Saturday, October 24, 2020
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पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर हथियारों से लैस चीनी सैनिकों ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर कहते हैं


विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बड़ी संख्या में बंदूकें से लैस चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत के समक्ष बहुत गंभीर सुरक्षा चुनौती है। जयशंकर ने कहा कि जून में लद्दाख सेक्टर में भारत-चीन सीमा पर हिंसक झड़पों का बहुत गहरा सार्वजनिक और राजनीतिक प्रभाव रहा है और इससे भारत और चीन के बीच रिश्तों में गंभीर रूप से उथल-पुथल की स्थिति बनी हुई है।

एशिया सोसाइटी की ओर से आयोजित ऑफ़लाइन कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा, सीमा के उस हिस्से में आज बड़ी संख्या में सैनिक (पीवी के) मौजूद हैं, वे बंदूकें से लैस हैं और यह हमारे सामने बहुत ही गंभीर सुरक्षा चुनौती है। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून को हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे जिनके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बहुत बढ़ गया था। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी के जवान भी हताहत हुए थे लेकिन उसने स्पष्ट संख्या नहीं बताई।

जयशंकर ने कहा कि भारत ने पिछले 30 वर्षों में चीन के साथ संबंध बनाए हैं और इस संबंध का आधार वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अमन-चैन रहा है। उन्होंने कहा कि 1993 से लेकर कई समझौते हुए हैं जिन्होंने कहा कि शांति और अमन-चैन की रूपरेखा तैयार की जाए, जिन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में आने वाले सैन्य वर्गों को सीमित किया, और यह निर्धारित किया कि सीमा का प्रबंधन कैसे किया जाए और सीमा पर तैनात सैनिक एक-दूसरे की तरफ बढ़ने पर कैसा बर्ताव बनाते हैं।

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जयशंकर ने कहा, 'इसलिए अवधारणा के स्तर से व्यवहार के स्तर तक, पूरी तरह से एक सीमा थी। अब हमने इस साल क्या देखा कि कंसोलिट्स की इस पूरी श्रृंखला को दरकिनार किया गया। सीमा पर चीनी वर्गों की बड़ी संख्या में तैनाती स्पष्ट रूप से इन सबके विपरीत है। उन्होंने कहा, '' और जब एक ऐसी टकराव का बिंदु आया जहां विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में सैनिक एक-दूसरे के करीब आए, तो 15 जून जैसी दुखद घटना घटी।

जयशंकर ने कहा, '' इस नृशंसता को ऐसे समझा जा सकता है कि 1975 के बाद जवानों की शहादत की यह पहली घटना थी। इसने बहुत गहरा सामाजिक राजनीतिक प्रभाव डाला है और रिश्तों में गंभीर रूप से उथल-पुथल मची है। सीमा पर चीन ने वास्तव में क्या किया और क्यों किया, इस प्रश्न के उत्तर में विदेश मंत्री ने कहा, '' मुझे वास्तव में कोई तर्कसंगत स्पष्टीकरण नहीं मिला है।

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एशिया सोसाइटी पॉलिसी पेपर के विशेष आयोजन में जयशंकर ने संस्थान के अध्यक्ष और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रड से बातचीत की। दोनों ने जयशंकर की नई पुस्तक 'द इंडिया वे: स्ट्रेटरीजस फॉर एन अनसर्टन वर्ल्ड पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2018 में वुहान शिखर वार्ता के बाद पिछले साल चेन्नई में इसी तरह की राशि वार्ता हुई थी और इसके पीछे उद्देश्य था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग साथ समय बिताएं, अपनी योजनाओं के बारे में एक-दूसरे के साथ सीधे बातचीत करें करें। जयशंकर ने कहा, '' इस साल जो हुआ, वह वास्तव में बड़ा विचलन था। यह न केवल बातचीत से बहुत अलग रुख था, बल्कि 30 साल में होने वाले संबंधों से भी बड़ा विचलन था।



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