Sunday, September 20, 2020
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महाराष्ट्र: १० 2020४ किसानों ने आत्महत्या की, जन्नत से लेकर २०२० तक आत्महत्या की – महाराज ने औसतन ६ किसान रोज़ कर आड़ेमहेडाया, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना


महाराजा में औसतन 6 किसान रोज़ कर रहे आ्रेडमहेडया, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

महाराज की मंन इस साल जनवरी से जून के बीच 1074 किसानों की आत्महत्या की है (प्रतीकात्मक फोटो)

मुंंबई:

महाराष्ट्र (महाराष्ट्र) में किसानों की परेशानियां बरकरार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस साल जनवरी से जून महीने के बीच महाराष्ट्र में हर रोज़ औसतन 6 किसानों ने आत्महत्या (किसानों की आत्महत्या) की है। जिसके बाद अब सरकार के कदमों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। नासिक के दिंडोरी में रहने वाले दत्तात्रय लमड़ेपे की खेती करते थे। उन पर 9 लाख रुपये का कर्ज था। उम्मीद थी कि इस बार फसल अच्छी होने पर कर्ज़े की कुछ राशि को वापस लौटा देंगे लेकिन फसल खराब होने और बाद में लॉकडाउन में काम का कोई दूसरा विकल्प नहीं होने से तंग आकर दत्तात्रय ने खुदकुशी कर ली .. परिवारवाले अब सरकार से मदद की गुहार डाल रहे हैं ..

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दत्तात्रय के बेटे ने बताया, 'खेत में फसल नहीं उगती, उसी समय लॉकडाउन शुरू हो गया।हम मजदूरी कर किसी तरह काम कर रहे थे लेकिन बैंक की ओर से बार-बार नोटिस दिया जा रहा था जिससे परेशान होकर मेरे पिता ने आत्महत्या की। ली। उम्मीद है सरकार हमारी कुछ सहायता करेगी। महाराजा में हाल के समय में किसानों की आकृतमहेडया के कई मामलों में से यह एक है। राज्य में इस साल जनवरी से जून के बीच 1074 किसानों की आत्महत्या रिकॉर्ड की गई है यानी रोज़ाना औसतन 6 किसानों ने जान दी है। किसान नेताओं के अनुसार आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं तो वहीँ इस मामले में विपक्ष भी सरकार को घेरता नज़र आ रहा है।

किसान नेता किशोर तिवारी कहते हैं, 'कोरोना का असर कृषि और ग्रामीण अर्थवचनतंत्र पर प्रभाव पड़ रहा है। जैसे ही खर्च बढ़ेगा, किसानों की आत्महत्या और विकास की आशंका है। जरूरत इस बात की है कि सरकार किसानों की पूरी कर्जमाफी कर दे। ' बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, राज्य सरकार इस मामले को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है। कोरोना के दौरान सरकार की ओर से आर्थिक मदद नहीं मिलने से किसान आत्महत्या कर रहे हैं। सलाहकार ने कहा है कि किसान तत्काल 50 हज़ार करोड़ की आर्थिक पैकेज दे। '

महाराष्ट्र चुनाव के समय और उसके बाद सभी पार्टी के नेता किसानों के मुद्दों को उठाते नज़र आए थे, लेकिन देश के 'अन्नान्टर्स' की परेशानी अब भी बरकरार है। हालांकि सरकार ने कहा है कि हालात में सुधार के लिए जो भी ज़रूरी होगा वह होगा। ' राहत और पुनर्वास मंत्री विजय वेटटेवार बताते हैं, 'पिछले 6 महीने में हमने बैंकों से किसी भी किसान के दरवाजे पर कर्ज की राशि नहीं को कहा। हालांकि इस साल भी किसानों की आत्महत्या जारी हुई है। साल की फसल के दाम भी अच्छे दिए गए हैं। गए हैं, इसके बावजूद मामले बढ़ रहे हैं इस पर जल्द ही काउंटर में चर्चा की जाएगी। '

(आकृतमह्रेडय किसी समसया का समाधान नहीं है। अगर आपको सहारे की जरूरत है या आप किसी ऐसे शख्स को जानते हैं, जिसकी मदद की दरकार है तो: अपने नजदीकी मानसिक स्वास्तथ विशेषज्ञ के पास जाएं।)

(अगर आपको सहायता की ज़रूरत है या आप किसी ऐसे शख्स को जानते हैं, जिसकी मदद की दरकार है, तो) अपने दृष्टिकोणदीकी मानसिक स्वास्तथ विशेषज्ञ के पास जाएं)

हेल्पलाइन:
1) वंद्रेवाला फाउंडेशन फॉर मेंटल हेलनाथ: 1860-2662-345 / 1800-2333-330 (24 घंटे उपलब्ध)
2) ऊतक iCall – 022-25521111 (सोमवार से शनिवार तक का समय – सुबह 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक)



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