Thursday, August 6, 2020
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 NEP 2020 पर कांग्रेस का बयान – न परामर्श, न चर्चा, न विचार और न प्रगति! एनईपी 2020 पर कांग्रेस का बयान


'न परामर्श, न चर्चा, न विचार और न विस्तार!' एनईपी 2020 पर कांग्रेस का बयान

NEP 2020 केवल शब्द, चमक-दमक, दिखावे और आडंबर के आवरण तक सीमित रही: कांग्रेस

नई दिल्ली:

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020)) को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार का घेराव किया है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला (रणदीप सुरजेवाला), पल्लम राजू (पल्लम राजू) और राजीव गौड़ा (राजीव गौरा) ने साझा बयान जारी किया है। कथन के अनुसार नई शिक्षा नीति से मानव विकास, ज्ञान प्राप्ति, क्रिटिकल थिंकिंग और जिज्ञासा की भावना दरकिनार हुई है। उन्होंने इसकी खामियां गिनाते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (NEP 2020), का उद्देश्य एवं स्कूल और उच्च शिक्षा ’में परिवर्तनकारी सुधार लाना होना चाहिए था, लेकिन वह केवल शब्दों, चमक-दमक, दिखावे और आडंबर के आवरण तक सीमित रहा है। उनके अनुसार इस नीति में तर्कसंगत कार्ययोजना व रणनीति और स्पष्ट रूप से परिभाषित लक्ष्य की कमी नजर आ रही है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि यह आपके आप में बड़ा सवाल है कि शिक्षा नीति 2020 की घोषणा कोरोना महामारी के संकट के बीचों के बीच क्यों की गई और वह भी तब, जब सभी शैक्षणिक संस्थान बंद पड़े हैं।

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उन्होंने कहा कि सिवाय भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों के, पूरे शैक्षणिक समुदाय ने इसके आगे बढ़कर विरोध जताया है। शिक्षा नीति 2020 के बारे में कोई व्यापक परामर्श, बातचीत या चर्चा ही नहीं हुई। बयान में कहा गया कि हमारे आज और कल की पीढ़ियों के भविष्य का निर्धारण करने वाली इस महत्वपूर्ण शिक्षा नीति को पारित करने से पहले मोदी सरकार ने संसदीय चर्चा या परामर्श की जरूरत भी नहीं समझी। उन्होंने शिक्षा के कानून के अधिकार को याद दिलाते हुए कहा कि जब कांग्रेस अधिकार शिक्षा का अधिकार कानून ’लाई, तो संसद के अंदर और बाहर हर पहलू पर व्यापक चर्चा हुई थी।

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कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति में शिक्षा के अनुसार जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च करने की सिफारिश की गई है जबकि इसके विपरीत मोदी सरकार में बजट के प्रतिशत के रूप में शिक्षा पर किया जाने वाला खर्च, 2014-15 में 4.14 प्रतिशत से गिरकर 2020-21 में 3.2 प्रतिशत हो गया है। कांग्रेस के अनुसार यहां तक ​​कि चालू वर्ष में कोरोना महामारी के तहत इस बजट की राशि में भी लगभग 40 प्रतिशत की कटौती होगी, जिससे शिक्षा पर होने वाला खर्च कुल बजट के 2 प्रतिशत (लगभग) के बराबर ही रहेगा। यानि शिक्षा नीति 2020 में किए गए वादों और उस वादे को पूरा किए जाने के बीच जमीन आसमान का अंतर है।

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कांग्रेस ने अपने बयान में कहा है कि शिक्षा के बारे में भी कोई सवाल नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति 2020 का मुख्य केंद्र कि ऑफ़लाइन शिक्षा ’है। जबकि गरीब व मध्यम वर्ग परिवारों में कंप्यूटर और इंटरनेट न उपलब्ध होने के कारण गरीब और वंचित छात्र अलग थलग पड़ जाएंगे और देश में एक नया एक डिजिटल डिवाईड 'पैदा हो जाएगा। इसके अलावा भी उन्होंने अपने बयान में विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की त्त स्वायत्तता 'को लेकर भी चिंता जताई है। कांग्रेस नई शिक्षा नीति को लेकर स्कूली और उच्च शिक्षा का भी विश्लेषण किया है।

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