Monday, January 18, 2021
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बजट 2021: नए TAX लागू करने से, विवादों के समाधान का निष्पक्ष प्रयास: एसबीआई रिपोर्ट


मोदी सरकार को आगामी आम बजट में नए कर लगाने से बचना चाहिए और पुराने विवादों में फंस कर मामलों को निपटाने के लिए ईमानदारी से प्रयास किए जाने चाहिए। एसबीआई अर्थशास्त्रियों ने मंगलवार को यह बात कही। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि को विभाजित 19 महामारी से सबक लेना होगा और स्वास्थ्य क्षेत्र में ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त खर्च करना होगा। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान इस क्षेत्र में जीडीपी का केवल एक प्रतिशत ही खर्च किया।

बजट में कोई नया काम नहीं होना चाहिए

इन अर्थशास्त्रियों ने एक नोट में कहा है, ” एक सुझाव है। बजट में कोई नया काम नहीं होना चाहिए। हमें कर अवकाश वाला बजट पेश करना चाहिए जिसमें त्वरित वित्तीय सहयोग के लिए सावधानी पूर्वक तैयार की गई नीतियों को शामिल किया जाना चाहिए। बजट में एक बड़ा कदम यह हो सकता है कि सरकार कर विवाद के मामलों को हमेशा के लिए निपटाने का ईमानदारी से प्रयास करे।

9.5 लाख करोड़ रुपये का कर विवादों में फंसा है

इन अर्थशास्त्रियों के मुताबिक वित्त वर्ष 2018- 19 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कुल मिलाकर 9.5 लाख करोड़ रुपये का कर विवादों में फंसे हुए हैं।) इसमें 4.05 लाख करोड़ रुपये निगम कर और 3.97 लाख करोड़ रुपये शिशु का था। इसी तरह 1.54 लाख करोड़ रुपये के वस्तु एवं सेवा कर के मामले विवाद में थे। नोट में संकेत दिया गया है कि को विभाजित 19 टीकाकरण के लिए कोई उपकर लगाया जा सकता है। कहा गया है कि ऐसे उपकार को केवल एक वर्ष के लिए ही रखा जाना चाहिए। वहीं वरिष्ठ नागिरकों के लिए बचत में कुछ कर दिए जा सकते हैं। इसका राजकोषीय प्रभाव मार्जिन होगा।

राजकोषीय कार्य को कम करते ^ 5.2 प्रतिशत पर लाने पर जोर

केंद्र और राज्यों की राजकोषीय स्थिति के बारे में इसमें कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान केंद्र और राज्यों का कुल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 12.1 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसमें केंद्र सरकार का अकेले का राजकोषीय घाटा 7.4 प्रतिशत होगा। एक फरवरी को पेश होने वाले 2021- 22 के बजट में ऐसी उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्रालय का राजकोषीय कार्य को कम करते हुए 5.2 प्रतिशत पर लाने पर जोर रहेगा। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि नए बजट में खर्च में वृद्धि 6 प्रतिशत तक सीमित रखी जाएगी। प्राप्तियों में 25 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखा जा सकता है। ऋवेश से सकल प्राप्ति का लक्ष्य दो लाख करोड़ रुपये रखा जा सकता है।

नोट में कहा गया है कि राज्यों की वित्तीय स्थिति भी तनाव में है। हालांकि उनकी स्थित शुरुआत में जताई गयी आशंकाओं से कुछ बेहतर दिखती है। जीएसटी के तहत केंद्र से राज्यों को किए जाने वाले भुगतान का आंकड़ा 25,000 करोड़ रुपये रह सकता है। यह मानता है कि आईजीएसटी के तौर पर संग्रह राशि का 50 प्रतिशत मार्च 2021 तक राज्यों को मिलाकर कर दिया जाएगा। इसके बाद यह वित्त वर्ष कुल मिलाकर राज्यों के लिए तीन लाख करोड़ रुपये के कर राजस्व की कमी के साथ समाप्त होगा। बैंकिंग क्षेत्र के बारे में इस नोट में कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकार की भागीदारी को भुकर 51 प्रतिशत पर लाने के लिए सरकार को स्पष्ट योजना तैयार करनी चाहिए। साथ ही बैंकों के लिए कराधान पर भी स्पष्टता होनी चाहिए।



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