Saturday, January 16, 2021
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भारत से बहुत अच्छे संबंध का जिक्र कर नेपाली पीएम केपी ओली का चीन को संदेश- हमें अपनी आजादी पसंद, दखल मंजूर मैं


नेपाल में जारी इंट सियासी उथल-पुथल के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को एक ओर जहां भारत के साथ संबंधों को ‘बहुत अच्छा’ बताया, वहीं चीन को भी सख्त लहजे में संदेश दिया कि वह किसी और के आदेशों पर विश्वास नहीं करती है। । बीते कुछ समय से नेपाल की राजनीति में चीन की हस्तक्षेपलअंदाजी पर हुए नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सख्त लहजे में कहा कि हमें अपनी स्वतंत्रता से प्यार करते हैं, हमें अपनी आजादी पसंद है। हम दूसरों के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं … हम स्वतंत्र रूप से अपने मामलों पर निर्णय लेते हैं। हम बाहरी हस्तक्षेप नहीं चाहते हैं।

भारत और नेपाल में अच्छे संबंध हैं
भारतीय चैनल के इस इंटरव्यू को द काठमांडू पोस्ट की वेबसाइट ने छापा है और शीर्षक रखा है- क्या ओली ने एक तीर से दो शिकार किए? नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली ने इंटरव्यू के दौरान कहा कि वर्ष 2021 एक ऐसा साल होगा जब हम यह ऐलान कर सकते हैं कि नेपाल और भारत के बीच कोई समस्या नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि नेपाल भारत के साथ रिश्‍ते बहुत अच्‍छे हैं। दोनों देशों के बीच ये संबंध इतने अच्छे हैं जितने पहले कभी नहीं रहे हैं। इसके अलावा, ओली ने सख्त लहजे में कहा कि कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा नेपाल के हैं और नेपाल और भारत के बीच “यह एकमात्र छोटी समस्या है”।

एक तीर से दूसरा शिकार
काठमांडू पोस्ट ने लिखा, सत्तारूढ़ नेपाल कम सबकुनिवादी पार्टी के केपी ओली के पक्ष वाले एक नेता ने कहा कि यह इंटरव्यू ओली की सोची समझी रणनीति का पतन है। इससे उन्होंने एक तीर से दो शिकार किए हैं। एक ओर उन्होंने नेपाली राष्ट्रवाद का जिक्र कर नेपाली लोगों को संतुष्ट करने की कोशिश की, दूसरे उन्होंने यह बताया कि वह दिल्ली के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं और वह भारत के साथ कोई झूठ नहीं चाहते हैं।

भारत के साथ हैं नेपाली पी.एम.
इसके अलावा, नाम न जाहिर होने की शर्त पर सेंट्रल कमेटी के एक सदस्य ने कहा कि केपी शर्मा ओली ने अपने इस इंटरव्यू के माध्यम से नेपाल के लोगों को यह संदेश दिया है कि वह भारत के साथ हैं। साथ ही क्योंकि उन्होंने नेपाल में चुनाव की घोषणा कर दी है, उन्हें समर्थन की जरूरत है। गौरतलब है कि केपी शर्मा ओली का यह इंटरव्यू ऐसे वक्त में आया है, जब नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवली 14 जनवरी को भारत दौरे पर आ रहे हैं।

संप्रभुता से समझौता नहीं
नेपाल के विदेश मंत्री के नए दिल्ली के दौरे से पहले नेपाल के प्रधानमंत्री के। पी। शर्मा ओली ने कहा है कि भारत या चीन के साथ संबंधों में उनका देश संप्रभुता की बराबरी से समझौता नहीं करेगा। विदेश मंत्री के दौरे में सीमा गतिरोध पर वार्ता केंद्रित रहने की उम्मीद है। ओली ने कहा, ‘हम चीन या भारत के क्षेत्र पर दावा करने की स्थिति में नहीं हैं। लेकिन हम अपने दोस्तों के साथ अपने क्षेत्रों पर दावा जरूर करेंगे। पिछले साल ओली सरकार ने एक नया राजनीतिक मानचित्र जारी कर तीन भारतीय क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बताया था जिसके बाद सीमा गतिरोध जारी हो गया था।

भारत-चीन के बीच समधना की पेशकश
ओली ने भारत और चीन के बीच जारी विवाद का समाधान प्रदान करने की भी पेशकश की। ओली ने कहा, ‘अगर हम उनकी सहायता करने में मददगार साबित हो सकते हैं तो हम तैयार हैं।’ घरेलू राजनीतिक प्रशासन जिस कारण उन्हें प्रतिनिधित्व करने को समझाने की सिफारिश की पड़ी थी, ओली ने पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड को सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया। ओली ने यह भी दावा किया कि भारत के कुछ तत्व उन्हें पद से हटाने के लिए साजिश रच रहे हैं लेकिन नेपाल की व्यापक राजनीति में चीन का हाथ होने से उन्होंने इंकार किया।



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