Thursday, January 21, 2021
Home World भारत चीन गतिरोध: चीनी वैज्ञानिकों का दावा है कि भारत में कोरोनोवायरस...

भारत चीन गतिरोध: चीनी वैज्ञानिकों का दावा है कि भारत में कोरोनोवायरस की उत्पत्ति हुई है – लद्दाख में चारों ओर खाने वाले पक्षी ड्रैगन झूठ बोल रहे हैं, चीनी वैज्ञानिक बोले


भारत से पूर्वी लद्दाख में महीनों से जारी सीमा विवाद में मुंह की खाने के बाद चीन की बौखलाहट समय-समय पर सामने आती है। हाल ही में चीनी वैज्ञानिकों ने ऐसा एक दावा किया है, जिससे उल्टा उसका ही मजाक उड़ाने लगा है। दरअसल, चीनी वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोनावायरस भारत से निकलकर पूरी दुनिया में फैला हुआ था। गौरतलब है कि पूरी दुनिया को पता है कि पिछले साल कोरोनावायरस का पहला मामला चीन के वुहान शहर में सामने आया था और फिर से दुनिया के अन्य देश महामारी की चपेट में आ गए।

चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज की टीम का कहना है कि संभावना है कि साल 2019 में वायरस (को विभाजित -19 वायरस) सबसे पहले भारत में गर्मी के मौसम में सामने आ गया। वुहान पहुंचने से पहले वायरस भारत में किसी जानवर से दूषित पानी के जरिए इंसान में गया था। डेली मेल के अनुसार, चीनी वैज्ञानिकों के दावे को ब्रिटेन के एक्सपर्ट्स ने खारिज कर दिया है। ग्लासगो यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट डेविड रॉबर्टसन ने चीनी वैज्ञानिकों की रिसर्च को दोषपूर्ण बताते हुए कहा है कि इससे कोरोनावायरस को लेकर समझ में बिल्कुल भी सुधार नहीं हुआ है।

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब दुनिया में कोरोनावायरस पर घिरे चीन ने दूसरे देशों पर उंगली उठाई हो। इससे पहले भी चीन इटली और अमेरिका पर कोरेना वायरस को लेकर बिना किसी सबूत के आरोप लगाया गया है। वहीं, डब्ल्यूएचओ भी कोरोना के सृजन होने की जानकारी जुटा रहा है। चीन ने भारत पर यह आरोप तब लगाया है, जब दोनों देशों के बीच लद्दाख में सीमा को लेकर तनावपूर्ण स्थिति जारी है।

यह भी पढ़ें: भारत-नेपाल के रिश्ते सुधरते देख बढ़ी चीन की बेचैनी, उठा रहा यह कदम

चीनी वैज्ञानिकों ने कहा कि क्या होगा?

रिसर्च पेपर के लिए चीनी टीम ने फिलोगेनेटिक विश्लेषण (वायरस के म्यूटेट होने की स्टडी) का सहारा लिया है। सभी कोशिकाओं की तरह वायरस भी म्यूटेट होता है। वैज्ञानिकों का तर्क है कि जिनका सबसे कम म्यूटेशन हुआ, उनके जरिए से वायरस के वास्तविक स्रोत का पता लगाया जा सकता है। चीनी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इस मेठड का इस्तेमाल करने के बाद वुहान मूल स्रोत नहीं मिला है। इसमें बांग्लादेश, अमेरिका, ग्रीस, ऑस्ट्रेलिया, भारत, इटली, चेक गणराज्य, रूस और सर्बिया जैसे देशों के नाम सामने आए हैं। रिसर्चर्स का तर्क है कि चूंकि भारत और बांग्लादेश दोनों देश सबसे कम म्यूटेशन के नमूने दर्ज करते हैं और भौगोलिक पड़ोसी भी हैं, इसलिए संभावना है कि सबसे पहले ट्रांसमिशन वहां हुआ हो। अनुसंधान में वैज्ञानिकों का दावा है कि यह जुलाई और अगस्त 2019 में पहली बार पाया गया था।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

मंडी भाव: तेल-तिलहन की कीमतों में नरमी बरकरार, तुअर के दाम में कमी, उड़द तेजी

विदेशी विमानों में गिरावट के रुख के बीच दिल्ली तेल तिलहन बाजार में बुधवार को बिनौला, सोयाबीन और पामोलीन तेल की कीमतों में...

दिल्ली में 6 जनवरी से अब तक 1200 से ज्यादा पक्षियों की मौत, लेकिन …

ठंड की वजह से भी पक्षियों की मौत हुई है। (प्रतीकात्मक चित्र)खास बातेंदिल्ली में बर्ड फ्लू का मामला1200 से अधिक पक्षियों की...

Recent Comments