Sunday, August 14, 2022
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noida supertech emerald twin tower: Noida News: टि्वन टावर की फाइलें खुलती गई और अधिकारी फंसते गए, नक्शा कमिटी बनाने वाले CEO-SEO भी फंसे – sit investigating more than 40 files in noida supertech twin tower case


नोएडा
नोएडा सुपरटेक के टि्वन टावर खड़े करवाने के लिए तत्कालीन नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए कमिटी और पावर डेलिगेशन की दीवार खड़ी की थी, लेकिन सीएम के निर्देश पर बनी एसआईटी की जांच में वह दीवार ढ़ह गई। तत्कालीन सीईओ से लेकर क्लर्क लेवल तक हुआ फर्जीवाड़े का चिट्टा खुल गया।

एसआईटी ने अपनी जांच में नोएडा अथॉरिटी की टि्वन टावर और प्लानिंग विभाग के लिए हुए आदेशों की 40 से ज्यादा फाइलें खंगाली। इस तरह 35 अधिकारी और कर्मचारी इस पूरे फर्जीवाड़े के लपेटे में आ गए हैं। अब इन पर शासन स्तर से कार्रवाई होगी। एसआईटी की जांच पूरी होने की सूचना नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों कर्मचारियों के बीच भी पहुंच चुकी है।

इसको लेकर तत्कालीन अधिकारियों से लेकर चहेतों तक के होश उड़ गए हैं। सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट 2004 में आया था इसके बाद आखिरी बदलाव 2012 में हुआ है। नोएडा अथॉरिटी इस पूरे फर्जीवाड़े पर सेक्टर-20 थाने में एफआईआर करवा सकती है।

2007 में बनी थी नक्शा कमिटी
जांच में नक्शा कमिटी की कारगुजारी सामने आई है। यह नक्शा कमिटी 2007 में नोएडा अथॉरिटी में बनी। इसके बाद इसे पावर दी गई। यह कमिटी 2013 तक प्रभावी रही। इसके पहले और बाद में भी कमिटी है लेकिन नक्शों में होने वाले बदलाव पर कमिटी के फैसले के बाद मंजूरी एसीईओ या सीईओ लेवल से लेने की व्यवस्था रही है। तत्कालीन अधिकारियों ने अपनी यह पावर उस कमिटी को ही दे दी थी। कमिटी में प्लानिंग विभाग, वर्क सर्कल से इंजीनियर व अन्य अधिकारी कर्मचारी रहते थे।

अथॉरिटी की जांच में ये नाम आए थे सामने-
अथॉरिटी ने प्रारंभिक जांच के आधार पर शासन को 7 अधिकारी-कर्मचारियों के नाम बताए थे। इनमें तीन चीफ आर्किटेक्ट एंड टाउन प्लानर राजपाल कौशिक, वीए देव पुजारी, त्रिभुवन सिंह, प्लानिंग मैनेजर मुकेश गोयल, एक्सईएन बाबूराम, एजीएम ग्रुप हउसिंग शैलेंद्र कैरे, प्लानिंग असिस्टेंट विमला सिंह का नाम शामिल थे। अथॉरिटी की तरफ से शासन को दी गई जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने एमराल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट में जो गड़बड़िया बताई हैं उनसे जुड़े हुए काम 2004 से 2012 के बीच प्रॉजेक्ट में इन अधिकारियों कर्मचारियों की तरफ से किए गए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लेकर एसआईटी जांच तक-

-31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने टि्वन टावर को अवैध करार देते हुए 3 महीने में तोड़ने का आदेश दिया। साथ ही, नोएडा अथॉरिटी की कार्यशैली को लेकर तल्ख टिप्पणी की थी।

– 1 अगस्त को नोएडा अथॉरिटी ने तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की जांच दो एसीईओ की अगुवाई में पूरी की। इसमें 7 अधिकारी-कर्मचारियों के नाम निकाल कर शासन को बताए।

2 सितंबर को सीएम के निर्देश पर शासन ने जांच के लिए अवस्थापना व औद्योगिक विकास आयुक्त संजीव मित्तल की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय हाईलेवल एसआईटी गठित की।

-6 सितंबर को एसआईटी नोएडा अथॉरिटी पहुंची। नोएडा अथॉरिटी की तरफ से करवाई गई प्रारंभिक जांच से आगे की पड़ताल शुरू की।



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