Monday, May 17, 2021
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अक्टसीजन की कमी से लोगों की मौत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, यह नरसंहार से कम नहीं


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति न होने से को विभाजित -19 मरीजों की मौत पर एक सख्त टिप्पणी करते हुए इसे आपराधिक कृत्य करार देते हुए कहा कि यह उन अधिकारियों द्वारा ‘नरसंहार से कम नहीं’ जिन्हें इसकी निरंतर आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। । अदालत ने यह टिप्पणी की सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उन खबरों पर जिन्होंने कहा, ऑक्सीजन की कमी के कारण लखनऊ और मेरठ जिले में कोविद -19 मरीजों की जान गई। अदालत ने लखनऊ और मेरठ के जिला प्राधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इनकी 48 घंटे के भीतर सूक्ष्म जांच करें। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजित कुमार की पीठ ने राज्य में संक्रमण के प्रसार और पृथक-वास केंद्र की स्थिति संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने दोनों जिला प्राधिकरणों से कहा है कि वे मामले की अगली सुनवाई पर अपनी जांच रिपोर्ट पेश करें और अदालत में ऑफ़लाइन उपस्थित रहें। अदालत ने कहा कि हमें यह देखकर दुख हो रहा है कि अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो रही है। यह एक आपराधिक कृत्य है और यह उन लोगों द्वारा नरसंहार से कम नहीं है, जिनके पास तरल क्षय ऑक्सीजन की निरंतर खरीद और आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम सीडी गया है। पीठ ने कहा कही जब विज्ञान इतनी उन्नति कर गया है कि इन दिनों हृदय रोग लागत और मस्तिष्क की सर्जरी की जा रही है, ऐसे में हम अपने लोगों को इस तरह से कैसे मरने दे सकते हैं। आमतौर पर हम सोशल मीडिया पर वायरल हुई ऐसी खबरों को जांचने के लिए राज्य और जिला प्रशासन से नहीं कहते, लेकिन इस जनहित याचिका में पेश अधिवक्ता इस तरह की खबरों का समर्थन कर रहे हैं, इसलिए हमारी सरकार को तत्काल इस संबंध में कदम उठाने के लिए के लिए आवश्यक कहें। लोकन के दौरान अदालत को बताया गया कि पिछले रविवार को मेरठ मेडिकल कॉलेज के नए ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में ऑक्सीजन नहीं मिलना से पांच मरीजों की मौत की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इसी तरह, लखनऊ के गोमती नगर में सन अस्पताल और एक अन्य निजी अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होने से डॉक्टरों के को विभाजित मरीजों से अपनी व्यवस्था खुद करने की खबर भी सोशल मीडिया पर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश वीके श्रीवास्तव की संक्रमण से मृत्यु पर अदालत ने कहा कही हमें बताया गया है कि न्यायमूर्ति श्रीवास्तव को 23 अप्रैल की सुबह लखनऊ के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन शाम तक उनकी देखभाल नहीं की गई। शाम 7:30 बजे हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया और उसी रात उन्हें एक्सपीआई में ले जाया गया जहां वह पांच दिन आईसीयू में रही और उनके कोरोना संक्रमण से असामयिक मृत्यु हो गई। अदालत ने अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल से कहा है कि वह हलफनामा दाखिल कर बताएं कि राम मनोहर लोहिया अस्पताल में न्यायमूर्ति श्रीवास्तव का क्या इलाज हुआ और उन्हें 23 अप्रैल को ही दिल्ली सरकार ने क्यों नहीं लिया? अवैध रूप से रखे ऑक्सीजन सिलेंडर, रेमडेसिवीर इंजेक्शन / गोलियां और ऑक्सीमीटर को मालबंदी में रखे जाने पर अदालत ने कहा कि इन वस्तुओं को मालखाने में रख किसी भी तरह से जनहित में नहीं है क्योंकि ये सभी खराब हो जाएंगे। इस पर गोयल ने कहा कि वह इस मुद्दे को राज्य सरकार के समक्ष उठाएंगे ताकि इनका उचित उपयोग हो सके और ये बेकार नहीं जाएंगे। परीक्षण के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य में ग्राम पंचायत चुनावों की मतगणना के दौरान को विभाजित दिशानिर्देशों का भारी उल्लंघन किया गया। लोग मतगणना स्थलों पर भारी संख्या में एकत्रित हुए और चुनाव अधिकारी और पुलिस मूक दर्शक बने रहे। इस पर अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को सुनवाई की अगली तारीख 7 मई, 2021 को लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, गाजियाबाद, मेरठ, गौतम बुद्ध नगर और आगरा में मतगणना केंद्रों का सीसीटीवी फुटेज पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा, हम यहां स्पष्ट करते हैं कि यदि आयोग सीसीटीवी फुटेज से यह पाता है कि कोविंदल का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है तो वह इस संबंध में कार्य योजना पेश करेगा।





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