Thursday, August 18, 2022
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पूर्व सपा सांसद हरमोहन यादव की पुण्यतिथि गोष्ठी में PM नरेंद्र मोदी करेंगे शिरकत, क्या हैं सियासी मायने? – pm modi to participate in death anniversary of samajwadi leader harmohan singh yadav know political equation


लखनऊ: 2014 से विजय रथ पर सवार भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने विस्तार का कोई भी मौका छोड़ नहीं रही है। अब उसकी नजर समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष के वोटों की बची पूंजी साधने पर है, जिससे 2024 में भी अजेय रह सके। सोमवार को कानपुर में सपा के पूर्व राज्यसभा सांसद चौधरी हरमोहन सिंह यादव (Harmohan Singh Yadav) की पुण्यतिथि पर आयोजित गोष्ठी में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की हिस्सेदारी इसी कवायद का हिस्सा माना जा रहा है।

सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के गाढ़े वक्त के साथी रहे चौधरी हरमोहन सिंह यादव और उनका पूरा परिवार सपा के लिए खास रहा है। हरमोहन का निधन 2012 में हुआ था और सोमवार को उनकी दसवीं पुण्यतिथि है। उनके बेटे और सपा के निवर्तमान राज्यसभा सांसद चौधरी सुखराम सिंह यादव ने गोष्ठी का आयोजन किया है। इससे पहले इस परिवार के हर व्यक्तिगत-सार्वजनिक आयोजन में मुलायम परिवार हिस्सा लेता रहा है, लेकिन इस बार खास मेहमान प्रधानमंत्री और भाजपा के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी हैं।

मोदी की भागीदारी इसलिए विशेष
2014 में यूपी से 73 सीटें जीतने वाली भाजपा ने 2017 और 2019 में यादव बेल्ट कहे जाने वाले इलाकों की कई सीटों पर कब्जा जमाया था। विश्लेषकों का आंकलन है कि पार्टी को कई जगहों पर सपा के कोर वोटर कहे जाने वाले यादवों ने भी समर्थन दिया था। खासकर, लोकसभा चुनाव में इसके संकेत साफ दिखे थे। बसपा के कोर वोट में सेंध लगा चुकी भाजपा अब यादवों को पार्टी से मजबूती से जोड़ने की संभावना पर काम कर रही है। हालांकि, यूपी में अब तक वह विपक्ष से कोई बड़ा यादव नेता नहीं जोड़ पाई है।

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विधानसभा चुनाव के पहले सुखराम के बेटे मोहित यादव भाजपा में शामिल हुए थे, लेकिन सुखराम इसे बेटे का निजी फैसला बता रहे थे। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद सुखराम पहले मोदी और फिर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मिले थे और सार्वजनिक तौर पर सरकार के कामकाज की तारीफ भी की थी। सपा नेतृत्व की ओर से उपेक्षा की ओर भी उन्होंने इशारा किया था। मोदी के आयोजन में शामिल होने से यह संदेश और मुखर होगा कि पार्टी-सरकार का शीर्ष नेतृत्व राजनीतिक मतभेदों और पहचान से इतर उनके सम्मान और योगदान को रेखांकित करने के लिए खड़ा है। संदेश नीचे तक गया तो पार्टी के लिए वोटों का धरातल और उर्वरा होगा, वहीं सपा की अपने कोर वोट बचाए रखने की चुनौती भी बढ़ेगी।

सहेजने और साधने की जारी हैं कोशिशें
अपना जनाधार बढ़ाने और यूपी के 8 से 9% यादव वोटों को अपने पाले में करने की भाजपा की कोशिशें पिछले पांच सालों से जारी हैं। 2017 में यूपी में तीन-चौथाई सीटें जीतने के बाद यह अभियान और तेज किया गया। उसी साल जुलाई में अमित शाह ने लखनऊ की बड़ी जुगौली में भोजन करने के लिए जिस बूथ अध्यक्ष का घर चुना वह यादव बिरादरी से ही थे। पार्टी ने युवा मोर्चे के कमान भी सुभाष यदुवंश के हाथ में दी थी। हाल में ही चौरीचौरा की निवर्तमान विधायक संगीता यादव को राज्यसभा तो सुभाष यदुवंश को विधान परिषद भेजा गया है। आजमगढ़ से दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ की जीत ने भी पार्टी को एक यादव चेहरा दिया है। पिछले साल चौधरी हरमोहन के 100वें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में भी प्रदेश सरकार व संगठन के कई चेहरे पहुंचे थे।

क्यों अहम है चौधरी हरिमोहन परिवार
चौधरी हरमोहन सिंह यादव सपा के संस्थापक सदस्यों में रहे हैं। तीन बार एमएलसी रहे हरमोहन को सपा ने दो बार राज्यसभा भी भेजा था। जब मुलायम सिंह यादव पहली बार सीएम बने तो हरमोहन का इतना रसूख था कि लोग उन्हें ‘मिनी सीएम’ कहते थे। संगठन और सरकार के फैसलों की जमीन अक्सर उनकी कोठी पर तैयार होती थी। 1984 के दंगों में सिख परिवारों को बचाने के लिए उन्हें ‘शौर्य चक्र’ से नवाजा गया था।

वह लंबे समय तक यादव अखिल भारतीय यादव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। अपने समाज में इस परिवार का काफी सम्मान है। हरमोहन के बेटे चौधरी सुखराम सिंह यादव की गिनती भी मुलायम के करीबी चेहरों में होती रही है। 2004 से 2010 तक सुखराम यूपी विधान परिषद के सभापति रहे। वहीं, इस महीने की 4 जुलाई तक सपा से राज्यसभा सांसद थे। सुखराम अखिल भारतीय यादव महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

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