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लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ

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लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ

ध्रुव कुमार सिंह, मुज़फ्फरपुर, बिहार, 

प्रकृति एवं परमात्मा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ व्रतियों द्वारा उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पण के साथ हुआ सम्पन्न

चार दिनों तक चलने वाले छठ पूजा का महापर्व मुजफ्फरपुर में धूमधाम के साथ मनाया गया। छठ पर्व के आखिरी दिन सोमवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ये महापर्व संपन्न हो गया। जिले के दर्जनों  घाटों पर श्रद्धालुओं ने सोमवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। इसके पूर्व रविवार को व्रतियों ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया। बड़ी संख्या में छठव्रती जिले के सार्वजनिक और निजी घाटों पर प्रसाद भरा सूप लेकर डूबते हुए सूर्य को नमन किया। छठ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद है। पुलिस बल की तैनाती की गई है। वहीं जिला प्रशासन की तरफ से बूढ़ी गंडक नदी घाट सहित सभी सार्वजनिक घाटों में बैरिकेडिंग किया गया, जिससे कि कोई भी छठ व्रती समेत अन्य लोग गहरे पानी में ना जाए। इस दौरान सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। छठ महापर्व को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम को लेकर  जिलाधिकारी  प्रणव कुमार और वरीय पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार ने संयुक्त आदेश जारी करते हुए करीब तीन सौ मजिस्ट्रेट और 900 पुलिसकर्मी और 300 पदाधिकारियों की तैनाती छठ घाटों से लेकर शहर में विभिन्न स्थानों पर की थी, ताकि छठ व्रतियों व श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। मुजफ्फरपुर में चार दिवसीय अनुष्ठान का महापर्व छठ की छटा बिखरी दिखी। गांव से लेकर कस्बों, शहरों, गलियों, सड़कों तक में छठ के मधुर गीत गूंज रहे थें। मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय जेल में भी 62 पुरुष और 64 महिलाओं समेत कुल 126 बंदियों नें भी छठ किया, जिसमें दो मुस्लिम धर्म के भी बंदी शामिल हैं। छठ पूजा के लिए सभी व्रतियों को जेल प्रशासन के तरफ से पूजा सामग्री के साथ-साथ पूजा करने के लिए नए-नए कपड़े भी दिए गए थे। जेल के अंदर ही छठ घाट बनाया गया था. जेल अधीक्षक बृजेश मेहता ने बताया कि लोक आस्था का महापर्व छठ को लेकर हर साल जेल प्रशासन बंदियों को पूजा पाठ करने की सभी सामग्री उपलब्ध कराती है और पूरे विधि विधान के साथ छठ व्रती बंदी अपना पूजा पाठ करते हैं। गौरतलब है की चार दिवसीय आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ शुरू हो जाता है.

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