Wednesday, December 7, 2022
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महिलाओं की आबादी की उपेक्षा करते हैं तो हमारी प्रगति अधूरी रहेगी-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में महिला सुरक्षा एवं अधिकारिता पर सम्मेलन का किया गया आयोजन
महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण बहुत महत्वपूर्ण

लखनऊ:

मुख्य सचिवों का दूसरा सम्मेलन जनवरी 2023 में नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसका विषय ’विकसित भारत-अंतिम मील तक पहुंचना’ है। सम्मेलन के लिए 12 उप-विषयों की पहचान की गई है। उत्तर प्रदेश को ’महिला सुरक्षा और अधिकारिता के लिए सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र बनाना’ उप-विषय के लिए अग्रणी राज्य के रूप में नामित किया गया है। इस उप-विषय के लिए 18 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के कार्य समूह का गठन किया गया है। महिला सुरक्षा और अधिकारिता के लिए सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर एक सम्मेलन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आज लखनऊ में आयोजित किया गया। द्वितीय मुख्य सचिव सम्मेलन के दौरान माननीय प्रधानमंत्री जी के समक्ष इस सम्मेलन की सीख और निष्कर्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा गया है। यदि हम महिलाओं की 50 प्रतिशत आबादी की उपेक्षा करते हैं तो हमारी प्रगति अधूरी रहेगी। उनकी सुरक्षा और सशक्तिकरण बहुत महत्वपूर्ण है और यह दिन भर चलने वाली कार्यशाला सर्वाेत्तम व्यावहारिक समाधानों पर ध्यान केंद्रित करेगी जिन्हें महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए अपनाया जा सकता है।
सम्मेलन के दौरान मुख्य सचिव ने स्कूली शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम में लिंग के अनुकूल पाठ्यक्रम के विकास के माध्यम से बचपन से ही बच्चों में मूल्यों और नैतिकता को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी और निगरानी का उपयोग करके डार्क स्पॉट्स की पहचान करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं और लड़कियों के सार्वजनिक स्थानों जैसे स्कूल, पार्क, मॉल में छेड़छाड़ और उत्पीड़न को कम करने में एंटी रोमियो स्क्वॉड का उदाहरण भी साझा किया। उन्होंने मिशन शक्ति के बारे में भी बात की और कहा कि इस योजना से फर्क पड़ रहा है।
सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती अनामिका सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने कार्यशाला की तैयारी के अंतर्गत नवंबर माह में ही संबधित विभागों एवं हितधारकों के साथ बैठकों का आयोजन किया जिसमें महिला सुरक्षा से संबन्धित मुद्दों, चुनौतियों एवं सुझावों को शामिल किया गया। उन्होंने महिला सुरक्षा को मजबूत करने, महिला केंद्रित विधान, महिलाओं के लिए उपकरण और योजनाएं और सामाजिक व्यवहार परिवर्तन पर ध्यान देने के साथ समुदाय और नागरिक जुड़ाव को मजबूत करने पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें कार्य समूह के वरिष्ठ अधिकारियों ने सर्वाेत्तम प्रथाओं, चुनौतियों, मुद्दों को साझा किया और महिला सुरक्षा तथा अधिकारिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने पर बल दिया।
निदेशक, महिला कल्याण श्री मनोज राय ने कहा लिंग अनुकूल वातावरण की कमी, अभियोजन की कम दर और कानूनी प्रणाली में जटिलताएं, कठोर पितृसत्तात्मक मानदंड, लैंगिक रूढ़िवादिता, आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की कम भागीदारी और श्रम शक्ति प्रमुख चुनौतियां हैं।
यूनिसेफ फील्ड ऑफिस उत्तर प्रदेश के प्रमुख डॉ. जकारी एडम ने कहा कि बचपन से ही हमें महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। हम यह सुनिश्चित करें कि बचपन से ही कोई लैंगिक भेदभाव और लिंग आधारित हिंसा न हो। किशोरों की शक्ति का भी हमें एहसास है, वे बच्चों के लिए रोल मॉडल हो सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के एडीजी डॉ. आशुतोष पांडे ने अभियोजन संबंधी हस्तक्षेपों और सर्वाेत्तम प्रथाओं को बढ़ाने में यूपी के काम को प्रस्तुत किया, जिसने पूरे भारत में सजा दर में प्रथम स्थान हासिल करने में भी योगदान दिया है।
सचिव एमडब्ल्यूसीडी भारत सरकार श्री इंदेवर पांडे ने अभियोजन दर बढ़ाने के लिए यूपी पुलिस/अभियोजन विभाग की पहल की भी सराहना की। खासकर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में। उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा जिला स्तरीय हब से महिला सशक्तिकरण हब को ब्लॉक स्तर तक भी ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा और अधिकारिता से संबंधित विभिन्न योजनाओं की अधिक प्रभावी निगरानी के लिए मिशन शक्ति के लिए व्यापक पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा।
सम्मेलन में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव, मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और 18 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, अंडमान और निकोबारद्वीप, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, केरल, लद्दाख, मध्यप्रदेश, नागालैंड, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश) के अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिवों ने भाग लिया।

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