Tuesday, January 31, 2023
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दिगंबर जैन क्षपकराज मुनिराज 108 ज्ञेयसागर जी महाराज का संलेखना व्रत द्वारा समाधि

नीमच। णमोकार महामंत्र साधना केंद्र अतिशय तीर्थ क्षेत्र बही पार्श्वनाथ पर दिनांक 26 दिसम्बर 2022 सोमवार को प्रातः 7.45 पर परम पूज्य क्षपकराज मुनिराज 108 ज्ञेय सागर जी महाराज का संलेखनापूर्वक समाधी मरण हुआ।
उल्लेखनीय है कि मुनिश्री का वर्षा योग क्षेत्र पर ही हुआ है। पिछले 2 माह से स्वास्थ्य खराब होने से औषधि उपचार किया गया, किंतु असाध्य रोग के कारण मुनि श्री द्वारा स्वेच्छा से संल्लेखना द्वारा समाधि की ओर अग्रसर हो गए।
परम पूज्य आचार्य 108 सुंदर सागर जी महाराज साहब संसघ एवं आचार्य 108 सु्व्रत सागर जी महाराज के सानिध्य एवं आर्यिका 105 किर्तिमती माताजी संसघ एवं त्यागीवर्तियो के सानिध्य में 2 दिसंबर से अन्न त्यागकर एवं मौन व्रत ले लिया। 8 दिसंबर से चारों प्रकार के आहार पानी का त्याग भी कर दिया। यम संलेखना वृत उपवास के 18 वें दिन बाद उनका महाप्रयाण हुआ।
क्षेत्र पर ही महाराज की चकडोल निकाली गई। अग्नि संस्कार विधि में बिठाने का सौभाग्य विरेन्द्रकुमार रटलाई परिवार एवं शांतिधारा करने का लाभ शांतिलाल जयकुमार बड़जात्या परिवार मंदसौर को प्राप्त हुआ। पूजन का लाभ वीरेंद्र गांधी परिवार को प्राप्त । मुनिराज को अंतिम संस्कार प्रमोद सेठीया परिवार गरोठ द्वारा किया गया। विधी विधान पंडित विजय कुमार गांधी एवं दीपक भुता द्वारा सम्पन्न की गई।
अंतिम संस्कार षोभायात्रा में मन्दसौर, नीमच, पिपलियामण्डी, मनासा, नारायणगढ़, पिड़ावा, प्रतापगढ़, मिश्रोली, गरोठ, सीतामऊ, दलौदा, इन्दौर, भीलवाड़ा, कोटा, बांसवाड़ा, भवानीमण्डी आदि सभी जगह से सकल जैन समाज के महानुभाव अंतिम षोभायात्रा में शामिल हुए।
संस्था के अध्यक्ष शांतिलाल बड़जात्या ने महाराज श्री का परिचय देते हुए बताया कि महाराज जी मूल रुप से गरोठ के रहने वाले थे। अध्यापक के रूप में 42 वर्षो तक शासकीय सेवाएॅं दीं। सेवानिवृत्ति के बाद वैराग्य की ओर बढे और 73 वर्ष की अवस्था में परम पूज्य 108 शिव सागर जी महाराज भक्तांबर वाले के द्वारा दीक्षा दी गई एवं उपाध्याय पद भी मिला। गृहस्थ जीवन में आप पंडित विद्वान प्रतिष्ठाचार्य एवं बच्चों को पाठशाला में पढ़ाने के रूप में समाज को अपनी सेवाएं प्रदान की। आप अपने जीवन हमेशा सरल स्वभावी समता भावी थे।

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