Friday, January 21, 2022
HomeUttar Pradeshउत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में सदर सीट बीजेपी के लिए चिंता...

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में सदर सीट बीजेपी के लिए चिंता का विषय बन सकती है, यहां पर लोगों का रोष सामने आने लगा है bjp sadar mirzapur vidhansabha seat up election 2022 update


हाइलाइट्स

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इस सीट से बने थे विधायक
  • सपा ने लगातार तीन बार दर्ज की थी जीत
  • 2017 में बीजेपी किया कब्जा

मनीष सिंह, मिर्जापुर
यूपी चुनाव का विगुल बज चुका है, ऐसे में मिर्जापुर जिले की बहुचर्चित नगर विधानसभा सीट को लेकर बीजेपी और सपा में प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला है। इस सीट से हैट्रिक लगाने वाले सपा विधायक और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री कैलाश चौरसिया को 2017 के चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। यह वही चौरसिया है जिनको 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा ने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव में उतारा था।

देश के रक्षा मंत्री भी जीत चुके हैं यहां से चुनाव
वैसे तो यह सीट जिले की चर्चित सीट रही है। कभी बीजेपी का गढ़ माने जाने वाली इस विधानसभा से बीजेपी के टिकट पर डॉ. सरजीत सिंह डंग लगातार 4 बार विधायक चुने गए और मंत्री भी बने। डॉ. डंग 1989 से 1996 तक लगातार इस सीट से विधायक रहे और कल्याण सिंह की सरकार में मंत्री बने। यही नहीं देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इस सीट से 1977 में चुनाव जीतकर विधायक बने थे।

लगातार तीन बार एसपी के कब्जे में थी यह सीट
2002 के चुनाव मे एसपी के उम्मीदवार कैलाश चौरसिया को जनता ने अपना नेता चुना और कैलाश को लगातार तीन बार अपना विधायक चुना। साथ ही कैलाश को दर्जा प्राप्त मंत्री से लेकर राज्यमंत्री तक बने।
UP Chunav: सपा कार्यालय पर अखिलेश यादव की रैली में उमड़ी भीड़, 2500 लोगों पर एफआईआर दर्ज
सपा से बीजेपी ने छीन ली थी यह सीट
2017 के चुनाव में बीजेपी ने एसपी से अपनी सीट छीन ली और विंध्याचल के पंडा रत्नाकर मिश्रा को अपना विधायक चुन लिया। मोदी लहर में रत्नाकर को कुल पड़े मतों में आधे वोट अकेले ही मिल गए। आधे में ही बाकी प्रत्याशियों को संतोष करना पड़ा।

वर्तमान विधायक नहीं बना सके आम लोगों से कनेक्टिविटी
केवी डिग्री कॉलेज के प्रवक्ता शरद मेहरोत्रा कहते हैं कि, इस बार का चुनाव 2017 से अलग होने वाला है। पिछली बार हिदू-मुस्लिम को लेकर एक माहौल बना था जो कि इस बार दिखाई नहीं पड़ता। बीजेपी के विधायक रत्नाकर मिश्रा इन पांच सालो में आम मतदाताओं से कनेक्टिविटी नहीं बना पाए।

धर्म जाति से पहले परिवार चलाना है जरूरी
2017 के चुनाव में बीएसपी के उम्मीदवार रहे परवेज अहमद कहते हैं कि इस बार आम जनता मंहगाई और बेरोजगारी को लेकर त्रस्त है। लोगों के पास नौकरी नहीं है। महंगाई के चलते घर चलाना मुश्किल हो गया है। अब लोग जाति धर्म से पहले उनको उनका पेट और परिवार दिखाई पड़ रहा है। इन पांच सालों में लोगों ने देख लिया है। अब लोग झांसे में नहीं आने वाले हैं।

नहीं दिख रही 2017 वाली लहर
वरिष्ठ पत्रकार सलील पांडे कहते हैं कि नगर विधानसभा बीजेपी और आरएसएस का गढ़ रहा है, लेकिन मंडल कमीशन के बाद स्थितियां बदल गई। 2017 के चुनाव में जो लहर थी वह इस बार नजर नहीं आ रही है। आम मतदाता परेशान है। युवाओं में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। ऐसे में कह सकतें है कि इस बार 2014 और 2017 वाला माहौल नहीं है। हालांकि 2022 में कौन जीतेगा, यह अभी कहा नहीं सकता है। साथ ही सलिल पांडे ने कहा कि 2017 के चुनाव में छोटे दल हो या नेता, बीजेपी को समुद्र मानकर उसमें समाहित हो रहे थे, लेकिन इस बार उल्टा माहौल देखने को मिल रहा है।

यूपी चुनाव

यूपी चुनाव



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments