Wednesday, April 14, 2021
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पूर्वांचल की तरफ गए किसान पंचायत, बरबकी के बाद कल गोरखपुर के पास जुटेंगे किसान


पूर्वांचल की तरफ गए किसान पंचायत, बरबकी के बाद कल गोरखपुर के पास जुटेंगे किसान

KIsan पंचायत से छोटे किसानों को भी जोड़ने की मुहिम चला रही भारतीय किसान यूनियन (फाइल)

लखनऊ:

भारतीय किसान संघ अब किसान आंदोलन (किसान आन्दोलन) को महापंचायतों (महापंचायत) के जरिये पश्चिम उत्तर प्रदेश से पूर्वी उत्तर प्रदेश यानी पूर्वांचल (पूर्वांचल) ले जाने की तैयारी में जुट गई है। इस कवायद में पहले किसान पंचायत बुधवार को बाराबंकी में हुई और गुरुवार को गोरखपुर के पास बस्ती में एक पंचायत होगी। किसान यूनियनों का कहना है कि पूर्वांचल के किसान ट्रेनें बंद होने से आंदोलन स्थल तक पहुंच सकते हैं, इसलिए पंचायतों के जरिये उन्हें किसान आंदोलन से जोड़ा जाएगा।

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बाराबंकी में हुई पंचायत में आसपास के कई जिलों के किसान अपने नेताओं की बात सुनने पहुंचे। यहां नरेश टिकैत ने किसानों को बताया कि नए कृषि कानूनों से छोटे किसानों को बहुत नुकसान होगा। नरेश टिकैत ने कहा, हमें छोटे किसानों को बचाना है, बड़े किसान तो फिर भी बच जाओगे। नरेश टिकैत बोले कि हम ये देख रहे हैं कि किसानों में कितना रोश और गुस्सा है। पंचायतें और महापंचायतें हो रही हैं। जो कभी इतने बड़े पैमाने पर नहीं देख रहे थे।

दिल्ली बॉर्डर (दिल्ली बॉर्डर) पर पश्चिमी यूपी के किसान तो बड़े तादाद में शामिल हो रहे हैं, लेकिन पूर्वी यूपी के किसानों के लिए वहां पहुंचने में हजारों किलोमीटर का सफर करना पड़ता है। हरदोई से बाराबंकी की महापंचायत में शामिल होने आए किसान ईश्वर सिंह ने कहा कि पंचायत से किसानों को अपनी समस्याएं रखने का मंच मिलता है। उन्होंने कहा कि गेहूं-धान का जो रेट 20 साल पहले था, वही मिल रहा है। कीटनाशक, पेट्रोल-डीजल (पेट्रोल-डसेल) सब इतना महंगा हो गया है। मूल्य इतना आसमान छू रहा है कि कोई जवाब नहीं। युवा किसान अनूप 25 किलोमीटर दूर से इस पंचायत में शामिल होने आए थे।

न्यूज़बीप

बीएस एग्रीकल्चर से कर रहे अनूप का कहना है कि ऐसे पंचायतें उन किसानों को चरणगी जो दिल्ली की सीमाओं तक नहीं कर सकती हैं। किसान अनुपम यादव ने कहा कि हम छोटे-सीमंत किसान काम-धंधा को छोड़कर अपनी बातें गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे तक नहीं कर सकते, लिहाजा महापंचायतों में शामिल होकर अपनी परेशानियों गिना रहे हैं।

यही कारण है कि किसान आंदोलन (किसान विरोध) के लम्बे खिंचते देख किसान नेता भी लंबी लड़ाई की तैयारी में जुटे हैं। वे वेस्ट यूपी के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश (यूपी के किसान) और अन्य क्षेत्रों में किसान पंचायत कर रहे किसानों को जोड़ने में जुटे हैं। जो लोग दिल्ली बॉर्डर नहीं पहुंच सकते हैं, उनके क्षेत्रों में किसान पंचायत करने से किसान यूनियनों को फायदा होगा।



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