Saturday, October 24, 2020
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मेडिकल परीक्षा: छोटे शहर के छात्र बड़ी सफलता हासिल करते हैं – मेडिकल परीक्षा: छोटे शहर के छात्रों ने बड़ी सफलता हासिल की है


वाराणसी:

प्रतिभा शहरी खुशी-सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, वाराणसी (वाराणसी) के छात्र कृष्णशु ने यह साबित कर दिखाया। मेडिकल की परीक्षा (मेडिकल प्रवेश परीक्षा) के नतीजे आ गए हैं। इसमें न सिर्फ छोटे शहरों के बच्चे टॉपर लिस्ट में हैं बल्कि छोटे शहरों में ही कोचिंग द्वारा इन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। वैसे तो रेटेड कोचिंग के लिए मशहूर है, लेकिन वहां के एक बच्चे ने बनारस आकर कोचिंग की और 53 वीं रैंक पाई। इस बात से ये ज़ाहिर होता है कि सही मार्गदर्शन मिला है तो आला से आला मुकाम हासिल किया जा सकता है। छोटे शहर में बनेकर बड़ी सफलता हासिल करने वाले छात्र सिर्फ कृष्णांशु ही नहीं हैं, श्वेता और आकांक्षा जैसी छात्राएं भी हैं जो अपने सपने पूरे करने की राह पर चल पड़ी हैं।

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बनारस की एल वन कोचिंग क्लास में आज जश्न का माहौल था। यहाँ आज पढ़ाई नहीं हो रही थी बल्कि छात्र कृष्णशु की सफलता का जश्न मनाया जा रहा था। इस होनहार छात्र ने नीट में 720 में से 705 नंबर हासिल करके देश में 53 वां स्थान पाया है। छात्र कृष्णांशु तंवर कहते हैं कि '' एग्जाम के रिजल्ट आने के बाद मैं बहुत खुश हूं। मेरा डॉ बनने का सपना पूरा होने जा रहा है। मैं इस सफलता पर मेरे पेरेंट्स को, मेरी एल वन कोचिंग की पूरी टीम को और मेरे जितने रिलेटिव अपरिचित हैं, उन्हें धन्यवाद देना चाहूंगा। '

कृष्णांशु कोचिंग के लिए प्रसिद्ध रेज के अलवर जिले के सालिमपुर गांव के रहने वाले हैं लेकिन कोचिंग करने वाले बनारस आए क्योंकि उनके परिवार की माली हालत ठाक नहीं है। कृष्णांशु तंवर ने कहा कि '' मैं लोअर मिडिल क्लास फैमिली से बिलॉन्ग करता हूं। मेरी इकॉनामिकलाइन ऐसी नहीं है कि मैं बहुत ज्यादा फीस पढ़ सकूं, कोटा वगैरह में। वहाँ लोड बहुत गिर जाता है। ''

बनारस में कोचिंग पाकर प्रबंधित होने वाली कृष्णांशु की सहपाठी श्वेता भी हैं जो मानती हैं कि कामयाबी बड़े शहर और बड़ी कोचिंग से नहीं बल्कि आत्मविश्वास से मिलती है। श्वेता सिंह कहती हैं कि अगर बच्चे अगर खुद पर कॉन्फिडेंस रखें, सेल्फ स्टडी करें, उन्हें अच्छा ई मटेरियल प्रोवाइड कराया जाए तो वहीं रहकर सफल हो सकते हैं। बड़े शहर में जाना जरूरी नहीं है, जहां हैं, छोटे शहर में रहकर भी पढ़ सकते हैं। ''

कृष्णांशु और श्वेता की तरह ही गोरखपुर की आकांक्षा है। आकांक्षा के घर में आज खुशियों का ठिकाना नहीं क्योंकि बेटी 720 में से 720 नंबर लाकर मेडिकल के इम्तिहान में दूसरे नंबर पर आई है। हालांकि इसकी तैयारी दिल्ली की कोचिंग से की पर परीक्षा के दरमियान लॉकडाउन में गोरखपुर में ही रहकर यह मुकाम हासिल किया।

एल वन कोचिंग के ज्वॉइंट डायरेक्टर अरुण कुमार तिवारी ने कहा कि '' यहां पर बनारस में हमारे जैसे और भी लोग हैं, जो मिडिल फैमिली के हैं, किसान के बच्चे हैं, वह हमारे यहां रुकते हैं। जो थोड़ा अच्छी खाल में है वे शायद यहाँ पर पढ़ना पसंद नहीं करते। मुझे लगता है कि अगर वे बच्चे भी यहां रुकते हैं तो जिस तरह का हम लोग यहां माहौल बनाए रखते हैं, प्रॉपर गाइड किया जाए तो अच्छा रिजल्ट दे सकते हैं। जैसा कि हमारे बच्चे ने किया, 705 नंबर पाया जो बनारस के इतिहास में अब तक सबसे ज्यादा संख्या है। '

छोटे-छोटे शहरों के इन बच्चों की सफलता की ये उड़ान उन बच्चों में भी कुछ करने का ज़ज़बा भर रही है जो अभाव में टूटने की कगार पर पहुंच जाते हैं। कहते हैं कि अगर सच्ची लगन और हौसला हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं है। नीत की परीक्षा में अव्वल रेटेड हासिल करने वाले बच्चे इस बात को पूरी तरह से चरितार्थ कर रहे हैं। वे यह भी बता रहे हैं कि किसी बड़े शहर की कोचिंग में नहीं बल्कि बनारस जैसे शहर में भी पढ़कर बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।



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