Sunday, October 2, 2022
HomeUttar Pradesh50 डॉक्टरों की टीम ने 48 घंटे की सर्जरी कर बचाई महिला...

50 डॉक्टरों की टीम ने 48 घंटे की सर्जरी कर बचाई महिला की जान


लखनऊ: धरती पर डॉक्टर्स को यूं ही नहीं भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है, इसकी बानगी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देखने को मिली है। यहां के अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल में डॉक्टर्स ने एक गंभीर सर्जरी करके मरीज को न सिर्फ मौत के मुंह से खींचे लाए बल्कि उसे आंखों की रोशनी के साथ नई जिंदगी दी। अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल के 50 डॉक्टर्स की टीम ने 48 घंटों तक लगातार सर्जरी करके ये कारनामा कर दिखाया है।

दरअसल एमआरआई के जरिए 40 साल की स्केच आर्टिस्ट महिला के दिमाग में एन्यूरिज्म की पुष्टि हुई, जिससे उनकी आंखों की रोशनी तक चली गई थी। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते ये सर्जरी नहीं होती तो एन्यूरिज्म कभी भी मस्तिष्क में फटकर महिला के जीवन के लिए खतरा बन सकता था।

क्या है ब्रेन एन्यूरिज्म?
ब्रेन एन्यूरिज्म मस्तिष्क में रक्त वाहिका में एक उभार या गुब्बारा है। जो कि एक काफी जटिल बीमारी मानी जाती है। इसमें आखों से दिखना बंद हो जाता है और जान जाने का खतरा भी बना रहता है। ज्यादातर मामलों में आकार आमतौर पर छोटा होता है, उसका आकार गोल्फ की गेंद के आकार का था और कभी भी फट सकता था।

48 घंटे तक चली दिमाग की सर्जरी
न्यूरो सर्जन और कार्डियक सर्जन एक साथ चार चरणों वाली मैराथन सर्जरी करने में 48 घंटे से ज्यादा का समय लग गया। डॉ सुनील कुमार सिंह ने बताया कि एन्यूरिज्म को फटने से रोकने के लिए दोनों तरफ से क्लिप करने की जरूरत थी। लेकिन विशाल आकार ने इसे बहुत जोखिम भरा बना दिया। इसके लिए मरीज के शरीर के ब्लड सरकुलेशन अंदर को रोकना आवश्यक था। इसके लिए कार्डिएक सर्जन डॉ भरत दुबे को शामिल किया गया।

बॉडी से निकाला गया पूरा खून
डॉ. भरत दुबे ने बताया कि ब्लड सरकुलेशन रोकने के लिए मरीज के शरीर को डीप हाइपोथर्मिक सर्कुलेटरी अरेस्ट की स्थिति में लाया गया। फिर पेशेंट की बॉडी से पूरा खून बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान मरीज के हृदय और फेफड़ों को हार्ट एंड लंग मशीन के जरिये ब्लड की सप्लाई जारी रखी गई।

सर्जरी के बाद ठीक है महिला
डॉक्टर दुबे ने बताया कि एन्यूरिज्म की इस स्थिति में बॉडी डेड हो जाती है लेकिन ऐसा करना जरूरी था। सर्जरी के बाद महिला ठीक है। महिला की 48 घंटे की लंबी और जटिल सर्जरी को सफलता पूर्वक अंजाम दिया है।

‘चमत्कार नहीं..बढिया टीम वर्क’
अस्पताल के सीईओ और एमडी डॉ मयंक सोमानी ने कहा कि ये रिकॉर्ड और उपलब्धि कोई चमत्कार नहीं है ये सिर्फ बढ़िया टीम वर्क है। हमने एक महिला की जान बचाई, जो एक स्केच आर्टिस्ट है। वह न केवल अपनी जानलेवा स्थिति से उबर गई, बल्कि उसकी आंखों की रोशनी भी वापस आ गई।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments