Tuesday, January 18, 2022
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राहुल गांधी को अमेठी की 29 महीने बाद क्यों आई याद : Rahul Gandhi Amethi Visit after 29 months Political Analysis UP Elections 2022


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वखनऊ
अमेठी की सीट गंवाने के बाद राहुल गांधी 29 महीने में पहली बार अमेठी आए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या राहुल गांधी सिर्फ यूपी चुनाव को देखते हुए अपने पुराने संसदीय क्षेत्र पहुंचे हैं या इसका संदेश कुछ और है। 2019 की हार के बाद सियासी हलकों में यह भी कहा गया कि राहुल गांधी अब शायद ही अमेठी का रुख करें। एक ऐसे दौर में जब प्रियंका गांधी ने पूरी तरह से यूपी में कांग्रेस की चुनावी कमान संभाल रखी है, राहुल के अमेठी दौरे के क्या मायने हैं, आइए समझते हैं।

इस वजह से अमेठी का दौरा अहम
वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस कहते हैं, ‘पिछली बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को रायबरेली की दो सीटें मिली थीं। अमेठी में एक भी सीट नहीं मिली थी। अमेठी की तीन सीटों पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर आने में भी सफल नहीं हो पाई थी। इस बार शुरुआत वह अपने गढ़ से कर रहे हैं कि पहले अपना किला बचाएं और विधानसभा चुनाव में कुछ सम्मानजनक प्रदर्शन कर सकें। दूसरी बात ये है कि प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं। ये भी तय है कि गांधी परिवार से किन्हीं दो लोगों को अमेठी और रायबरेली से चुनाव लड़ना है। इस दशा में राहुल का अमेठी दौरा महत्वपूर्ण है।’

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‘यूपी में रिवाइवल के लिए गढ़ में मजबूती जरूरी’
वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी से जब पूछा गया कि राहुल के अमेठी दौरे की कितनी अहमियत है तो उन्होंने एनबीटी ऑनलाइन को बताया, ‘प्रियंका ने राहुल से कहा था कि आप भी अमेठी आइए। चूंकि अमेठी से हार के बाद लंबे समय से वह इधर नहीं थे। यूपी की वह अनदेखी नहीं कर सकते। ऐसा संभव है कि वह अमेठी को एकदम से ना छोड़ें। प्रियंका को भी चुनाव लड़ाने की बात है। कुल मिलाकर अपनी बनी-बनाई जमीन को छोड़ना बुद्धिमानी नहीं है। वहां से चुनाव ना लड़ना हो तो भी मेरा ये मानना है कि उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण है। यूपी का चुनाव आ रहा है तो अकेले प्रियंका सब कुछ नहीं कर सकतीं। रायबरेली और अमेठी ये कांग्रेस के दो प्रभाव क्षेत्र थे। दोनों आपस में जुड़े हैं। पार्टी के कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने के लिए वह अमेठी गए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी की यहां काफी बुरी स्थिति थी। यूपी में रिवाइवल (पुनर्जीवन) के लिए जरूरी है कि जो अपना प्रभाव क्षेत्र है वहां फिर से कांग्रेस संपर्क बनाए।’

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हार के बावजूद स्मृति ने अमेठी को मथ डाला था
2019 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को स्मृति इरानी ने 55,120 वोटों से करारी शिकस्त दी थी। वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी से कड़े मुकाबले के बाद स्मृति इरानी हार गई थीं। लेकिन स्मृति ने इस हार के बावजूद अमेठी का आंगन नहीं छोड़ा। महज एक महीने के अंदर वह गांधी परिवार के इस पुराने गढ़ पहुंच गई थीं। वहीं 2014 से 2019 के दौरान स्मृति इरानी ने चुपचाप अमेठी के 63 दौरे किए। दूसरी ओर राहुल ने इस दौरान 28 बार अपने संसदीय क्षेत्र का रुख किया। राहुल के अमेठी दौरे पर वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं, ‘राहुल ने बहुत गलती की जो इतने दिन अमेठी नहीं आए। किसी भी नेता के लिए ये गलत बात है कि एक बार आप चुनाव हार गए तो वहां जाना छोड़ दिया। अगर एक हार के बाद आप क्षेत्र से दूर हो जाएं तो प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ता है। देर आए दुरुस्त आए। मुझे लगता है कि अपनी बहन से वह कुछ सीख ले रहे हैं।’

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‘अमेठी में संसदीय राजनीति में सक्रिय रहेगा गांधी परिवार’
वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस आगे कहते हैं, ‘राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। स्मृति इरानी कम से कम राहुल गांधी के सांसद रहते हुए जितना वो आते थे, उससे कहीं ज्यादा अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही थीं। इन सब बातों को देखते हुए उनका दौरा यहां लगाया गया है। इससे पहले जब प्रियंका गांधी ने रायबरेली का दौरा किया था और अमेठी जाने की योजना थी लेकिन नहीं जा पाई थीं। उस समय भी जब अमेठी के लोगों ने आकर उनसे मुलाकात की थी तो इस शिकायत को दर्ज कराया था कि राहुल या गांधी परिवार का सदस्य अमेठी नहीं आ रहा है। ये अपना किला बचाने की कवायद है। वायनाड से जीतने के बाद माना जा रहा था कि राहुल अमेठी छोड़ देंगे लेकिन इस दौरे का संदेश है कि गांधी परिवार अमेठी में अपनी उपस्थिति बनाए रखेगा और अमेठी में संसदीय राजनीति में सक्रिय रहेगा।’

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2024 में अमेठी से लड़ेंगे राहुल?
2024 में क्या राहुल अमेठी से फिर लड़ सकते हैं, इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान ने कहा, ‘2024 के बारे में अभी अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। लेकिन लगता है कि उसी दिशा में राहुल गांधी जा रहे हैं। अपने दौरे से यह संदेश देने की कोशिश है।’



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