Monday, May 17, 2021
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रमजान के दौरान ऐसे नहीं टूटेगा डायबिटीज पेशेंट का रोजा, करने वाले ये काम करेंगे


रोजा रखने के बाद डायबिटीज की जांच कराई जा सकती है।  (सांकेतिक चित्र)

रोजा रखने के बाद डायबिटीज की जांच कराई जा सकती है। (सांकेतिक चित्र)

डॉ (डॉक्टर) हामिद अशरफ ने कहा कि जिनके ब्लड शुगर नियंत्रण में है और जिनके रक्त में शर्करा का स्तर अचानक नहीं गिरता है और जो एक ही समय में कई बीमारियों से पीड़ित नहीं हैं, वे रोजा (रोजा) रख सकते हैं।

नई दिल्ली। रमजान (रमजान) शुरू होने से पहले ही डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के सवालों की फेहरिस्त लम्बी होती चली जाती है। डायबिटीज से पीड़ित होने पर रोजा रख सकते हैं या नहीं। अगर रख सकते हैं तो रोजे के दौरान क्या करना चाहिए? दवा किस तरह से चाहिए। डायबिटीज चेक करने से कहीं रोजा तो नहीं टूटता है। सेहरी और इको के दौरान डायबिटीज के मरीज का खानपान कैसा हो इसे लेकर भी तमाम तरह के सवाल होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के जेएन मेडिकल कॉलेज में एक सेमिनार का आयोजन किया गया था।

इस मौके पर जेएन मेडिकल कॉलेज के राजीव गांधी (राजीव गांधी) सेंटर फॉर डायबिटीज एंड एंडक्राइनोलोजी और मेडिसिन विभाग के वक्ताओं सहित दूसरे कॉलेजों से आए वक्ताओं ने रोजे और डायबिटीज के मरीजों से जुड़ी सलाह पर कई तरह की खास बातें साझा कीं।

रखने वाले 150 मिलियन लोग रोज़ा हैं
सबसे पहले डॉ। साराह आलम (सलाहकार, चीनी अस्पताल, फरीदाबाद) ने कहा कि रमजान के दौरान लगभग 150 मिलियन लोग रोजा रखते हैं। हाल के शोध से पता चला है कि आंतरिक उपवास लोगों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। उन्होंने कहा कि उपवास आहार रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है, इसलिए उन्हें डॉक्टर से सलाह करने के बाद ही रोजा रखना चाहिए।उन्हें नहीं रखना चाहिए

राजीव गांधी सेंटर फॉर डायबिटीज एंडोक्राइनोलोजी (फैकल्टी ऑफ मेडिसिन) के निदेशक डॉ। हामिद अशरफ ने कहा कि रोजे का डायट लोगों पर अलग-अलग प्रभाव हो सकता है। जिन लोगों को उच्च आहार है और जिनमें अक्सर रक्त शर्करा कम होती है, या जो गर्भवती हैं और जिन्हें दर्द की गंभीर बीमारी है। उन्हें रोजा से बचना चाहिए।

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खाने पर नियंत्रण रखा गया तो पूरे रोजा रख सकते हैं
राजीव गांधी केंद्र के पूर्व निदेशक प्रोफेसर जमाल अहमद ने अपने संबोधन में कहा कि मधुमेह से पीड़ित लोगों को रमजान के कम से कम एक महीने पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि उन्हें रमजान के दौरान अपनी दवा बदलनी या कम करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आहार रोगियों को इमान और सहरी के दौरान संयम से भोजन करना चाहिए। उन्हें शर्करा युक्त पेय, तले हुए खाद्य पदार्थ और उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ से बचना चाहिए। इसके अलावा उपवास के दौरान रक्त शर्करा की जांच की जानी चाहिए, इससे रोजा नहीं टूटता है।

डॉ के लिए चुनौती है रोजे में शुगर लेवल बनाए रखना
मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर शादाब ए। खान ने कहा कि रोजे की हालत में डाय को कंट्रोल रखना हर डॉक्टर के लिए एक चुनौती होती है। इसलिए इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन खासकर डॉक्टरों के लिए खासतौर से फायदेमंद होता है। सेमीनार के दौरान फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के डीन प्रोफेसर राकेश भार्गव, जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और सीएमएस प्रोफेसर शाहिद सिद्दीकी, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, शिक्षक और अलीगढ़ के प्रमुख चिकित्सक भी कार्यक्रम में मौजूद थे।








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