Saturday, October 24, 2020
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श्रम संहिता से संबंधित तीन विधेयक लोकसभा में पेश किए गए – श्रम संहिता से संबंधित तीन विधेयक लोकसभा में पेश किए गए


श्रम संहिता से संबंधित तीन विधेयक लोकसभा में पेश किए गए

केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार (फाइल फोटो)।

नई दिल्ली:

लोकसभा में शनिवार को उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा कोड 2020, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 पेश किए गए जिसमें किसी प्रशिक्षण में आजीविका सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा को विनियमित करने, सामूहिक विवादों की जांच और निर्धारण और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा शामिल है। संबंधित प्रावधान किए गए हैं।

लोकसभा में श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने इन तीनों संहिताओं के संबंधित विधेयक को पेश किया। इससे पहले गंगवार ने उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 को वापस लिया था जो पहले पेश किए गए थे।

श्रम मंत्री ने कहा कि चूंकि इन जमाकर्ताओं को श्रम संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया था और समिति ने इस पर 233 सिफारिशों के साथ रिपोर्ट जमा की है। इनमें से 174 सिफारिशों को स्वीकार किया गया है। इसके बाद नए विधेयक पेश किए जा रहे हैं।

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इससे पहले, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 को वापस लेने का विरोध करते हुए कहा कि वे तकनीकी आधार पर इसका विरोध कर रहे हैं। चूंकि इन सभाओं के लिए श्रम संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया और समिति ने रिपोर्ट सौंप दी, ऐसे में इन वेंडिंगयॉकों को वापस लेने से पहले समिति से संवाद किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वह जानना चाहते हैं कि समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया गया है। दूसरी ओर, कांग्रेस के मनीष तिवारी और शशि थरूर और माकपा के ए एम आरिफ ने नए विधेयक को पेश किए जाने के विरोध में किया। मनीष तिवारी ने कहा कि नए विधेयक लाने से पहले श्रमिक संगठनों और संबंधित पक्षों के साथ फिर से चर्चा की जानी चाहिए थी। यदि यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है तो मंत्रालय को फिर से यह प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नवयुवकों को सामूहिक किया जाना चाहिए ताकि लोग इस पर सुझाव दे सकें। इसमें फॉसी लेबरों की परिभाषा स्पष्ट नहीं है। तिवारी ने कहा कि श्रमिकों से जुड़े कई कानून अभी भी इसके दायरे से बाहर हैं, इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि विधेयक को वापस लिया जाए और आप अधिकारियों को दूर करने के बाद उन्हें लाया जाए। कांग्रेस के ही शशि थरूर ने कहा कि अंतर राज्य प्रवासी श्रमिकों के बारे में स्पष्टता नहीं है। इन विधायकों को नियमों के तहत पेश किए जाने से दो दिन पहले सदस्यों को दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की हड़ताल करने पर गंभीर रूप से रोक की बात कही गई है। इसमें असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।

श्रमायकों को पेश करते हुए श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि 44 कानूनों के संबंध में चार श्रम संहिता बनाने की प्रक्रिया बहुत व्यापक स्तर पर चली गई है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले इस विषय पर विचार 2004 में आया था और इसके बाद 10 साल तक कुछ नहीं हुआ। मोदी सरकार आने के बाद इस पर काम शुरू हुआ। इसके तहत नौ त्रिकोणीय वार्ताएँ हुईं, 10 बार क्षेत्रीय विचार हुए, 10 बार अंतर मंत्रालयी परामर्श हुआ, चार उप समिति स्तर की चर्चा हुई।

श्रम मंत्री ने कहा कि कोड्स को 3 महीने के लिए वेबसाइट पर रखा गया और इस पर लोगों से 6 हजार सुझाव प्राप्त हुए। इसे श्रम संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया और समिति ने इस पर 233 सिफारिशों के साथ रिपोर्ट सौंप दी है। इनमें से 174 सिफारिशों को स्वीकार किया गया है। इसके बाद नए विधेयक पेश किए जा रहे हैं।

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने साझा नहीं किया है। यह सिंडीकेट ट्वीट से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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