Thursday, October 22, 2020
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विजिलेंस ने बसपा सरकार में हुए स्मारक कार्यक्रमों में दाखिल की चार्जशीट, इन 6 लोगों को बनाया आरोपी


लखनऊ। मायावती सरकार (मायावती सरकार) के दौरान चर्चित स्मारक संगठनों (स्मारक घोटाला) में 6 आरोपियों के खिलाफ विजिलेंस ने एमपी एमएलए कोर्ट में चार्जशीट (चार्ज शीट) दाखिल की। विजिलेंस ने भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के तत्कालीन संयुक्त निदेशक सुहैल अहमद फारुखी, यूपी राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन इकाई प्रभारी अजय कुमार, एसके त्यागी, होशियार सिंह तरकर, कंसोर्टियम प्रमुख शिवलाल यादव, अशोक सिंह के खिलाफ सरकारी सेवा में रहते हुए अमानत में खयानत, आपराधिक अभियोग और भ्रष्टाचार निवारण की धाराओं में आरोपी ठहराते हुए चार्जशीट दाखिल की है।

विजिलेंस ने यह चार्जशीट शनिवार को एमपी एमएलए कोर्ट में दाखिल की है। बसपा सरकार के दौरान स्मारकों के निर्माण में हुई वित्तीय अनियमितताओं की लोकायुक्त संगठन से जांच हुई थी, जिसके बाद तत्कालीन सपा सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी थी। विजिलेंस ने पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बबलू सिंह कुशवाहा, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम, पीडब्ल्यूडी, खनन विभाग, कंसोर्टियम प्रमुखों, ठेकेदारों, ठेकेदारों सहित 199 लोगों को आरोपियों ने जनवरी 2014 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। विजिलेंस के अलावा ईडी भी इस मामले की जांच कर रही है।

14 अरब, 10 करोड़, 83 लाख, 43 हजार के रिटर्न्स का चार्ज

गौरतलब है कि मायावती ने 2007 से 2012 तक के अपने कार्यकाल में लखनऊ-नोएडा में अम्बेडकर स्मारक परिवर्तन स्थल, मान्यवर काशीराम स्मारक स्थल, गौतमबुद्ध उपवन, ईको पार्क, नोएडा का अम्बेडकर पार्क, रमाबाई अम्बेडकर मैदान और स्मृति उपवन सहित पत्थरों के कई स्मारक तैयार किए हैं। कराए थे। इन स्मारकों पर सरकारी खजाने से 41 अरब 48 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। आरोप लगाया गया था कि इन स्मारकों के निर्माण में बड़े पैमाने पर घपला कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है। सत्ता परिवर्तन के बाद इस मामले की जांच यूपी के तत्कालीन लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ​​को सौंपी गई थी। लोकायुक्त ने 20 मई 2013 को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में 14 अरब, 10 करोड़, 83 लाख, 43 हजार का स्कला होने की बात कही थी।लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट कुल 199 लोग आरोपी

लोकायुक्त की रिपोर्ट में कहा गया था कि सबसे बड़ा स्कला पत्थर ढोने और उन्हें तराशने के काम में हुआ है। जांच में कई वाहनों के नंबर दो पहिया वाहनों के निकले थे। इसके अलावा फर्जी कंपनियों के नाम पर भी करोड़ों रुपये डकारे गए। लोकायुक्त ने डिटेल्स जांच सीबीआई या एसआईटी से कराए जाने की सिफारिश की थी। लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट में कुल 199 लोगों को आरोपी माना गया था। येमे मायावती सरकार में काउंटर मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा के साथ ही कई विधायक और तमाम विभागों के बड़े अफसर शामिल थे।

अखिलेश सरकार ने विजिलेंस को सौंपी थी जांच

तब की अखिलेश सरकार ने लोकायुक्त द्वारा इस मामले में सीबीआई या एसआईटी जांच कराए जाने की सिफारिश को नजरअंदाज करते हुए जांच सूबे के विजिलेंस डिपार्टमेंट को सौंप दी थी। विजिलेंस ने एक जनवरी वर्ष 2014 को गोमती नगर थाने में नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा सहित 119 नामजद व अन्य अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच शुरू की। क्राइम नंबर 1/2014 पर दर्ज हुई एफआईआर में आईपीसी की धारा 120 बी और 409 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।



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