Saturday, October 24, 2020
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असदुद्दीन ओवैसी ने जताई आशंका, 'अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भी प्रचंड मुहिम शुरू होगी RSS'


असदुद्दीन ओवैसी ने साधा संघ पर निशाना साधा।

असदुद्दीन ओवैसी ने साधा संघ पर निशाना साधा।

असदुद्दीन ओवैसी (असदुद्दीन ओवैसी) ने ट्वीट किया, 'जिस बात से डर था वही हो रहा है। बाबरी मस्जिद से जुड़े फैसलों की वजह से संघ परिवार के लोगों के इरादे और भी मज़बूत हो गए हैं। '

  • News18Hindi
  • आखरी अपडेट:
    18 अक्टूबर, 2020, सुबह 9:20 बजे IST

नई दिलवाली यूपी के मथुरा (मथुरा) में श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर (श्री कृष्ण जन्मस्थान) में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद (ईदगाह) को हटाकर संबंधित जमीन वापस उसके मालिक श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट को सौंपे जाने की स्वीकृति देते हुए शुक्रवार को मुकदमे के लिए मंजूर कर ली गई। इस पर ऑल इंडिया मजलिस ए इद्दतेहादुल मस्जिद (एआईएमआईएम) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी (असदउद्दीन ओवैसी) ने राणा शवयसेसेवक संघ पर निशाना साधा है।

असदुद्दीन ओवैसी ने विवादित बयान देते हुए ट्वीट किया, 'जिस बात से डर था वही हो रहा है। बाबरी मस्जिद से जुड़े फैसलों की वजह से संघ परिवार के लोगों के इरादे और भी मज़बूत हो गए हैं। याद रखिए, अगर आप और हम अभी भी गहरी नींद में रहेंगे तो कुछ साल बाद संघ इस पर भी एक हिंसक मुहिम शुरू करेगा और कांग्रेस भी इस मुहिम का एक अटूट हिस्सा बनेगी। ' उन्हें लोगों से संघ परिवार से सतर्क रहने को कहा गया है।

ओवैसी ने कहा, 'पूजा का स्थान अधिनियम 1991, पूजा के स्थान को बदलने से मना करता है। गृह मंत्रालय को इस अधिनियम का प्रशासनिक अधिकार दिया गया है, इसकी व्यवहार न्यायालय में क्या होगा? शाही ईदगाह ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ने अक्टूबर 1968 में इस विवाद को हल किया। अब यह क्यों बदल रहा है? '

बता दें कि लखनऊ की वकील रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य लोगों ने सोमवार को जिला न्यायाधीश साधना ठाकुर की अदालत में यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील हरीशंकर जैन और विष्णु जैन के माध्यम से दाखिल की थी। इस पर परीक्षण करने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया गया।

वकील जैन के अनुसार, 'जब हम लोगों ने इस संबंध में एक याचिका मथुरा के ही दिवानी उपधी (प्रवर वर्ग) की अदालत में 25 सितंबर को दाखिल की तो वहां प्रभारी दिवानी न्यायाधीश (ऊपरी जिला एवं त्वरित न्यायालय संख्या दो) ने 30 सितंबर को दिए गए फैसले में इस तर्क के साथ याचिका खारिज कर दी गई कि याची न तो उक्त ट्रस्ट का सदस्य है और न ही मामले में किसी का संबंध से संबंधित है। '

उन्होंने बताया कि उनके विरूद्ध याचिकाकर्ताओं ने अपील की थी जिस पर फैसला देते हुए जिला न्यायाधीश ने उनकी याचिका मंजूर कर ली और अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख भी सुनिश्चित कर दी।



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