Friday, January 21, 2022
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bjp candidate list: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ और बीजेपी की जीत का क्या है फार्मूला: Uttar pradesh me Yogi Adityanath aur bjp ki jeet ka kya hai formula


लखनऊ
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी जीतती है और यूपी में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनते हैं तो यह इतिहास होगा। यूपी विधानसभा के इतिहास में आजतक कोई भी लगातार दो बार मुख्यमंत्री नहीं बना है। यह जीत योगी का कद और बढ़ा देगी। योगी अपनी जीत के लिए यूपी का चुनाव 80 पर्सेंट बनाम 20 पर्सेंट बनाना चाहते हैं मतलब यूपी के 80 पर्सेंट हिंदू बनाम 20 प्रतिशत मुसलमान। लेकिन यह इतना आसान नहीं है। भारत में किसी भी पार्टी को चुनाव में 80 पर्सेंट वोट शेयर नहीं मिला है।

2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के आंकड़े देंखें तो बीजेपी को भारी जीत मिली। भाजपा को यूपी में तीन-चौथाई बहुमत मिला। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी, दोनों पार्टियों का वोट शेयर 44 पर्सेंट था जो बीजेपी के 40 से ज्यादा था। हालांकि मई 2019 में परिणाम लोकसभा परिणाम आए तो बीजेपी गठबंधन ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 62 सीटें जीतीं। तब बीजेपी का वोट शेयर 50 फीसदी रहा।

2019 के आंकड़े
2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा का संयुक्त वोट शेयर घटकर 37.5 पर्सेंट हो गया। बीजेपी ने यह जीत कैसे हासिल की? इसने सपा और बसपा के मूल सामाजिक आधार- यादवों, जाटवों और मुसलमानों के अलावा अन्य सभी के समर्थन को समेकित किया, जिनकी राज्य की आबादी में लगभग 40 पर्सेंट की है।

बीजेपी का दावा
भाजपा की चुनावी रणनीति उच्च जातियों, गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलितों पर ध्यान केंद्रित करने की थी, जिनकी आबादी 55-60 फीसदी है। ओबीसी जिला प्रमुख बनाए गए। बीजेपी ने दावा किया कि सवर्ण जातियां 17% यादव, 73% गैर-यादव ओबीसी, 25% जाटव और 50% गैर-जाटव हमें वोट दे रहे हैं।

14 में 10 विधायक ओबीसी
यूपी में आदित्यनाथ कैबिनेट के तीन मंत्रियों सहित बीजेपी के 14 विधायकों ने हाल ही में बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है। इनमें से अधिकांश ने भाजपा पर ओबीसी और अनुसूचित जाति (एससी) विरोधी होने का आरोप लगाया। 14 विधायकों में से 10 विधायक ओबीसी हैं। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा छोड़ने वाले सभी ओबीसी गैर-यादव ओबीसी के रैंक से हैं, जो पार्टी का एक महत्वपूर्ण समर्थन आधार है।

अखिलेश ने जातिगत जनगणना का किया है वादा
इससे साफ है कि सपा, भाजपा के गैर-यादव ओबीसी वोटों पर सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। पिछले साल नवंबर में अखिलेश यादव ने वादा किया कि अगर सपा सत्ता में आती है, तो तीन महीने के अंदर जातिगत जनगणना करवाई जाएगी और हर एक उप-जाति की आबादी के अनुपात में उन्हें लाभ दिया जाएगा।

योगी पर हिंदू की जगह ठाकुर का ठप्पा
बीजेपी ने यूपी में 2017 का विधानसभा चुनाव योगी आदित्यनाथ के सीएम फेस के साथ नहीं लड़ा था। चुनाव के बाद CSDS लोकनीति ने एक सर्वेक्षण किया। जिसमें लोगों की पसंद योगी नहीं थे। सर्वेक्षण में केवल 7.4 पर्सेंट लोगों ने योगी को पसंद माना लेकिन बीजेपी नेता योगी को सीएम बनाना चाहते थे इसलिए वह यूपी के मुख्यमंत्री बनाए गए। बीजेपी योगी आदित्यनाथ को एक हिंदू नेता के रूप में चित्रित करना पसंद करती है, लेकिन उनके ऊपर ठाकुर जाति का ठप्प लग गया। बीजेपी में हो रही दलबदल और गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक का कटना बीजेपी के लिए चिंता का विषय है।



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