Wednesday, April 14, 2021
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अखिलेश यादव का आह्वान- 14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती पर मनाने वाले ‘दलित दीवाली’


समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अम्बेडकर जयंती पर दलित दीवाली मनाने का आहानन किया है। (फाइल फोटो)

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अम्बेडकर जयंती पर दलित दीवाली मनाने का आहानन किया है। (फाइल फोटो)

लखनऊ समाचार: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा है कि सपा पूरे देश और प्रदेश के लोगों से डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर 14 अप्रैल को दलित दीवाली मनाने का आह्वान करती है।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (समाजवादी पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (अखिलेश यादव) ने गुरुवार को प्रदेश और देशवासियों से आह्वान किया कि 14 अप्रैल को बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती (डॉ भीमराव अम्बेडकर जयंती) पर दलित दीवाली (दलित दिवाली) समारोह। अखिलेश ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि आज कॉन्स्टेबल में है।

अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है, “भाजपा के राजनीतिक अमावस्या के काल में वो संविधान ख़राब में है, जिससे बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर ने स्वतंत्र भारत को नई रोशनी दी थी। इसलिए बाबासाहेब डॉ। भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती, 14 अप्रैल को समाजवादी पार्टी उप्र, देश व विदेश में ‘दलित दीवाली ’मनाने का आह्वान करती है।”

akhilesh दलित दिवाली

सपा प्रमुख अखिलेश यादव का ट्वीट

कोरोना परिस्थिति में सरकार पर लापरवाही का आरोपबता दें इससे पहले बुधवार को सपा प्रमुख ने बयान जारी करते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश में कोरोना संकट भैरह होता रहा है। ईमानदार लोगों की संख्या और मौतों में रोजाना वृद्धि हो रही है। कोरोना पर नियंत्रण की पारदर्शी समुचित व्यवस्था के बजाय मुख्यमंत्री भाजपा के स्टार प्रचारक बने अन्य राज्यों में भाषण देते घूम रहे हैं। राज्य सरकार के बेपरवाह बाईपो कोरोना पर नियंत्रण के झूठे दावे के साथ बस अपनी वाहवाही लूटने में लगे रहे। नतीजा सामने है कोरोना की दूसरी लहर के कहर से हर तरफ हाहकार मचा हुआ है।

भाजपा की लापरवाह सरकार के कारण कोरोना का संक्रमण थमने की उम्मीद नहीं दिख रही है। इसके सापेक्ष स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बदहाल हैं। कोरोना जांच के नाम पर महज खानापूरी हो रही है। समय से जांच परिणाम न मिलने से गम्भीर रोगियों को भी अस्पतालो में इलाज नहीं मिल रहा है। कितने ही लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ चुके हैं। अस्पतालों में न बिस्तर हैं, न पर्याप्त चिकित्सा और पैरामेडिकल स्टाफ है। पूरा एक साल ऐसा बीता है, जिसमें जीवन की सभी गतिविधियों के लगभग ठप्प होना है। शिक्षण संस्थानों में अभी भी पढ़ाई नियमित रूप से शुरू नहीं हो पाई है।








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