Monday, May 17, 2021
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15 साल से इसलिए घर में बंद था राजबहादुर जाटव, बेटे ने प्रज्ञा का चुनाव जीतकर घुमाया गांव-गांव


प्रधानी का चुनाव हारने के बाद पिता ने खुद को 15 साल तक घर में बंद रखा।

प्रधानी का चुनाव हारने के बाद पिता ने खुद को 15 साल तक घर में बंद रखा।

प्रधानी का नतीजा (परिणाम) आने के बाद ऐसा ही एक अजीब ओ गरीब किस्सा आगरा (आगरा) में सामने आया है। जहां 15 साल के घर में बंद पिता को बेटे ने प्रज्ञा का चुनाव जीतने के बाद गांव-गांव में घुमाया।

आगरा। पंचायत चुनावों (पंचायत चुनव) के रूपांतर घोषित होने के साथ ही कई तरह के किस्से भी सामने आ रहे हैं। कहीं बहु सास को हरा रही है तो कहीं जेठानी की हार देवरानी से हो रही है। कई जगह तो पति-पत्नी ही चुनाव (चुनाव) मैदान में आमने-सामने थे। प्रधानी का नतीजा (परिणाम) आने के बाद ऐसा ही एक अजीब ओ गरीब किस्सा आगरा (आगरा) में सामने आया है। जहां 15 साल के घर में बंद पिता को बेटे ने प्रज्ञा का चुनाव जीतने के बाद गांव-गांव में घुमाया। इसलिए घर में बंद था राजबहादुर जाटव आगरा के खंदौली ब्लॉक में ग्राम पंचायत रामनगर है। राजबहादुर जाटव इसी गांव में अपने परिवार के साथ रहता है। गांव में राजबहादुर की अच्छी साख है। वर्ष 2005 में इसी गाँव से राजबहादुर ने प्रज्ञा का चुनाव लड़ा था। यह पहला मौका था जब राजबहादुर के परिवार में से कोई राजनीति नहीं थी। इत्तेफाक से चुनाव में राजबहादुर हार गए। चुनाव हारने के बाद राजबहादुर को लोगों के ताने और छींटाकशी का इतना डर ​​लगा कि उसने खुद को घर में कैद कर लिया। कहीं भी आना-जाना बंद कर दिया। राजबहादुर के इकलौते पुत्र भूपेंद्र सागर उर्फ ​​सोनू जाटव के मुताबिक परिवार, रिश्तेदार और गांव वालों ने बहुत निर्दिष्ट किया है कि राजनीति और चुनावों में तो ऐसा होता ही रहता है। लेकिन पिता नहीं माने और घर से निकलना बंद कर दिया।नोएडा कोरोना समाचार: एंबुलेस वाले ने कोरोना पीड़िआत से 25 KM का 42 हजार लिया किराया, पुलिस ने ऐसे किए गए भुगतान बेटे ने पिता को तोहफा देने के लिए 2010 में बाड़ चुनाव लड़ा चुनावी हार के जोखिम पिता को उबरने के लिए भूपेंद्र सागर उर्फ ​​सोनू जाटव ने 2010 में प्रताप का चुनाव फतह किया। सोचा कि जीतने के बाद पिता को तोहफा देगा और उन्हें घर से बाहर ले जाएगा। लेकिन सोनू की यह सोच कामयाब नहीं हुई और सोनू चुनाव हार गए। बावजूद इसके सोनू ने हिम्मत नहीं हारी। अंदर ही अंदर वो आने वाले चुनावों के लिए फिर से तैयारी करने लगे।

2021 में सोनू ने रिकॉर्ड वोटों से जीता चुनाव इस साल के चुनावों के लिए एक बार फिर से सोनू ने तैयारी शुरू कर दी। मकसद था पिता को सम्मान के साथ घर से बाहर लाकर गांव वालों के सामने लाना। 2021 में अनुसूचित सीट से फिर सोनू ने पर्चा भर दिया। चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी, जिसका नतीजा यह निकला कि सोनू 12 65 वोट से जीत गया। सोनू को जीत का प्रमाण पत्र मिल गया। घर पहुंचकर सोनू ने प्रमाण पिता के कदमों में रख दिया। उसके बाद पिता को घर से बाहर लेकर आए। पूरे गांव में पिता को दूसरे लोगों से मिलवाया गया। पिता को फूलों की माला पहनाई गई। दोनों पिता-पुत्र ने अपने वेटरों का धन्यवाद किया।








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