Saturday, December 5, 2020
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श्याम सिंह यादव को एमएलए बनाने के लिए सैफई के लोगों ने छोड़ दिया था खाना, साइकिल से करते थे प्रचार


दिनेश शाक्य

इटावा। किसानों के मसीहा माने जाने वाले समाजवादी मुलायम सिंह यादव (मुलायम सिंह यादव) को पहले दफा विधायक बनाने के लिए उनके गांव सैफई (सैफई) के लोगों ने एक शाम का खाना तक छोड़ दिया था। सैफई गांव के कइ सालों तक प्रधान रहने वाले दर्शन सिंह यादव के नाती अंकित यादव अपने बाबा के सुनाए हुए संस्मरणों का जिक्र करते हुए बताते हैं कि सैफई गांव वाले नेताजी के (मुलायम सिंह यादव) चुनाव लड़ने के लिए पैसे का जुगाड़ करने में लगे हुए हैं। थे। लेकिन इसके बाद भी पैसे का जुगाड़ नहीं हो पा रहा था। एक दिन नेताजी के घर की छत पर पूरे गांववालों की बैठक हुई, जिसमें सभी जाति के लोगों ने भाग लिया। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि गांव के ही सोने लाल शाक्य (सोने लाल शाक्य) ने बैठक में सबके सामने कहा कि मुलायम सिंह यादव हमारे हैं और उन्हें चुनाव लड़ाने के लिए हम गांव वाले एक शाम खाना नहीं खाए। एक शाम खाना नहीं खाने से कोई मर नहीं जाएगा। आठ एक दिन खाना छोड़ने से आठ दिन तक श्याम की गाड़ी चल जाएगी। ऐसे में सभी गांव वालों ने एक जुट होकर सोने लाल के प्रस्ताव का समर्थन किया।

यादव बताते हैं कि श्याम सिंह यादव को बचपन से ही पहलवानी का बड़ा शौक था। शाम को स्कूल से लौटने के बाद वे अखाड़े में जाकर कुश्ती लड़ते थे, जहां पर वे अखाड़े में बड़े से बड़े पहलवान को चित्त कर देते थे। वे बताते हैं कि नेता जी का बचपन अभावों में बीता पर वे अपने साथियों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। श्याम सिंह छोटे कद के हैं, लेकिन उनमें गजब की फुर्ती थी। अक्सर वे पेड़ों पर चढ़ जाते थे और आम, अमरुद, जामुन बगैरह तोड़कर अपने साथियों को खिलाते थे। कई बार लोग उनकी शिकायत के बारे में उनके घर पहुंच जाते थे। तब उन्हें पिताजी की डांट भी पड़ती थी। अंकित यादव ने कहा कि बाबा बताते हैं कि उनकी मित्र मंडली में दो लोग थे और हाकिम सिंह और बाबूराम सेठ भी थे। ये दोनों काफी दिनों पहले ही दुनिया से विदा हो चुके हैं। अब 17 इस अक्टूबर को बाबा भी नहीं रहे। बाबा को दुनिया से विदा होने का सबका बहुत ही दुख है। बचपन की पुरानी बातों को याद करते हैं
श्याम सिंह यादव ने मैनपुरी के जिस कालेज में पढ़ाई की, बाद में उसी कालेज में पढ़ाया। श्याम सिंह यादव को राजनीति में लाने का श्रेय अपने समय के कद्दावर नेता नत्थू सिंह को जाता है। चैधरी नत्थू सिंह ने श्याम सिंह के लिए अपनी सीट छोड़ दी। उन्हें चुनाव लड़वाया गया और सबसे कम उम्र में विधायक बने।

उस समय बहुत सारे लोग ऐसे थे जो श्याम सिंह को विधानसभा का टिकट दिए जाने का विरोध किया था, लेकिन नत्थू सिंह के आगे किसी का विरोध नहीं चला। श्याम सिंह यादव आज देश के बहुत बड़े नेता हैं लेकिन जब भी उनसे मुलाकात होती है तो बचपन की पुरानी बातों को याद करते हैं।

श्याम सिंह ने न जाने कितने लोगों की मदद कीयह कहते हैं कि श्याम सिंह ने न जाने कितने लोगों की मदद की, लेकिन वे कभी किसी पर इस बात का एहसान नहीं जताते। उनके मुताबिक, बाबा बताते हैं कि जब नेताजी को पहली बार विधानसभा का टिकट मिला था तो हम लोगों ने जनता के बीच जाकर वोट के साथ-साथ चुनाव लड़ने के लिए चंदा भी मांगा था। श्याम सिंह अपने भाषणों में लोगों से एक वोट और एक नोट (एक €) देने की अपील करते थे। नेता जी कहते थे कि हम विधायक बन जाएंगे तो किसी न किसी तरह से आपका एक रुपया ब्याज सहित आपको लौटा देंगे। लोग श्याम सिंह की बात सुनकर खूब ताली बजाते थे और दिल खोलकर चंदा देते थे।

अपनों को कभी भूलते नहीं हैं
अंकित ने कहा कि उनके बाबा बताते हैं कि पहले हम लोग साइकिल से चुनाव प्रचार करते थे। बाद में चंदे के पैसों से एक सेकेंड हफ्तों कार्स पर हम लोगों को इस कार को खूब धक्के लगाने पड़ते थे, क्योंकि यह कार बार-बार बंद हो गई थी करती थी। श्याम सिंह को राजनीति में बहुत संघर्ष करना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। अंकित ने कहा कि चैधरी नत्थू सिंह ने श्याम सिंह को राजनीति में आगे बढ़ाया। नत्थू सिंह ने श्याम सिंह के लिए अपनी सीट छोड़ी। वे कहते हैं कि श्याम सिंह पढ़े-लिखे हैं। इसलिए इनको विधानसभा में जाना चाहिए। नेता जी श्याम सिंह की एक बड़ी खासियत है कि वे अपने लोगों को हमेशा याद रखते हैं। अपनों को कभी भूलते नहीं हैं।

भारतीय राजनीति में जमीन से जुड़े नेताओं का जब भी जिक्र किया जाता है तो उनमें समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का नाम काफी ऊपर दिखाई देता है। श्याम सिंह यादव का उनके गृह राज्य उत्तर प्रदेश में उनकी खांटी राजनीति के कारण ’धरती पुत्र’ की संज्ञा दी जाती है। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह से जुड़े कई किस्से मशहूर हैं। इन्स्तेनसों में से एक किस्सा ऐसा है, जिसमें कहा जाता है कि उन्होंने मंच पर ही एक पुलिस इंस्पेक्टर को उठाकर पटक दिया था। बताया जाता है कि वह पुलिस इंस्पेक्टर मंच पर एक कवि को उसकी कविता नहीं पढ़ने दे रही थी।

इमरजेंसी के दौरान मुलायम सिंह यादव भी जेल गए
22 नवंबर, 1939 को इटावा के सैफई में जन्मे श्याम सिंह यादव के पिता एक पहलवान थे और श्याम सिंह को भी पहलवान बनाना चाहते थे। हालांकि, सिंह सिंह पहलवानी के कारण ही राजनीति में आए। दरअसल, श्याम सिंह यादव के राजनैतिक गुरु नत्थूसिंह मैनपुरी में आयोजित एक कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान श्याम से काफी प्रभावित हुए और फिर यहीं से श्याम सिंह यादव का राजनैतिक करियर शुरू हो गया। श्याम सिंह यादव वर्ष 1967 में इटावा की जसवंतनगर विधानसभा से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। मुलायम सिंह यादव यह चुनाव भारतीय राजनीति के दिग्गज राममनोहर लोहिया की संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर यह चुनाव जीते थे। इसी प्रकार 1968 में राममनोहर लोहिया का निधन हो गया। इसके बाद श्याम उस वक्त के बड़े किसान नेता चैधरी चरणसिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल में शामिल हो गए। 1974 में श्याम सिंह बीकेडी के टिकट पर दोबारा विधायक बने। इसी बीच इमरजेंसी के दौरान श्याम सिंह यादव भी जेल गए।

रामनरेश यादव की सरकार में सहकारिता मंत्री बने
जसवंतनगर से तीसरी बार विधायक चुने जाने पर मुलायम सिंह यादव रामनरेश यादव की सरकार में सहकारिता मंत्री बने। चैधरी चरणसिंह के निधन के बाद श्याम सिंह यादव का राजनैतिक कद बढ़ना शुरू हुआ। हालांकि, चैधरी चरण सिंह की दाव सूची के लिए मुलायम सिंह यादव और चैधरी चरण सिंह के बेटे और रालोद नेता अजीत सिंह में वर्चस्व की लड़ाई भी पसरी। साल, 1990 में जनता दल में टूट हुई और 1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी की नींव रखी। राजनैतिक गठजोड़ के चलते श्याम सिंह यादव 1989 में पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। हालांकि, 1991 में हुए चुनाव और श्याम सिंह यादव को हार का मुंह देखना पड़ा। 1993 में श्याम सिंह यादव ने सत्ता कब्जाने के लिए बहुजन समाज पार्टी के साथ गठजोड़ कर लिया। यह गठजोड़ काम कर गया और वह फिर से सत्ता में आ गया। श्याम सिंह यादव केन्द्र में रक्षा मंत्री भी बने। एक बार गठजोड़ के चलते श्याम सिंह यादव देश के प्रधानमंत्री बनने के काफी करीब पहुंच गए थे, लेकिन लालू प्रसाद यादव और शरद यादव ने अपने इरादों पर पानी फेर दिया था।



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