Sunday, September 20, 2020
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सुप्रीम कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा SSR मृत्यु: प्रधान चक्रवर्ती की याचिका पर SC ने फैसला सुरक्षित रखा, क्या सुशांत केस पटना से मुंबई ट्रांसफर होगा?



डिज़टल डेस्क, मुंबई। एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में प्रधान चक्रवर्ती की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई पूरी कर लीं। सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी दलीलों पर संक्षिप्त नोट जमा करवाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस पर अपना फैसला सुना दिया। जस्टिस ह्रिकेश रॉय की सिएटल ने इस मामले में सुनवाई की। बता दें कि रिया चक्रवर्ती ने अपनी याचिका में केस को पटना से मुंबई ट्रांसफर कराने की अपील की थी।

क्या कहा सुशांत सिंह की फामिली के वकील ने?
बिहार सरकार की तरफ से सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह, महाराष्ट्र सरकार की तरफ से एएम सिंघवी, श्याम दिवान रिया की तरफ से और विकास सिंह ने सुशांत सिंह की फैमिली का पक्ष रखा। विकास सिंह ने कोर्ट में कहा, बिहार पुलिस को केस दर्ज करने का अधिकार है क्योंकि मुंबई पुलिस मामले की सही जांच नहीं कर रही थी। ये बात शिकायत में साफ तौर पर कही गई है। सुशांत की बॉडी को नीचे किसने उतारा ये किसी ने भी नहीं देखा। जिस पिता ने अपने बेटे को खो दिया जब बिहार में एफआईआर दर्ज की गई और बिहार पुलिस के अफसर जांच के लिए मुंबई पहुंचे तो उन्हें क्वारनटीन कर दिया गया। विकास सिंह ने कहा, 3 अगस्त को बीएमसी का क्वारनटीन प्रोटोकोल रुल बदल गया।

क्या कहा शासक के वकील ने?
प्रधान चक्रवर्ती के वकील श्याम दीवान से जज ने पूछा कि आपने खुद याचिका में कहा है कि आप सीबीआई जांच चाहते हैं। क्या यह सही है? इस पर दीवान ने कहा, 'हां लेकिन हम निष्पक्ष जांच चाहते हैं। जिस तरह से जांच सीबीआई को दी गई, उस पर हमें शक है। पहला मामला मुंबई पुलिस को दिया जाएगा। फिर से बाद में। श्याम दिवान ने कहा कि पटना में एफआईआर दर्ज की गई जबकि वहां घटना ही नहीं हुई थी। 38 दिनों की देरी से एफआईआर दर्ज की गई। अगर मामला का ट्रांसफर पटना से मुंबई नहीं होता तो रिया को इंसाफ नहीं मिल पायेगा। एफआईआर दर्ज होने के पीछे राजनीतिक कारण है। शम्मम दीवान ने कहा कि प्रधान चक्रवर्ती सुशांत से प्यार करता था। वे उनकी मौत के बाद नियंत्रण में हैं।

क्या कहा महाराष्ट्र सरकार के वकील ने?
महाराष्ट्र सरकार के वकील सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में बिहार पुलिस की एफआईआर दर्ज कर जांच करने को गलत बताया। सिंघवी ने कहा- देश मे संघीय ढांचा है। क्या शिकायतकर्ता की सुविधा के लिए कहीं भी मामला दर्ज किया जाएगा? उन्होंने सीबीआई जांच की सिफारिश और केंद्र सरकार के मान लेने को भी गलत बताया। महाराष्ट्र सरकार के वकील ने कहा, घटना जहां पर हुई है उस राज्य की सहमति सीबीआई जांच के लिए जरूरी है। SC चाहे तो FIR को एक राज्य से दूसरे राज्य या एजेंसी को ट्रांसफर कर सकता है। लेकिन इस मामले में जो हुआ है वह ग़ैरकानूनी है।

क्या कहा बिहार सरकार के वकील ने?
बिहार सरकार के वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि मुंबई पुलिस 25 जून के बाद भी बयान दर्ज कर रही है। अगर आप किसी मामले की जांच के लिए किसी को बुलाते हैं तो FIR का होना जरूरी है। इकलौती एफआईआर पटना पुलिस ने दर्ज की> ऐसा लगता है कि मुंबई पुलिस पर मामला को ढांकने के लिए दबाव है। जांच के लिए गया बिहार की टीम को जबरन क्वारंटीन कर दिया गया। यह किस तरह का रवैया है? मनिंदर सिंह ने कहा, मुंबई पुलिस ने सिर्फ मीडिया को दिखाने के लिए जांच का दिखावा किया। हकीकत में कोई जांच नहीं की जाती।



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