Thursday, August 18, 2022
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धैर्य बिना आत्म कल्याण नहीं हो सकता है-साध्वी श्री सत्कार श्री जी मसा 

नीमच , संसार के भवसागर से पार जाने के लिए मनुष्य को संयम की राह अपनाकर धैर्य और साहस के साथ सहनशीलता को जीवन में आत्मसात कर आगे बढ़ना होता है ।तभी व्यक्ति जीवन में सफल हो सकता है और तभी उसकी आत्मा का कल्याण हो सकता है। राग द्वेष मान क्रोध माया लोभ लालच सभी का त्याग किए बिना जीवन में सफलता नहीं मिलती है।यह बात साध्वी प्रगुणा श्री जी मसा की शिष्या  साध्वी सत्कार श्रीजी मसा ने कही। वे श्री जैन श्वेतांबर महावीर जिनालय विकास नगर ट्रस्ट के तत्वावधान में आचार्य जिनपुर्णानंद सागर सुरीश्वर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती अष्टापद तीर्थ प्रेरिका साध्वी प्रगुणा श्रीजी मसा आदि ठाणा 5  के सानिध्य में  महावीर जिनालय विकास नगर आराधना भवन में चातुर्मास  के उपलक्ष में महावीर जिनालय विकास नगर आराधना भवन में आयोजित धर्म सभा के अवसर पर बोल रही थी। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में समता का भाव रखना भी एक तपस्या जैसा ही सेवा कार्य है। मानव जीवन में सदैव संसार से व्यक्ति का सरलस्वभाव रहना चाहिए। जब तक मनुष्य जीवन में सांस है तब तक आस है। सांसे चली जाए तो प्रेम खत्म हो जाता है। पत्नी द्वार तक पुत्र शमशान तक साथ देता है। यह शरीर पंचतत्व का बना है एक दिन अग्नि के माध्यम से मिट्टी में मिल जाएगा। मृत्यु शाश्वत सत्य है। इसलिए सदैव धर्म पुण्य के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।संसार में एक परिवार में रहने के बाद भी लोगों के आपस में विचार नहीं मिलते हैं लेकिन साधु-संत अलग अलग राज्य अलग अलग भाषा अलग अलग समाज वर्ग से होने के बावजूद भी सभी में जबरदस्त स्नेह प्रेम वात्सल्य रहता है।उम्र का भी अंतर नहीं होता है सभी एक दूसरे को समान भाव से सेवा करते हैं एक दूसरे के दुख दर्द को दूर करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं साधु संत का समन्वय इतना जबरदस्त होता है कि कोई भी साधु किसी भी प्रकार से दुखी नहीं होता है। साधु जीवन आनंदमय लगता है।साधु जीवन में जो आनंद मिलता है वह संसार में नहीं मिलता है ।साधु साध्वी  शाश्वत सुख के लिए तपस्या करते हैं ।मनुष्य को भी 50 वर्ष की आयु के बाद वानप्रस्थाश्रम में जाकर समाधि के लिए पुण्य कर्म तपस्या व साधना करनी चाहिए। संसार में उपाधि और संयम जीवन में समाधि मिलती है। समाधि से ही अपना कल्याण होता है ।उपाधि से विनाश हो सकता है। आज जमाना कितना बदल गया है लोग श्मशान में भी चाय नाश्ता का प्रयोग कर रहे हैं। शमशान को बगीचा पर्यटन केंद्र बना दिया गया है व्यक्ति यह क्यों नहीं सोचता है कि वह किसी का अंतिम संस्कार शोक में गया है श्मशान घाट कई लोग मोबाइल पर व्यापार का कार्य करते हैं। परमात्मा से प्रतिदिन प्रार्थना करना चाहिए कि राग द्वेष जीवन में नहीं आए। जीवन में सद्बुद्धि आए दुरमति को परमात्मा टाले क्योंकि दुरमति से ही दुर्गति होती है और सद्बुद्धि से सद्गति होती है। पाप करेंगे तो कर्मों का बंधन होगा इसलिए पाप से बचना चाहिए ।ज्ञानी होने के बाद भी आचरण सही नहीं हो तो वह अज्ञानी कहलाता है ।ज्ञान के बाद विचार शुद्ध हो व्यवहार शुद्ध होना चाहिए तभी आत्मा का कल्याण हो सकता है।
धर्म सभा में साध्वी  प्रगुना, प्रमोदिता प्रथम निधि सत्कार निधि आदि का सानिध्य भी मिला।साध्वी प्रथम निधि  म.सा.ने कहा कि महान तत्व के ज्ञाता भी कभी-कभी गलती कर सकते हैं इसलिए आत्मा के तत्व को समझने के बाद ज्ञान अर्जन करने के बाद संसार में शिष्टाचार का पालन करना चाहिए शास्त्र के विपरीत  कोई कार्य नहीं करना चाहिए आचरण में लोग आलोचना करें ऐसा व्यवहार कभी नहीं करना चाहिए तत्वज्ञान के साथ अपने अंदर के मन को भी पवित्र रखना चाहिए ।ऐतत्वों के ज्ञान को समझे बिना आत्म कल्याण का मार्ग कठिन होता है ।धर्मस्थानों पर शासन के शास्त्र भी रहते हैं उसे स्वाध्याय के रूप में पढ़ना चाहिए तभी आत्मा कल्याण हो सकता है तत्व ज्ञान के बिना आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त नहीं होता है।श्री महावीर जिनालय श्री संघ विकास नगर  के अध्यक्ष राकेश आंचलिया सचिव राजेंद्र बंबोरिया ने बताया कि चातुर्मास का कार्यक्रम चातुर्मास   के पावन उपलक्ष में परम पूज्य साध्वी प्रगुणा श्री जी मसा  की पावन निश्रा में 45 तपस्वी श्रद्धालु भक्तों द्वारा सामूहिक   तप की तपस्या की जा रही है। चातुर्मास काल के दौरान  विहर तप तपस्या की शुरुआत  15 जुलाई से प्रारंभ हो गई थी जो निरंतर जारी है।
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