Wednesday, April 14, 2021
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“दिल्ली विधानसभा कानून-व्यवस्था के मामले में हस्तक्षेप का हक नहीं रखता”: फेसबुक एमडी ने दी दलील


फेसबुक इंडिया के एमडी ने कहा कि दिल्ली विधानसभा दिल्ली दंगों के संबंध में कंपनी की भूमिका की जांच नहीं कर सकती है।

नई दिल्ली:

दिल्ली में 2020 में हुए दंगों को लेकर जांच के मामले में दिल्ली विधानसभा के समन पर अपना बचाव करते हुए फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट और एमडी अजीत मोहन ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा। मोहन ने सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज के शोरशराबे भरे वक्त में खामोश रहने का अधिकार एक विशेषता है। एक विधायिका उन्हें कानून-व्यवस्था के मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं रखती है।

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इस मामले में दिल्ली विधानसभा, फेसबुक के अधिकारियों और केंद्र सरकार की दलीलों पर सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। दिल्ली विधानसभा की शांति और सौहार्द कमेटी ने दंगों के मामले में उन्हें गवाह के तौर पर पेश होने में नाकामी के बाद मोहन को समन जारी किया था, जिसे उन्होंने कोर्ट में चुनौती दी थी।

न्यूज़बीप

फेसबुक अधिकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा, इस मामले में पैनल गठित करना दिल्ली विधानसभा का मुख्य कार्य नहीं है, क्योंकि कानून-व्यवस्था का क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी में केंद्र के अधीन आता है। इसके दो मुख्य बिंदु हैं, एक पेश होने को बाध्य करने के लिए शक्तियां होना और दूसरी क्षमता। मैं यह कहना चाहता हूं कि दिल्ली विधानसभा इन दोनों ही मामलों में गलत है।

साल्वे ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये परीक्षण के दौरान कहा कि पिछले दरवाजों से इस तरह शक्तियों का विस्तार करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए और आज के शोरशराबे भरे वक्त में खामोश रहने का अधिकार एक गुण है। यह तय करना, मुझे छोड़ देना चाहिए कि मैं जाना चाहता हूं कि नहीं। वहीं दिल्ली विधानसभा की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि विधानसभा के पास समन जारी करने की शक्तियां हैं।



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