Wednesday, April 14, 2021
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सीएम योगी आदित्यनाथ के कारण बहुरे वनटांगियों के दिन, आजादी के बाद पहली बार 33 गांव चुनवा अपना प्रधान


गोरखपुर। योगी आदित्यनाथ (योगी आदित्यनाथ) के मुख्यमंत्री बनने के बाद वनटांगिया गाँव (वंतंगिया गाँव) के निवासियों की किस्मत ही बदल गई। आजादी के बाद उन्हे जहां मूलभूत सुविधाएं मिलने लगीं, वहीं इस बार वे लोग आजादी के बाद पहली बार अपना प्रधान चुनवा आए। दरअसल गोरखपुर, करगंज, गोंडा और बलरामपुर के 33 वनटांगिया गांव में पहली बार ग्राम पंचायत का चुनाव (यूपी पंचायत चुनव 2021) होने जा रहा है। वैसे तो इन गांवों के लोग वोट पहले कर चुके हैं, लेकिन अपना ग्राम प्रधान चुनने का अधिकार उनके पास नहीं था। लेकिन योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद इन गांवों को राजस्व ग्राम घोषित किया और यहां के वाशिंदों को समाज की बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा।

गोरखपुर के वनटांगिया गाँव जंगल तिकोनियों नम्बर 3 के निवासी राम समुझ कहते हैं कि “होने के साथतितिर झूठा रहल, पानी पीए के खातिर बेशुमती, जंगल हमार बाप दादा, अउर हम्मन बसावली, लेकिन यहां हमने के भगवल जाट रहल। धन्य भाग्य जोगी बाबा के की थरकी चरण इन्न पड़ी गाइल। आज उनकरि किरपा से पक्का मकान बा, शौचालय बा, लायनकन के पढ़े खातिर इस्कुल बा, बिजली, गैस, आंगनबाड़ी केंद्र, का-का गिनाईं, अचरर हां, जोगी बाबा के आशीर्वाद से हमनी के मशीन (आरओ) के पानी पायल जाला

पहली बार पंचायत चुनाव में खेलएंगे सक्रिय भूमिका
ये स्थित सिर्फ गोरखपुर के एक गांव की नहीं बल्कि जिले के पांच गांव, महराजगंज जिले के 18 वनटांगिया गांव, गोवंदा और बलरामपुर के पांच-पांच गांव की हैं। जिनको मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व ग्राम का दर्जा दिया। इन गांवों के निवासी पहली बार पंचायत चुनाव में सीधे और सक्रिय भूमिका निभाते हैं।मुख्यमंत्री की वजह से कई अधिकार मिले

पूर्वांचल में वनटांगियों के लिए सात दशक तक आजादी का असली मतलब बेमानी था। उनका व अधिक राजस्व अभिलेखों में न होने की वजह से वह समाज और विकास की बुनियादी सुविधाओं से कटे हुए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम घोषित कर उन्हें आजाद देश में मिलने वाली सभी बुनियादी सुविधाओं मुहैया कराकर विकास की बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा है। सीएम योगी ने प्रदेश में 35 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित किया है, जिससे वन क्षेत्रों में इन वन ग्रामों के निवासियों को सड़क, राशन, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं से लाभान्वित किया गया है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में 7,023 आवास मुशर समुदाय को दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना से छूट लाभार्थियों को 72,302 मुफ्त आवास दिए गए हैं। इसमें 38,112 मुशर श्रेणी, 4,779 वनटांगिया 2,992 कुष्ठ रोग संक्रमण और 81 थारु जनजाति के लोग लाभार्थी हुए हैं।

गांवों में मिल रही हैं ये सुविधाएं
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत 35 वनटांगिया ग्रामों में 5,973 शौचालय, 31 ग्रामों को विदुत ग्रीड और 16 ग्रामों को सोलर प्रणाली से विदुतिकृत किया गया है, जिससे 3172 परिवार लाभान्वित हुए हैं। वनटांगिया गांव के 131 दिव्यांगों को पेंशन, 2760 परिवारों को अंत्योदय राशन कार्ड और 6039 गृहस्थी राशन कार्ड दिए गए हैं।

अंग्रेजों ने बसाए वनटांगिया गांव थे
वनटांगिया गांव अंग्रेजी शासन में 1918 के आसपास बसाए गए थे। मकसद साखू के पौधों का रोपण कर वन क्षेत्र को बढ़ावा देना। उनके जीवन यापन का एकमात्र सहारा पेड़ों के बीच की खाली जमीन पर खेतीबाड़ी। गोरखपुर में कुसम्ही जंगल के पांच क्षेत्रों जंगल तिनकोनिया नम्बर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी और चिलबिलवा में बसी इनकी बस्तियां 100 साल से अधिक पुरानी हैं। पूर्वांचल के अन्य वनग्रामों का इतिहास भी बहुत पुराना है। जंगलों को नष्ट करने वाले वनटांगियों को देश की आजादी के बाद भी जंगली जीवन बिताने को मजबूर होना पड़ा। सरकार के किसी भी कागज में इनकी हैसिटी बतौर नागरिक नहीं थी। अस्सी और नब्बे के दशक के बीच तो उनमें जंगलों से भी बेदखल करने की कोशिश की गई। 1998 में गोरखपुर से पहली बार सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ वनटांगियों के संघर्ष के साथी बने और अपने संसदीय शब्द में सड़क से सदन तक उनके हक के लिए आवाज बुलंद करते रहे। वनटांगियों से योगी की आत्मीयता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह 2009 से उन्हीं के बीच दिवाली मनाते हैं।

सीएम योगी ने लड़ी हक की लड़ाई
बतौर सांसद योगी आदित्यनाथ को वनग्रामों में नक्सली गतिविधियों के इनपुट मिले, तो उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को इससे लड़ने की हथियार तैयार की। गोरक्षपीठ से संचालित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को उन्होंने गोरखपुर के वनटांगिया गांव जंगल तिनकोनिया नम्बर तीन में शिक्षा का अलख जगाने की जिम्मेदारी सौंपी और गोरक्षनाथ चिकित्सालय को स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। 2007 में इस वनग्राम में उन्होंने एक स्कूल खोला, तो वन विभाग ने इसे अवैध और अतिक्रमित बताते हुए योगी के खिलाफ मुकदमा चलाया था। हालांकि वन विभाग को बैकफुट पर आना पड़ा और वहां अस्थायी स्कूल बनाया गया। योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब वनग्रामों में सरकारी स्कूलों की सौगात है।





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