Thursday, November 26, 2020
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मुख्य आरोपी धीरेंद्र सिंह को लखनऊ से एसटीएफ ने दबोचा


बलिया हत्याकांड में फरार मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह (वीडियो ग्रैब)

बलिया हत्याकांड में फरार मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह (वीडियो ग्रैब)

बलिया शूटआउट: जानकारी के अनुसार 50 हजार के इनामी धीरेंद्र सिंह को एसटीएफ ने लखनऊ के जमानियां पार्क के पास उठाया है। अब तक इस मामले में पुलिस ने कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें से चार नामजद हैं और पांच अन्य शामिल हैं।

  • News18Hindi
  • आखरी अपडेट:
    18 अक्टूबर, 2020, 11:34 AM IST

लखनऊ। उत्तर प्रदेश (उत्तर प्रदेश) के बलिया (बलिया) में कोटे की दुकान के आवंटन को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बुलाई गई खुली बैठक में एक शख्स की गोली मारकर हत्या के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी धीरेंद्र सिंह (दिलेन्द्र सिंह) को एसटीएफ ( एसटीएफ) ने राजधानी लखनऊ (लखनऊ) से दबोचा है। जानकारी के अनुसार 50 हजार के इनामी धीरेंद्र सिंह को एसटीएफ ने लखनऊ के जमानियां पार्क के पास से उठाया है। अब तक इस मामले में पुलिस ने कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें से चार नामजद हैं और पांच अन्य शामिल हैं।

दो नामजद अभियुक्त और गिरफ्तार

पुलिस ने दो नामजद अभियुक्त और 50-50 हजार के इनामी संतोष यादव और अमरजीत यादव को भी गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही मुख्य आरोपी सहित छह लोगों के खिलाफ रासुका और गैंगस्टर के तहत भी कार्रवाई की है।

ग्रिराफ्टरी में शुरू की गई 12 टीमें हैंइससे पहले पुलिस उप महानिरीक्षक सुभाष चंद्र दुबे ने रेवती कांड के फरार आरोपियों के खिलाफ 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ रासुका व गैंगस्टर कानून के तहत कार्रवाई की घोषणा भी की है। इस मामले में पुलिस ने पहले दो आरोपियों देवेंद्र प्रताप सिंह व नरेंद्र प्रताप सिंह को गिरफ्तार किया था। घटना का मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह डब्ल्यू फरार चल रहा था। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 12 टीम गठित की हैं।

ये पूरा मामला है

बलिया जिले की ग्राम सभा दुर्जनपुर व हनुमानगंज की कोटे की दो दुकानों के आवंटन के लिए गुरुवार दोपहर को पंचायत भवन में खुली बैठक का आयोजन किया गया था। इसमें एसडीएम बैरिया सुरेश पाल, सीओ बैरिया चंद्रकेश सिंह और बीडीओ बैरिया गजेंद्र प्रताप सिंह के साथ ही रेवती थाने की पुलिस फोर्स मौजूद थी। दुकानों के लिए चार स्वयं सहायता समूहों ने आवेदन किया, जिसमें दो समूहों मां सायर जगदंबा स्वयं सहायता समूह और शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह के बीच दांव लगाने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने कहा कि वोटिंग वही होगा जिसके पास आधार या अन्य कोई पहचान पत्र होगा। एक पक्ष के पास आधार व पहचान पत्र मौजूद था, लेकिन दूसरे पक्ष के पास कोई आईडी प्रूफ नहीं था। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया है। मामला बिगड़ने को देखते हुए बैठक की कार्रवाई को स्थगित कर दिया गया। इस बीच दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि धीरेंद्र ने अपनी पिस्टल से फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें जयप्रकाश उर्फ ​​गामा पाल की गोली लगने से मौत हो गई।



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