Friday, September 18, 2020
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सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित – सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित


केंद्र सरकार ने कहा कि इस मामले की निष्पक्षता और पारदर्शी जांच की जरूरत है। मामले की जांच ईडी कर रही है जो कि एक केंद्रीय जांच एजेंसी है, ऐसे में दूसरी जांच एजेंसी राज्य सरकार की नहीं बल्कि केंद्र सरकार की ही होनी चाहिए जो कि सीबीआई है।

केंद्र सरकार के वकील तुषार मेहता ने कहा कि CrPC 174 के तहत दुर्घटना में हुई मौत की पत्रों की जांच बहुत कम समय तक चलती है। शव को देखकर और दर्ज पर जाकर देखा जाता है कि मौत की वजह संदिग्ध है या नहीं। फिर एफ़आईआर दर्ज होती है। लेकिन इस मामले में मुंबई पुलिस जो कर रही है, वह सही नहीं है। महाराष्ट्र पुलिस ने अब तक 56 लोगों से पूछताछ की है। अब तक की गई महाराष्ट्र पुलिस की जांच के कोई मायने नहीं हैं। यह कानून सम्मत नहीं है, क्योंकि पुलिस ने अभी तक इसमें एफ़आईआर दर्ज नहीं की है।

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प्रधान के वकील श्याम दीवान ने कहा कि सीबीआई जांच बिना राज्य की मंज़ूरी के शुरू नहीं हो सकती है और इस मामले में जांच करने वाला पहला राज्य महाराष्ट्र है इसलिए महाराष्ट्र सरकार की मंज़ूरी के बिना सीबीआई जांच नहीं हो सकती है। दीवान ने कहा कि पहले बिहार पुलिस की एफ़आईआरआर मुंबई पुलिस के पास ट्रांसफ़र हो, इसके बाद यदि महाराष्ट्र सरकार सीबीआई जांच की मंज़ूरी दे तो सीबीआई जांच हो। वकील ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है जिसमें कहा गया है कि मुम्बई पुलिस सही तरीकेक़े से जांच कर रही है। मुंबई पुलिस 56 लोगों से पूछताछ कर चुकी है, इसलिए जांच मुंबई पुलिस के पास ही रहनी चाहिए।

प्रधान के वकील ने कहा कि पटना में दर्ज एफआईआर की घटना से कोई संबंध नहीं है। 38 दिन बाद पटना में एफआईआर दर्ज हुई। बिहार सरकार मामले में ज्यादा दखल दे रही है। प्रधान के वकील ने कहा कि 25 जुलाई को दर्ज एफआईआर का पटना में किसी अपराध से संबंध नहीं है। वकील श्याम दीवान ने प्राथमिकी दर्ज की। उन्होंने कहा कि बिहार का क्षेत्राधिकार नहीं। 38 दिन के बाद एफआईआर दर्ज करने का औचित्य नहीं है। एफआईआर दर्ज होने के पीछे राजनैतिक कारण है। बिहार पुलिस ने ऐसे एक मामले के लिए एफआईआर दर्ज की, जिसका पटना से कोई कनेक्शन नहीं है।

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प्रधान के वकील ने कहा कि अगर मामले को पटना से मुंबई पुलिस के पास ट्रांसफ़र नहीं होगा, तो प्रिंस को इंसाफ नहीं मिल फाउंडगा। वकील ने कहा कि बिहार पुलिस का यह मामला से कोई लेनादेना नहीं है लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री इस मामले में राजनैतिक लाभ लेने के लिए खुद ही सक्रिय हुए हैं। वकील ने कहा कि प्रधान, सुशांत से प्यार करता था, उसे ट्रोल किया जा रहा है, उसको प्रताड़ित किया जा रहा है।

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राजनैतिक दबाव में बिहार सरकार नहीं, बल्कि महाराष्ट्र सरकार है जिसने अभी तक सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में एफ़आईआर दर्ज नहीं की है। बिहार सरकार के वकील ने महाराष्ट्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए हलफनामे पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया है कि 56 लोगों से पूछताछ हुई है। कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की है और इस संबंधित में हलफनामे में कुछ भी नहीं कहा गया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रधान के वकील से पूछा कि यह क्या सही है कि आप भी सीबीआई जांच चाहते हैं? प्रधान के वकील ने कहा कि FIR को पटना से मुंबई ट्रांसफर किया जाए, महाराष्ट्र सरकार जो चाहे करेगी। वह चाहे तो सीबीआई को दे सकता है।

बिहार सरकार के वकील ने कहा कि बिहार पुलिस के एक आईपीएस को मुंबई में क्वारंटाइन करने के नाम पर डिटेन करके रखा गया है। इन सभी बातों को सुप्रीम कोर्ट को ध्यान में रखना होगा कि महाराष्ट्र सरकार का इस मामले को लेकर रवैया क्या है। बिहार सरकार के वकील ने कहा कि अगर सुशांत के बैंक खाते से 15 करोड़ रुपये गायब हुए हैं तो सुशांत के पिता को पटना में रिपोर्ट दर्ज करवाने का हक था। मुंबई पुलिस ने सिर्फ मीडिया को दिखाने के लिए जांच का दिखावा किया। हकीकत में कोई जांच नहीं। सही मायनों में 25 जून के बाद लॉन मुंबई में कोई जांच लंबित नहीं है।

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सुशांत के पिता के वकील विकास सिंह ने कहा कि सुशांत को परिवार से दूर किया जा रहा था। पिता ने बार-बार पूछा कि मेरे बेटे का क्या इलाज है? मुझे वहाँ आने वाले दो, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मामले में कई पहलू जांच के लायक हैं। ऐसा लग रहा है कि सुशांत के गले पर निशान बेल्ट के थे। सुशांत की बॉडी को किसी ने पंखे से लटका हुआ नहीं देखा। सुशांत के पैसे को लेकर काल्पनिक और आपराधिक विश्वासघात पटना में हुआ था इसलिए एफ़आईआर पटना में दर्ज कराई गई है।

ट्रायल के अंत में शासक के वकील ने कहा कि हमारी मांग के अनुसार केस मुंबई ट्रांसफर हो, आगे जो किए जाने की जरूरत हो वह इसके बाद हो। इस मामले में जैसे दूसरे राज्य में एफआईआर दर्ज हुई है और फिर उसे सीबीआई को ट्रांसफर किया गया, इसकी अनुमति नहीं दी गई।

सुप्रीम कोर्ट में वकील मनिंदर सिंह बिहार पुलिस के लिए पेश हुए। वकील अभिषेक मनु सिंघवी महाराष्ट्र सरकार के लिए, वकील श्याम दीवान प्रधान के लिए और वकील विकास सिंह सुशांत के पिता के साथ पेश हुए थे।



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