Thursday, January 20, 2022
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mayawati from haroda seat: UP Chunav: सहारनपुर की हरोड़ा विधानसभा सीट कभी थी बसपा का गढ़, यहां से दो बार जीतकर मायावती को मिल चुकी है सूबे की सत्ता – haroda assembly seat of saharanpur was once a stronghold of bsp mayawati had won the election twice


सैयद मशकूर,सहारनपुर
यूपी के सहारनपुर की हरोड़ा (वर्तमान में सहारनपुर देहात) सीट कभी बसपा का गढ़ हुआ करती थी। पूर्व सीएम और बसपा सुप्रीमो मायावती यहां से दो बार चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनी थीं। फिलहाल इस सीट पर कांग्रेस के मसूद अख्तर विधायक हैं। कभी मायावती के सारथी माने जाने वाले तीन बार के पूर्व विधायक जगपाल सिंह ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले पाला बदलते हुए बसपा को बाय-बाय बोल कर बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। हालांकि कई बीजेपी नेता पहले से ही टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। इसलिए आगामी विधानसभा चुनाव में यह सीट काफी हॉट मानी जा रही है।

दलित और मुस्लिम मतदाता यहां पर हार-जीत तय करते हैं

पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने दो बार चुनाव लड़कर हरोड़ा विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। इसीलिए इस विधानसभा सीट को बसपा का गढ़ भी कहा जाता था। हरोडा सीट से वर्ष 1997 का चुनाव जीतकर सुश्री मायावती गठबंधन की सरकार में मुख्यमंत्री बनी थीं। सरकार गिर जाने के कारण मायावती ने इस सीट से इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव में मायावती के प्रतिनिधि के रूप में जगपाल सिंह पहली बार बसपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए थे।

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साल 2002 के इलेक्शन में भी बसपा सुप्रीमों मायावती हरोडा सीट से चुनाव जीत कर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं। बाद में मायावती द्वारा इस्तीफा दिये जाने के कारण इस सीट पर वर्ष 2003 के उपचुनाव में जगपाल सिंह चुनाव हार गए थे। इसके बाद 2007 जगपाल सिंह ने हरोडा सीट पर बसपा का परचम लहराया था। 2012 परिसीमन के बाद हरोड़ा सीट का नाम सहारनपुर देहात होने के साथ ही यह सामान्य हो गई थी। 2012 के चुनाव में सपा की लहर के बावजूद बसपा के जगपाल सिंह ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की थी।

2017 विधानसभा चुनाव में बसपा का हो गया था सूपड़ा साफ
2017 का विधानसभा चुनाव बहुजन समाज पार्टी के लिए सहारनपुर में बहुत निराशाजनक रहा था। कभी यहां बसपा के तीन से चार विधायक होते थे। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा को एक भी सीट नहीं मिली थी। सहारनपुर देहात सीट पर 2017 में जगपाल सिंह कांग्रेस के मसूद अख्तर से चुनाव हार गए थे। यही स्थिति सहारनपुर की बेहट, गंगोह, नकुड, देवबंद और शहर सीट पर रही थी।

सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 2017 में बेहट, सहारनपुर देहात व सहारनपुर शहर सीट पर जीत का परचम लहराया था। जबकि बीजेपी को गंगोह,नकुड़,रामपुर मनिहारान और देवबंद विधानसभा सीट पर जीत हासिल हुई थी। 2017 विधानसभा चुनाव के बाद से ही बसपा में उथल-पुथल मची हुई है। हाल ही में तीन बार के पूर्व विधायक जयपाल सिंह बसपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। इसे भी बसपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

मुद्दे नहीं सहारनपुर में लहर से तय होता है चुनाव का परिणाम

2017 में देहात सीट पर कांग्रेस- सपा गठबंधन और बसपा उम्मीदवार के बीच मुकाबला हुआ था। गठबंधन के प्रत्याशी मसूद अख्तर ने बसपा के जगपाल को 12 हजार वोट से अधिक के अंतर से हरा कर कांग्रेस का परचम लहराया था। मसूद अख्तर को 87689 और बसपा के जगपाल को 75365 वोट मिले थे। बीजेपी के मनोज चौधरी 58752 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे। देहात सीट पर मुस्लिम और दलित के अलावा गुर्जर, ठाकुर, सैनी, त्यागी, यादव, कश्यप, ब्राह्मण, बनिया और बढ़ई मतदाता चुनाव का नतीजा तय करते हैं। सहारनपुर में चुनाव मुद्दों पर कम और लहर के आधार पर ज्यादा परिणाम तय करता है।



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