Wednesday, April 14, 2021
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मथुरा: सूरदास की तपोस्थली का नाम बदल, महमदपुर बना परसौली


गोवर्धन तहसील के निकट स्थित महाकवि सूरदास की तपस्थली महमदपुर गांव का नाम अब राजस्व रिकॉर्ड में भी परसौली माना जाएगा। इस संबंध में सूरदास ब्रज रासस्थली विकास समिति परसौली पिछले चार दशक से परिवर्तन की मांग करती चली गई थी। अब सरकार द्वारा इसे मंजूर कर लिया गया है।

सरकार द्वारा इसकी अधिसूचना जारी करने की जानकारी मिलते ही विगत रोज गांववासी झूम उठे। गांव में मिठाई बांटी गई और खुशियां मनाई गई। इसके लिए सभी ग्रामवासी सूरदास ब्रज रासस्थली विकास समिति परसौली के सचिव हरिबाबू कौशिक की अगुआई में 40 साल से प्रयासरत थे।

राधा कृष्ण की रासस्थली और उनके अनीष प्रेम के साक्षी इस गांव का मौलिक नामकरण करने से गांववासी बेहद खुश हो गए हैं। राजस्व विभाग ने विगत 24 मार्च को इसकी अधिसूचना जारी की थी। इसकी प्रतिलिपि द्वारा कौशिक ने बताया कि वे वर्ष 1982 से इसके लिए अब तक के सभी मुख्य कार्यकर्ताओं से मांग करते चले आ रहे थे। कई मुख्य लोगों ने आश्वासन भी दिया लेकिन उन्होंने वादा पूरा नहीं किया। वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2018 में मांग किए जाने पर कार्रवाई शुरू कर दी और भारत सरकार के सभी विभागों से अनापत्ति के बारे में विगत 24 मार्च को राज्यपाल की ओर से अधिसूचना भी जारी कर दी।

राजस्व परिषद की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट मथुरा के 12 फरवरी 2019 के प्रस्ताव पर राहत आयुक्त एवं सचिव ने 15 सितंबर 2020 को संस्तुति पर भूमि प्रबंधक समिति ने उक्त राजस्व ग्राम का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया है। ।

जिस पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने भी 11 फरवरी को नाम परिवर्तन पर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया। जिसके बारे में अब नाम परिवर्तन का गजट होने के पश्चात अधिसूचना की किसी बात का प्रभाव, किसी न्यायालय, जो राजस्व ग्राम के संबंध में अब अधिकारिता का प्रयोग करता रहा है, में पहले ही प्रारंभ की गई थी या लंबित किसी भी विवेचना विभाग पर भी। नहीं होगा। राजस्व विभाग द्वारा इसकी एक प्रति सूरदास ब्रज रासस्थली विकास समिति परासौली के सचिव हरिबाबू कौशिक को भी भेजी गई है।

उन्होंने बताया कि इस गांव का नाम ऋषि पाराशर की जन्मस्थली के कारण परसौली पड़ा था। वहीं बल्लभाचार्य के अनुसार भगवान कृष्ण और राधारानी ने यहां चंद्र सरोवर के निकट ब्रह्मा जी के एक क्षण यानि छह मास तक रास किया था। जिससे इस स्थली का माहात्म्य बढ़ गया। कलियुग में भी महाकवि सूरदास की कर्मस्थली के रूप में विख्यात होने के बाद यह गांव साहित्य और संस्कृति की दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो गया है। महाकवि की सभी प्रमुख रचनाओं ने यहीं आकार पाया, लेकिन यह इसके बावजूद यह गांव सरकारी तौर पर उत्थान ही रहा। दुर्भाग्यवश मुगल काल में एक बार इसका नाम बदलकर महमूदपुर कर दिया तो आज़ादी के सात दशक के बाद भी सरकारों का ध्यान इस ओर नहीं गया। अब नाम बदल दिया गया है।

पूर्व में फरह रेलवे स्टेशन का बदला जा चुका नाम है
जनपद में इससे पूर्व फरह रेलवे स्टेशन का नाम बदला जा चुका है। फरह के करीब ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली दीनदयाल धाम है। सरकार ने इसीलिए इस स्टेशन का नाम 3 जुलाई 2017 को बदलकर दीनदयाल धाम स्टेशन कर दिया था।



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