Monday, May 17, 2021
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, पंचायत चुनाव मतगणना के दौरान अगर कोविंद प्रोटोकॉल का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है तो …


कोर्ट ने अगली सुनवाई पर पेन ड्राइव में काउंटिंग एरिया और केंद्र दोनों के फुटेज मांगे हैं।

कोर्ट ने अगली सुनवाई पर पेन ड्राइव में काउंटिंग एरिया और केंद्र दोनों के फुटेज मांगे हैं।

यूपी पंचायत चुनव 2021: जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया गया कि राज्य में ग्राम पंचायत चुनावों की मतगणना के दौरान को विभाजित दिशानिर्देशों का भारी उल्लंघन किया गया। लोग मतगणना स्थलों पर भारी संख्या में एकत्रित हुए और चुनाव अधिकारी और पुलिस मूक दर्शक बने रहे।

पुरतर प्रदेश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर भर्ती सुनील जनहित याचिका पर हुई सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलेक्शन कमीशन से अगली सुनवाई पर पंचायत चुनाव के मतगणना स्थापित का सीसीटीवी फुटेज मांगा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर पेन ड्राइव में काउंटिंग एरिया और केंद्र दोनों के फुटेज मांगे हैं। कोर्ट ने लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, गाजियाबाद, मेरठ, गौतम बुद्धनगर और आगरा जिलों के पासवर्ड मांगा है। आपको बता दें कि कही इससे पहले हाईकोर्ट ने कहा था कि हमें यह देखकर दुख हो रहा है कि अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो रही है। यह एक आपराधिक कृत्य है और यह उन लोगों द्वारा नरसंहार से कम नहीं है, जिनके पास तरल क्षय ऑक्सीजन की निरंतर खरीद और आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम सीडी गया है। जनहिताएंसीका पर परीक्षण के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि राज्य में ग्राम पंचायत चुनावों की मतगणना के दौरान को विभाजित दिशानिर्देशों का भारी उल्लंघन किया गया। लोग मतगणना स्थलों पर भारी संख्या में एकत्रित हुए और चुनाव अधिकारी और पुलिस मूक दर्शक बने रहे। इस पर अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को सुनवाई की अगली तारीख 7 मई, 2021 को लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, गाजियाबाद, मेरठ, गौतम बुद्ध नगर और आगरा में मतगणना केंद्रों का सीसीटीवी फुटेज पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा, हम यहां स्पष्ट करते हैं कि यदि आयोग सीसीटीवी फुटेज से यह पाता है कि कोविंदल का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है तो वह इस संबंध में कार्य योजना पेश करेगा। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने जस्टिस वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव की कोरोना से निधन पर हलफनामा मांगा है। एडिक्शन एडवोकेट जनरल से उन्हें दिए गए इलाज को लेकर हलफनामे में जानकारी पूछी गई है। 7 मई को सुबह 11:00 बजे केस की अगली सुनवाई होगी। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजीत कुमार की ग्वालनेट बेंच मामले की सुनवाई करेंगे। हाईकोर्ट ने कहा कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति न होने से विभाजित मरीजों की मौत आपराधिक कृत्य है और को विभाजित मरीजों की मौत उनके लिए किसी नरसंहार से कम नहीं है, जिसे लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम सौंप दिया गया है। वहीं कोर्ट में स्टेट इलेक्शन कमीशन की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया। 9 जिलों के डिस्ट्रिक्ट जज की ओर से कोविड को लेकर अदालत में रिपोर्ट दाखिल की गई। एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने कोर्ट से 2 दिन की मोहलत मांगी है। 27 अप्रैल को पिछली सुनवाई के आदेश के पालन के लिए समय मांगा है। राज्य सरकार के को विभाजित को लेकर उठाए गए कदमों और चिंता से भी अवगत कराया गया। राज्य सरकार ने बताया कि क्य प्रदेश में 17614 आवास बेड और 5510 आईसीयू व एसडीयू बेड अलग-अलग अस्पतालों में उपलब्ध हैं। सरकार ने कोर्ट को 2 दिन जुटाए वीकेंड कर्फ्यू की भी जानकारी दी। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सीनियर एडवोकेट अमरेन्द्र नाथ सिंह कोर्ट से मांग की कही कोरोना के संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए लॉकडाउन ही अंतिम विकल्प है।








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