Saturday, October 24, 2020
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LAC में शांति से विघ्न, भारत-चीन संबंधों को प्रभावित करना: S जयशंकर – LAC पर शांति चरम पतन, भारत-चीन संबंधों पर पड़ रहा असर: एस जयशंकर


LAC पर शांति चरम बाधित, भारत-चीन संबंधों पर पड़ रहा असर: एस जयशंकर

विदेश मंत्री एस। जयशंकर (एस जयशंकर) – फाइल फोटो

नई दिल्ली:

विदेश मंत्री एस। जयशंकर (विदेश मंत्री एस जयशंकर) ने शनिवार को कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और अमन-चैन गंभीर रूप से बाधित हुए हैं और जाहिर तौर पर इससे भारत और चीन के बीच संपूर्ण संबंध प्रभावित हो रहे हैं। जयशंकर ने पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच पांच महीने से अधिक समय से सीमा गतिरोध की पृष्ठभूमि में ये बयान दिया जहां प्रत्येक पक्ष ने 50,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया है।

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा -भारत, चीन के बीच सीमा पर झड़पों से रिश्तों में गंभीर रूप से उथल-पुथल की स्थिति।

जयशंकर ने अपनी पुस्तक इंडिया द इंडिया वे ’पर आयोजित एक वेबिनार में पिछले तीन दशकों में दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच संबंधों के विकास के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में कहा कि चीन-भारत सीमा का सवाल बहुत जटिल और कठिन विषय है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन के संबंध में बहुत मुश्किल 'दौर में हैं, जो 1980 के दशक के अंत से व्यापार, यात्रा, पर्यटन और सीमा पर शांति के आधार पर सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से सामान्य रहे हैं।

जयशंकर ने कहा, ‘‘ हमारा यह रुख नहीं है कि हमें सीमा के सवाल का हल निकालना चाहिए। हम समझते हैं कि यह बहुत जटिल और कठिन विषय है। विभिन्न स्तरों पर कई इंटरैक्शन हुए हैं। किसी संबंध के लिए यह बहुत अधिक लकीर है। ''

सीमा गतिरोध मामले में चीन को लेकर बोले विदेश मंत्री, 'बातचीत का भरोसा, अंजाजा लगाना नहीं चाहता'

उन्होंने कहा, '' मैं और अधिक मौलिक रेखा की बात कर रहा हूं और वह है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में एलएसी पर अमन-चैन रहना चाहिए और 1980 के दशक के अंत से यह स्थिति रही भी है। '' जयशंकर ने पूर्वी लद्दाख। के हालात का जिक्र करते हुए कहा, '' अब अगर शांति और अमन-चैन अनिश्चित तौर पर बाधित होते हैं तो संबंध पर जाहिर तौर पर असर पड़ेगा और यही हम देख रहे हैं। ''

विदेश मंत्री ने कहा कि चीन और भारत का उदय हो रहा है और ये दुनिया में अधिक और अधिक बड़ी 'भूमिका स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन, बड़ सवाल' यह है कि दोनों देश एक ्याव साम्यावस्था 'कैसे हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा, मैंने ‘यह मौलिक बात है जिस पर मैंने किताब में ध्यान केंद्रित किया है। '' जयशंकर ने बताया कि उन्होंने किताब की पांडुलिपि पूर्वी लद्दाख में शुरू हुई सीमा विवाद से पहले अप्रैल में ही पूरी तरह ली थी।

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने साझा नहीं किया है। यह सिंडीकेट ट्वीट से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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