Monday, May 17, 2021
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हरियाणा के 75% आरक्षण वाले कदम ‘विनाशकारी’ साबित होंगे: फिक्की


हरियाणा के 75% आरक्षण वाले कदम 'विनाशकारी' साबित होंगे: फिक्की

हरियाणा के उपमुख्यमंत्री मोदी हयंत चौटाला ने बताया था, राज्यपाल ने इस बिल को मंजूरी दे दी है

नई दिल्ली:

हरियाणा सरकार ने निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत प्रशिक्षण स्थापित करने वाले युवाओं के लिए आरक्षित करने के बिल को मंजूरी दी है, फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स एंड इंडिस्ट्री (फिक्की) ने इसे लेकर ऐतराज जताया है। फिक्की ने कहा है कि निर्णय का प्रतिकूल असर होगा और इसके फल उद्योग उद्योग से बाहर जाने के लिए मजबूर होंगे। हरियाणा राज्य स्थानीय उम्मीदवार रोजगार विधेयक, 2020 निजी क्षेत्र की उन बीमारियों में स्थानीय लोगों के लिए कोटा का प्रावधान करता है, जिसमें मासिक वेतन 50,000 रुपये से कम हो। बिल के मुताबिक यह कोटा शुरू होने के 10 साल बाद तक लागू रहेगा। बिल के दायरे में राज्य में निजी कंपनियों, सोसाइटी, ट्रस्ट, साझेदारी फर्म आते हैं। विधेयक योग्य लोगों के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में योग्य स्थानीय किसानों के प्रशिक्षण का प्रावधान करता है।इस कोटे के तहत नौकरी प्राप्त करने के लिए किसी व्यक्ति का जन्म स्थान हरियाणा होना चाहिए या वह कम से कम 15 साल की अवस्था में होना चाहिए।

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हरियाणा के उप मुख्‍यमंत्री दुष्‍यंत चौटाला ने मंगलवार को कहा कि हरियाणा के गवर्नर सत्यदेव नारायण आर्य ने इस बिल को मंजूरी दे दी है, जिसमें निजी क्षेत्र की 75 प्रतिशत आबादी स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है। जनता पार्टी के प्रमुख चुनावी वादे में शामिल थे। जननायक जनता पार्टी ने 90 सदसयीय विधानसभा में 10 सीटों पर जीत हासिल की है और बीजेपी के साथ गठजोड़ करके भाजपा ने बनाई है। फिक्की की ओर से पक्ष रखते हुए संगठन के अधयकक्ष उदय शंकर ने कहा है कि प्राथमिक सेक्टर में 75% लोग स्थापितणीय लोगों के लिए रिजर्व रखने का कदम राज्य में औद्योगिक विकास और निजी निवेश के लिहाज से विनाशकारी साबित होगा।

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गौरतलब है कि भारतीय उद्योग जगत (()) ने भी हरियाणा सरकार से निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण के कानून पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। CII का कहना है कि आरक्षण से उत्पादकता और प्रतिस्पर्धी क्षमता प्रभावित होती है। औद्योगिक संगठन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि राज्य सरकार इस पर पुनर्विचार करेगी। CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ” ऐसे समय जबकि राज्यस्तर पर निवेश आकर्षित करना महत्वपूर्ण है, हरियाणा सरकार को उद्योग पर अंकुश लगाने से बचना चाहिए था। ” उन्होंने कहा कि आरक्षण से उत्पादकता और उद्योग की प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। बनर्जी ने कहा, ” हम उम्मीद करते हैं कि हरियाणा सरकार इसपर पुनर्विचार करेगी।प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का है।ऐसे में देश के भीतर एक एकीकृत और सचल श्रम बाजार की उम्मीद करते हैं। ” (भाषा) इनपुट)





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