Tuesday, January 31, 2023
HomeIndiaमतदाताओं का भरोसा और हितधारकों का विश्वास जरूरी

मतदाताओं का भरोसा और हितधारकों का विश्वास जरूरी

चुनावी प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी के समावेश के लिए मतदाताओं का भरोसा और हितधारकों का विश्वास जरूरी: निर्वाचन आयुक्त  नूप चंद्र पाण्डेय

निर्वाचन आयुक्त  नूप चंद्र पाण्डेय ने आज भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ‘प्रौद्योगिकी का उपयोग’ और ‘चुनावों की निष्पक्षता’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह की अध्यक्षता की। यह भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ‘चुनावों की निष्पक्षता’ पर एक समूह के तत्वाधान में आयोजित किया जाने वाला दूसरा ऐसा सम्मेलन था, जिसे समिट फॉर डेमोक्रेसी- ईयर ऑफ एक्शन प्रोग्राम के अंतर्गत गठित किया गया था।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001M6D9.jpg

समापन समारोह में अपने संबोधन में निर्वाचन आयुक्त श्री अनूप चंद्र पाण्डेय ने चुनाव प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी द्वारा निभाई गई सकारात्मक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “प्रौद्योगिकी के समावेशन के साथ ही जटिल चुनावी प्रबंधन प्रक्रियाओं को सरल और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। इस प्रकार प्रौद्योगिकी में उन्नयन प्रक्रियाओं को गति दे सकता है और चुनाव प्रबंधन में शामिल कार्यभार को भी कम कर सकता है। आज कई देशों में, चुनावी प्रबंधन निकाय (ईएमबी) द्वारा प्रौद्योगिकी को त्रुटियों की संभावना को कम करने के एक साधन के रूप में देखा जाता है, न कि केवल समस्या के समाधान के लिए एक उपकरण के रूप में।

श्री पाण्डेय ने जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रियाओं को बचाने और उनका समर्थन करने के संघर्ष में एक नया मोर्चा खोल दिया है। हालांकि उन्होंने कहा कि साइबर हमले और सूचनाओं को प्रभावित करने वाले अभियान चुनाव के बुनियादी ढांचे और चुनाव की निष्पक्षता की धारणाओं के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न कर रहे हैं।  निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि चुनाव प्रबंधन निकायों (ईएमबी) को सुगम नागरिक भागीदारी और चुनावों में प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग की आवश्यकता है।

श्री पाण्डेय ने कहा कि चुनावी प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी के समावेश के लिए मतदाताओं का भरोसा और हितधारकों का विश्वास जरूरी है। निर्वाचन आयुक्त ने अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए ज्ञान, अनुभव और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को साझा करने के माध्यम से चुनाव प्रबंधन निकायों के एक साथ आने की आवश्यकता को रेखांकित किया। श्री पाण्डेय ने कहा कि हमें नियमित रूप से व्यवस्थित तरीके से ज्ञान साझा करने के माध्यम से चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image0026U7L.jpg

पिछले दो दिनों के दौरान, तीन सत्रों में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। कल चुनाव प्रशासन के लिए प्रौद्योगिकी‘ पर पहले आयोजित सत्र में प्रतिभागियों ने चुनाव प्रशासन के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग में लाभ और चुनौतियों दोनों पर प्रकाश डाला। यह भी बताया कि प्रौद्योगिकी को उपयोग में लाने में लगातार आने वाली समस्या संसाधनों की कमी है;  और सोशल मीडिया एक ओर ऐसी दोधारी तलवार है, जिसके लाभ और हानि समान मात्रा में हैं। आर्मेनिया, ऑस्ट्रेलिया, क्रोएशिया और जॉर्जिया के ईएमबी की प्रस्तुतियों में भ्रामक सूचना, फर्जी कंटेंट से निपटने और विश्वसनीय संसाधनों के जरिये सत्यापन की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।

कल सम्पन्न दूसरे सत्र में ‘समावेशी चुनावों के लिए प्रौद्योगिकी समाधान‘ पर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस और अंगोला तथा फिलीपींस के चुनाव प्रबन्धन निकायों द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं। इस बात पर प्रकाश डाला गया कि ईएमबी को समावेशी तरीके से प्रौद्योगिकी को शामिल करने का प्रयास करने के साथ ही अंतर्निहित पूर्वाग्रहों से भी अवगत होना चाहिए। प्रस्तुतियों में अधिक भागीदारी के लिए गौण और स्वदेशी भाषाओं में उपलब्ध प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों के लिए सूचना निर्देशिका बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

जॉर्जिया के उपाध्यक्ष और मुख्य निर्वाचन आयुक्त और न्यायाधिकरण वरिष्ठ (ट्रिब्यूनल   सुपीरियर) डी जस्टिसिया इलेक्टोरल, पैराग्वे के उपाध्यक्ष/ मंत्री ने ‘सहायक के रूप में प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल क्षेत्र की चुनौतियां’ पर तीसरे सत्र की सह-अध्यक्षता की। इस सत्र में इंडोनेशिया और निर्वाचन व्यवस्थाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय संस्थान (इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स– आईएफईएस) की प्रस्तुतियां थीं। आईएफईएस के श्री मैट बेली ने चुनावों के लिए भ्रामक सूचना/निगरानी/साइबर सुरक्षा खतरे, निकट भविष्य में कैसे सामने आएंगे, और इनके लिए ईएमबी किस प्रकार तैयार रह सकते हैं, पर ध्यान केंद्रित किया। केपीयू, इंडोनेशिया की आयुक्त सुश्री बेट्टी एप्सिलॉन इड्रोस ने आगामी 2024 के चुनाव के लिए देश में डिजिटल बदलाव को गति देने सहित निर्वाचन के डिजिटलीकरण का रोडमैप दिया।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image00338QF.jpg

अंगोला, अर्मेनिया, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, चिली, क्रोएशिया, फिजी, जॉर्जिया, इंडोनेशिया, किरिबाती, मॉरीशस, नेपाल, पैराग्वे, पेरू, फिलीपींस और सूरीनाम सहित 16 देशों/चुनाव प्रबन्धन निकायों से 40 से अधिक प्रतिभागियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों अर्थात् आईएफईएस और आईडीईए ने  इस सम्मेलन में भाग लियाI  इसके अलावा नई दिल्ली स्थित आठ विदेशी मिशनों के प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में भाग लिया।

‘ समावेशी चुनाव और चुनाव की निष्पक्षता’ पर तीसरा सम्मेलन मार्च, 2023 की शुरुआत में लोकतंत्र के दूसरे शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आयोजित किया जाएगा, जो 29-30 मार्च 2023 के लिए निर्धारित है, और कोस्टारिका की सरकारों द्वारा सह-मेजबानी की जाएगी। रिका, कोरिया गणराज्य, नीदरलैंड, जाम्बिया और संयुक्त राज्य अमेरिका (यू.एस.) की सरकारों द्वारा इसे संयुक्त रूप से आयोजित किया जाएगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments