Wednesday, April 14, 2021
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लखनऊ में कोरोना टाइप शक्स का अंतिम संस्कार बना मुसीबत, 10 से 12 घंटे की वेटिंग


लखनऊ में कोरोनापोर्ट शवों के अंतिम संस्कार में 10 से 12 घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।

लखनऊ में कोरोनापोर्ट शवों के अंतिम संस्कार में 10 से 12 घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।

लखनऊ समाचार: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कोरोना मरीजों की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर संकट खड़ा हो गया है। दरअसल भैसाकुंड बैकुंठ धाम में विद्युत शवगृह की एक मशीन खराब होने के कारण सिर्फ एक ही मशीन चल रही है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कोरोना (COVID-19) के बढ़ते मामले चिंता का सबब बने हुए हैं। सरकार संक्रमण के बढ़ने को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उत्तर प्रदेश के जिन जिलों में 500 से ज्यादा मरीज हैं, वहां नाइट कर्फ्यू (नाइट कर्फ्यू) लगाने की छूट डीएम को दे दी गई है। अब तक लखनऊ (लखनऊ), वाराणसी (वाराणसी), प्रयागराज (प्रयागराज) और कानपुर (कानपुर) में इसकी ऐलान भी कर दी गई है। ये सबके बीच कोरोना संक्रमण से मरने वालों के लिए मरने के बाद भी मुसीबतें कम नहीं हैं।

मूल में को विभाजित -19 सर्वल के तहत को विभाजित संक्रमण से मरने वालों का शवों का अंतिम संस्कार विद्युत शवगृह में ही किया जा सकता है। उन्हें जलाने की परमिशन नहीं दी जाती। कब्रिस्तान में भी मुस्लिम शकों के अंतिम संस्कार के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है। लेकिन लखनऊ के भैसाकुंड बैकुंठ धाम में विद्युत शवगृह की एक मशीन खराब होने के कारण सिर्फ एक ही मशीन चल रही है। जिसके कारण शवों का अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों को कई-कई घंटों का इंतजार करना पड़ रहा है।

सुबह 9.30 बजे आया, रात 8 बजे नंबर आएगा

राजधानी लखनऊ के पीजीआई इलाके से आए एक व्यक्ति ने बताया कि उसके घर में उनके ससुर की कोरोना संक्रमण से मौत हुई थी। उसके बाद आज सुबह 9:30 बजे उनके शव को लेकर भैसा कुंड पहुंचे। लेकिन वहाँ पहले से ही शवास की संख्या इतनी थी कि उन्हें टोकन का 9 नंबर मिला। उन्होंने बताया कि उनके टोकन की संख्या का समय रात में तकरीबन 8:00 बजे के आसपास होगा। यानी कि संक्रमण से मौतों के बाद शवों के अंतिम संस्कार के लिए लोगों को 10 से 12 घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है।एक मशीन खराब, अब तक ठीक नहीं हुई

भैसा कुंड के इंचार्ज आजाद ने भी बताया कि यहां पर 2 विद्युत शवगृह हैं, लेकिन अभी भी एक मशीन खराब चल रही है। सिर्फ एक ही मशीन के जरिए अंतिम संस्कार किए जा रहे है इसीलिए समय लग रहा है। हालांकि कोविड प्रोटोकॉल के तहत इस बात को सुनिश्चित किया जाता है कि मृत्यु के बाद भी शवों के अंतिम संस्कार में को विभाजित -19 प्रोटोकॉल का पूरी तरह से अनुसरण हो। शवास को ज्यादा देर कहीं पर भी ना रखा जाए लेकिन विद्युत शवगृह में व्यवस्थाजामों की कमी होने के कारण परिजनों को अनेको संकटों का सामना करना पड़ रहा है। लोग शवगृह के सामने तपती धूप में खड़े रहकर अपनी बारी का इन्तिज़ार करने को मजबूर हैं।








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