कार्यक्रम नहीं लग पाते थे।



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