Friday, May 27, 2022
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noida news: Supertech Noida: SIT जांच में सख्त टिप्पणी, साइन नहीं तो क्या हुआ, सीईओ और एसीईओ जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते – sit said ceo and aco not signature in supertech twin tower file but can not back from responsibility


नोएडा
सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट केस में 45 पेज की जांच रिपोर्ट में एसआईटी ने तत्कालीन सीईओ, एसीईओ से लेकर प्लानिंग विभाग के अधिकारियों को लेकर कई तल्ख टिप्पणी की हैं। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने यह भी माना है कि अगर अथॉरिटी में नक्शा पास करने में नक्शा कमिटी ने गड़बड़ी की है, तो सीईओ या एसीईओ उस जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते।

इतने बड़े फैसले हुए हैं यह कैसे माना जा सकता है कि सीईओ और एसीईओ को इसकी जानकारी नहीं होगी। यही नहीं पूरी जांच रिपोर्ट में एसआईटी ने 8 से ज्यादा जगहों पर तत्कालीन सीईओ की गलतियां दर्ज की हैं। इसके साथ ही एसीईओ व अन्य अधिकारियों को भी गड़बड़ियों पर लपेटा है।

पत्रावलियों पर उठाए सवाल
नोएडा अथॉरिटी की प्रारंभिक जांच जिसमें 7 नाम सामने आए थे उससे आगे जांच एसआईटी ने बढ़ाई है। ज्यादा निचले स्तर पर किसी को भी आरोपित नहीं बनाया गया है। पर्चेजबल एफएआर जो सुपरटेक को टि्वन टावर में दो बार दिया गया उस पर दोनों सीईओ के साइन मिले हैं। यहीं से दोनों तत्कालीन सीईओ मोहिंदर सिंह व एसके द्विवेदी का नाम जांच रिपोर्ट में जिम्मेदारों में दर्ज हुआ। इसके आगे नक्शा कमिटी के गठन और उसको पावर ट्रांसफर करने की पत्रावलियों पर सवाल उठे।

‘अधिकारियों को पता था हो रही गड़बड़ी’

यहां पर भी तत्कालीन सीईओ और एसीईओ व ओएसडी सहित अन्य नाम सामने आए। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में सुपरटेक की तरफ से नक्शा अथॉरिटी में जमा करने वाले दोनों आर्किटेक्ट को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इन पर एफआईआर करवाने के साथ ही आगे की कार्रवाई के लिए लिखा है।

सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में कई पेज पर जो निष्कर्ष निकले हैं उनका भाव यह है कि अथॉरिटी अधिकारियों को यह पता था कि गड़बड़ी हो रही है। फिर भी प्रॉजेक्ट में बदलाव जारी रखा गया।

एसआईटी ने ही लिया एफआईआर विजिलेंस में कराने का फैसला

जांच शुरू होने के बाद एफआईआर होना तय माना जा रहा था। नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों तक का अनुमान था कि एफआईआर नोएडा में ही दर्ज होगी, लेकिन एसआईटी ने विजिलेंस में एफआईआर कराने का फैसला लिया। वह भी लखनऊ यूनिट में। इसके पीछे अहम कारण यह है कि एसआईटी ने जांच के दौरान यह जरूरत मानी है कि पूरे भ्रष्टाचार की गहराई तक जांच हो और आर्थिक अपराध की भी पड़ताल हो।

वहीं लखनऊ में केस दर्ज कराने का मकसद यह था कि अधिकतर अधिकारी रिटायर हो चुके हैं। शासन और सीएम के संज्ञान में प्रकरण होने के कारण गृह विभाग भी सीधे निगरानी करेगा। इसके लिए लखनऊ सेंट्रल प्वाइंट रहेगा। एसआईटी की जांच रिपोर्ट नोएडा अथॉरिटी को नहीं आई है। शासन से अथॉरिटी को फर्जीवाड़े में फंसे अधिकारियों कर्मचारियों के सस्पेंशन ऑर्डर व 5 पत्र और भेजे हैं। इन पत्रों में आर्किटेक्ट पर कार्रवाई, परिवाद दायर करना, एफआईआर विजिलेंस में कराने सहित अन्य निर्देश शामिल हैं।



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